May १८, २०२२ १९:४४ Asia/Kolkata
  • रूस और अमेरिका में भारत को लेकर चल रही बहस ने बढ़ाई धड़कनें! सवाल एक मोदी बिकेंगे या टिकेंगे?

अमेरिका ने अब भारत की रूसी हथियारों पर से निर्भरता को कम करने के लिए कमर कस ली है। मीडिया रिपोर्टों की मानें तो रूस संग खड़े भारत को रिझाने के लिए अमेरिका ने एक नई चाल चली है।

यूक्रेन की सेना को अरबों डॉलर के हथियार देकर रूस की सेना के बढ़ते क़दमों को रोक़ने वाले अमेरिका की नज़र अब व्‍लादिमीर पुतीन के दोस्‍तों पर भी हो गई है। अमेरिका भारत के लिए एक सैन्‍य सहायता पैकेज तैयार कर रहा है ताकि नई दिल्‍ली के साथ रक्षा संबंधों को और ज़्यादा मज़बूत किया जा सके। साथ ही भारत की रूसी हथियारों पर निर्भरता को कम किया जा सके। बताया जा रहा है कि अमेरिकी हथियारों का यह पूरा पैकेज 50 करोड़ डॉलर का हो सकता है। समाचार एजेंसी ब्‍लूमबर्ग ने इस पूरे मामले से जुड़े एक सूत्र के हवाले से कहा कि 50 करोड़ डॉलर की सैन्‍य सहायता के बाद मिस्र के बाद भारत इस तरह की सहायता पाने वाला दूसरा बड़ा देश बन जाएगा। यह अभी स्‍पष्‍ट नहीं है कि समझौते की घोषणा कब होगी या कौन-कौन से हथियारों को शामिल किया जाएगा। एक वरिष्‍ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका का यह क़दम राष्‍ट्रपति जो बाइडन की ओर से भारत को लंबी अवधि के लिए सुरक्षा सहयोगी बनाने के प्रयासों का हिस्‍सा है।

भारतीय प्रधानमंत्र नरेंद्र मोदी

अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि भारत ने यूक्रेन युद्ध में रूस की आलोचना नहीं की है, इसके बाद भी यह अमेरिकी हथियार उसे दिए जाएंगे। अमेरिका की कोशिश है कि वह भारत का हर क्षेत्र में एक विश्‍वसनीय सहयोगी देश बने। बाइडन प्रशासन के इसके अलावा अन्‍य देशों जैसे फ्रांस के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि भारतीय प्रधानमंत्री मोदी की सरकार को वह प्रत्‍येक हथियार मिले जिसकी उन्‍हें ज़रूरत है। अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि भारत ने रूस पर से अपने हथियारों की निर्भरता को कम करने के लिए पहले ही प्रयास तेज़ कर दिया है और बाइडन प्रशासन इसे और तेज़ करना चाहता है। बाइडन प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि भारत को किस तरह से बड़े हथियार जैसे फाइटर जेट, नौसैनिक युद्धपोत और युद्धक टैंक मुहैया कराए जाएं। अमेरिकी प्रशासन इन क्षेत्रों में भी बड़ी सफलता हासिल करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका की 50 करोड़ डॉलर की हथियारों की सहायता एक तरह से सहायता करने का प्रतीकात्‍मक संकेत है। भारत के विदेश मंत्रालय ने अभी इस पर कोई कॉमेंट करने से इंकार कर दिया है। वहीं रूसी अधिकारी मोदी की ओर देख रहे हैं कि वह इस बारे में क्या कहते हैं। जबकि सोशल मीडिया पर इस संबंध में कई तरह की पोस्ट ट्रेंड कर रही है। जिसमें कई यूज़र्स ने लिखा है कि वह इस बात का इंतेज़ार कर रहे हैं कि बाइडन की पेशकश पर मोदी बिकेंगे या टिकेंगे? (RZ)

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