Dec ०४, २०२१ २३:१२ Asia/Kolkata
  • उत्तरी कोरिया के साथ संबन्ध सामान्य न होने का कारण कहीं अमरीकी नीतियां तो नहीं?

अमरीका ने उत्तरी कोरिया से मांग की है कि वह द्विपक्षीय वार्ता में भाग लेने के लिए क़दम आगे बढ़ाए।

अमरीकी रक्षामंत्री लायड आस्टेन ने कहा है कि हमारी अब भी उत्तरी कोरिया से यही मांग है कि वह वार्ता में भाग ले।

उनका कहना था कि अमरीका अब भी यही मानता है कि उत्तरी कोरिया अपने मिसाइल और हथियारों के कार्यक्रम को विस्तार दे रहा है।

इसी बीच दक्षिणी कोरिया के रक्षामंत्री ने अपने देश में 28 हज़ार 500 अमरीकी सैनिकों की उपस्थिति की पुष्टि करते हुए उत्तरी कोरिया से वही मांग की जो अमरीकी विदेशमंत्री ने पियुंयांग से की थी।

2020 में जो बाइडेन के सत्ता में आने के बाद उत्तरी कोरिया के मामले को उस प्रकार से अमरीका ने नहीं उठाया जैसा कि डोनाल्ड ट्रम्प के काल में उठाया गया था।  ट्रम्प के काल में उत्तरी कोरिया के साथ वार्ता और उसके परमाणु निशस्त्रीकरण पर बहुत कुछ बोला गया।  ट्रम्प इस मुद्दे को स्वयं भी व्यक्तिगत रूप में देख रहे थे।  यही कारण है कि अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प ने उत्तरी कोरिया के नेता किम जांग ऊन से भेंटवार्ताएं की थीं।

ट्रम्प के काल में राजनीतिक अस्थिरता और पियुंगयांग के बारे में अमरीका की नीतियों के कारण उत्तरी कोरिया, वाइट हाउस की बातों पर अधिक ध्यान नहीं देता था।  उसके भीतर अमरीका के प्रति एक प्रकार का अविश्वास पाया जाता था। अमरीका ने जून 2018 में ट्रम्प और उत्तरी कोरिया के नेता के बीच सिंगापुर में होने वाली पहली भेंटवार्ता के बाद पियुंगयांग के बारे में विरोधाभासी नीति अपनाई थी।  यही कारण था कि दोनो देशों के बीच बाद वाली शिखर वार्ताएं विफल हो गईं।

पहले चरण की वार्ता में अमरीका ने उत्तरी कोरिया को यह वचन दिया था कि मिसाइलों के परीक्षण के रोके जाने की स्थिति में वह पियुंगयांग पर लगे प्रतिबंधों को हटा लेगा। अमरीका की बातों में आकर उत्तरी कोरिया ने अपना मिसाइल कार्यक्रम बंद कर दिया किंतु अमरीका ने अपना वादा पूरा नहीं किया और उत्तरी कोरिया के विरुद्ध प्रतिबधों को जारी रखा।  इसके बाद कूटनीतिक दबाव बनाकर व्यवहारिक रूप में अमरीका ने उत्तरी कोरिया के परमाणु निशस्त्रीकरण की प्रक्रिया को मुख्य मार्ग से हटा दिया।

उत्तरी कोरिया के साथ वार्ता को रुके हुए अब दो वर्षों का समय हो चला है। एसे में अमरीकी रक्षामंत्री को वाशिग्टन तथा पियुंगयांग के बीच वार्ता को पुनः आरंभ कराने की याद आई है।  हालांकि उत्तरी कोरिया के बारे में अमरीका की नीतियों में किसी भी प्रकार का कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।

एसे में यह कहा जा सकता है कि  उत्तरी कोरिया से विश्वास बहाली के लिए अमरीका जबतक कोई स्पष्ट कार्यक्रम तैयार नहीं करता उस समय तक पियुंगयांग के परमाणु निशस्त्रीकरण को लेकर किसी भी प्रकार की द्विपक्षीय वार्ता आरंभ नहीं हो सकती और अमरीका तथा उत्तरी कोरिया के बीच तनाव, पहले की ही भांति बाक़ी रहेगा।

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