May २०, २०२२ ११:२४ Asia/Kolkata
  • अमरीकी सेनेट ने यूक्रेन के लिए मंज़ूर की 40 अरब डालर की मदद, फ़िनलैंड और स्वेडन जा सकते हैं अमरीकी सैनिक!

अमरीकी सेनेट ने युद्ध लड़ रहे यूक्रेन के लिए 40 अरब डालर की मदद को मंज़ूरी दे दी है जबकि कीएफ़ को सैनिक उपकरणों की भारी खेप भी मिलने वाली है। सेनेट ने बीती रात प्रस्ताव को मंज़ूरी दी अब इस पर राष्ट्रपति बाइडन के हस्ताक्षर होने हैं।

अमरीकी राष्ट्रपति के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सालीवान ने एक पत्रकार सम्मेलन में कहा कि राष्ट्रपति बाइडन अपनी एशिया यात्रा के दौरान यूक्रेन को अपूर्व मदद देने संबंधी बिल पर हस्ताक्षर करेंगे। उन्होंने इतनी बड़ी मदद को मंज़ूरी देन पर अमरीकी सांसदों का आभार जताया।

रूसी संसद में अंतर्राष्ट्रीय मामलों की कमेटी के प्रमुख ल्युनिड स्लोत्स्की ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह अमरीकी करदाताओं का पैसा टैंक की नली में झोंकने की प्रक्रिया है।

उन्होंने टेलीग्राम चैनल पर लिखा कि युक्रेन की जनता को इस मदद पर हरगिज़ ख़ुश नहीं होना चाहिए क्योंकि अनुभवों से साबित हो चुका है कि इन तथाकथित सहायताओं का मूल भाग यूक्रेन पहुंचने से पहले ही लुट जाता है इससे युक्रेन की जनता को कोई फ़ायदा नहीं मिलता। उन्होंने लिखा कि वाशिंग्टन की नज़र में यूक्रेन की जनता की कोई अहमियत नहीं है यह पैसा हथियारों के भंडार पर ख़र्च होगा और यूक्रेन की जनता के खाद्यान्न के भंडार इसी तरह ख़ाली होते जाएंगे।

दूसरी ओर अमरीका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने एक बार फिर कहा कि वे फ़िनलैंड और स्वेडन की नैटो में सम्मिलिति का समर्थन करते हैं। उन्होंने दावा किया कि नए सदस्यों का नैटो में शामिल होना किसी अन्य देश के लिए ख़तरा नहीं है।

इससे पहले वाइट हाउस ने एलान किया कि यूक्रेन को मोबाइल राडार सिस्टम और तोपख़ानों के गोलों की नई खेप भेजी जाएगी। बयान में कहा गया है कि यूक्रेन को पहले भी इस तरह की खेप से काफ़ी फ़ायदा पहुंचा है और अब यह नई बड़ी खेप यूक्रेन को दी जाएगी।

अमरीकी विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन ने भी कल रात संयुक्त राष्ट्र संघ में बयान दिया कि डोनबास और अन्य इलाक़ों में यूक्रेन की सेना के हमले रुकने नहीं चाहिएं क्योंकि अगर हमले रुके तो यूक्रेन सरकार का अस्तित्व ख़त्म हो जाएगा।

दूसरी ओर पेंटागोन के प्रवक्ता जान किर्बी ने कहा कि फ़िनलैंड और स्वेडन की सरकारों से इन देशों में अमरीकी सैनिकों की तैनाती के विषय पर बातचीत शुरू हो गई है। प्रवक्ता ने कहा कि विमर्श जारी है, अभी हम अंतिम फ़ैसले पर नहीं पहुंचे हैं लेकिन हमें यक़ीन है कि जब ठोस सुरक्षा गैरेंटी की बात आएगी तो अमरीका यह गैरेंटी देगा।

हमारा व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए क्लिक कीजिए

हमारा टेलीग्राम चैनल ज्वाइन कीजिए

हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!

ट्वीटर पर हमें फ़ालो कीजिए

टैग्स