May २४, २०२२ १७:४२ Asia/Kolkata

वर्तमान समय में विश्व, दूसरे महायुद्ध के बाद की सबसे बुरी आर्थिक स्थति से गुज़र रहा है। 

इस समय पूरी दुनिया में आर्थिक दृष्टि से समस्याएं पैदा होती जा रही हैं।  कोरोना या कोविड-19 को पूरी दुनिया में फैले हुए अब दो साल गुज़र चुके हैं।  इस महामारी के दुष्परिणामों का प्रभाव अभी भी बहुत से क्षेत्रों में बाक़ी है।

विश्व, कोविड-19 के दुष्प्रभावों से पूरी तरह से अभी उबर भी नहीं पाया था कि यूक्रेन संकट आरंभ हो गया।  इस संदर्भ में आईएमएफ के प्रमुख ने कहा है कि यूक्रेन संकट से दुनिया को मंहगाई और आर्थिक अस्थिरता का सामना करना होगा।  श्रीमाती क्रिस्टलिना जार्जीएवा ने कहा कि कोरोना महामारी, जलवायु परिवर्तन और यूक्रेन संकट ने विश्व को अभूतपूर्व आर्थिक संकट में डाल दिया है। वे कहती हैं कि इस समय संसार दूसरे महायुद्ध के बाद सबसे बुरी आर्थिक स्थति से गुज़र रहा है।

कोरोना के कारण बहुत से देशों को अपने स्वास्थ्य एवं चिकित्सा बजट को बढ़ाना पड़ा जिसके परिणाम स्वरूप उत्पादन में कमी हुई जिससे बेरोज़गारी में वृद्धि हो गई तथा बहुत सी कंपनिया दीवालिया हो गईं।  कोरोना ने विश्व के बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित किया।  इसी बीच विश्व बैंक ने भी आने वाले समय में दुनिया के लिए आर्थिक संकट की भविष्यवाणी की है।

विश्व के देश कोरोना महामारी के बाद अपनी अर्थव्यवस्थाओं को ठीक करने के प्रयास कर रहे थे इसी बीच यूक्रेन संकट आरंभ हो गया।  रूस और यूक्रेन के बीच आरंभ होने वाली लड़ाई ने परिस्थतियों को अधिक जटिल कर दिया।  विश्व बैंक का यह मानना है कि रूस तथा यूक्रेन के बीच होने वाला युद्ध, विश्व के आर्थिक विकास को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है।  यह विश्व के देशों के सकल घरेलू उत्पादा को आधे पर ला सकता है।

विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि वैश्विक उत्पादन और व्यापार मेंं हालांकि रूस और यूक्रेन की भागीदारी बहुत अधिक नहीं है किंतु विशेष बात यह है कि यह दोनो देश दैनिक आवश्यकताओं की वस्तुओं जैसे अनाज और ऊर्जा के महत्वपूर्ण उत्पादनकर्ता हैं।  नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि रूस तथा यूक्रेन के बीच जारी युद्ध, वैश्विक जीडीपी को 1.3 से 0.7 के बीच पहुंचा सकता है।  इस हिसाब से सन 2022 के दौरान यह 3.7 से 3.1 के बीच में ही रह पाएगी।

अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष आईएमएफ की प्रमुख श्रीमाती क्रिस्टलिना जार्जीएवा ने विश्व के धनवान देशों से मांग की है कि वे व्यापार की बाधाओं को दूर करें।  उन्होंने इसी के साथ यह भी कहा है कि यह देश अपने सिस्टम में सुधार करके निर्धन एवं कमज़ोर देशों  के लिए विकास के अवसर उपलब्ध करवाएं।  उनका कहना है कि खाद्य पदार्थों और ऊर्जा के मूल्यों में वृद्धि वास्तव में चिंता का विषय है।

आईएमएफ की प्रमुख के अनुसार वर्तमान आर्थिक संकट ने विश्व के देशों विशेषकर तीसरी दुनिया के देशों के लिए विषम परिस्थतियों को जन्म दिया है जिनको दूर करने के लिए उनकी हर प्रकार से सहायता की जानी चाहिए।

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