May २६, २०२२ १३:४९ Asia/Kolkata
  • क्या पाकिस्तान एक नए संकट की ओर बढ़ रहा है?

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के समर्थकों का राजधानी इस्लामाबाद में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया है, जिसके बाद मुस्लिम लीग नवाज़ के नेतृत्व में गठबंधन की नई सरकार के लिए एक नई चुनौती खड़ी हो गई है।

बुधवार को इमरान ख़ान संसद भंग करके देश में आम चुनाव कराने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में अपने समर्थकों के साथ इस्लामाबाद पहुंचे थे, इस बीच पूरे पाकिस्तान में उनके समर्थकों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें देखने को मिली हैं। रिपोर्ट के मुताबिक़, पुलिस ने 500 से ज़्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया है और पीटीआई कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी का सिलसिला अभी जारी है।

पेशावर से इस्लामाबाद की ओर मार्च करने वाले इमरान ख़ान और उनके समर्थकों को निंयत्रण में करने के लिए राजधानी इस्लामाबद में सुरक्षा के कड़े प्रबंधन किए गए, जिसके तहत 22,000 सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है।

विरोध प्रदर्शनकारियों का मुक़ाबला करने के लिए पाकिस्तान सरकार के फ़ैसले से इस देश में सुरक्षा संकट उत्पन्न होने की आशंका जताई जा रही है।

इस बीच, पाकिस्तान के गृह मंत्री राणा सनाउल्लाह ने इमरान ख़ान की पार्टी पाकिस्तान तहरीके इंसाफ़ पीटीआई के कार्यकर्ताओं पर हिंसा करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुक़सान पहुंचाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पीटीआई के लॉन्ग मार्च के दौरान सरकारी संपत्ति को हुए नुक़सान का फ़िलहाल अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता है।

पीटीआई के कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि वह मार्च में शामिल महिलाओं और बच्चों पर भी रहम नहीं कर रही है और उनके ख़िलाफ़ ऐसे आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो एक्सपायर हो चुके हैं।

इमरान ख़ान के समर्थकों के विरोध से निपटने के लिए सरकार ने जिस शैली को अपनाया है, उसने पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप के लिए मजबूर कर दिया, जिससे स्पष्ट है कि शहबाज़ शरीफ़ के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने जल्दबाज़ी से काम लिया है और विरोध प्रदर्शनकारियों के साथ ग़ैर-पेशेवराना रवैया अपनाया है, जिससे हालात बेक़ाबू हो सकते हैं और सड़कों पर संघर्ष शुरू हो सकता है।

आशा की जाती है कि पाकिस्तान सरकार विरोध करने के अपने विरोधियों के अधिकार का सम्मान करेगी और उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के आयोजन की अनुमति देगी। ताकि आर्थिक और सुरक्षा संकट से गुज़र रहे इस देश को अधिक समस्याओं का सामना नहीं करना पड़े।

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