May २६, २०२२ १७:१७ Asia/Kolkata
  • क्या दूसरों के घरों में आग लगा रहा अमेरिका अब उसी आग में ख़ुद जलने लगा है?

लगातार कई दशकों से दुनिया भर में हथियारों का सबसे बड़ा सप्लायर बना अमेरिका अपनी इस तरक़्क़ी से ख़ुश नज़र आता रहा है। आए दिन इस तरह की ख़बरें पढ़ने और देखने को मिलती रहती हैं कि अमेरिका इस साल हथियारों के निर्यात में पहले नंबर पर रहा। ऐसी ख़बरों को व्हाइट हाउस में बैठे अमेरिकी राष्ट्रपति और उनके सहयोगी अपने लिए गौरवपूर्ण समझते हैं।

इस समय पश्चिमी एशिया के ज़्यादातर देशों में जल रही युद्ध की आग में अगर किसी की सबसे अहम भूमिका है तो वह है अमेरिकी हथियारों की। अफ़ग़ानिस्तान, सीरिया, इराक़, यमन, लीबिया, फ़िलिस्तीन और यूक्रेन समेत दुनिया का हर वह देश जहां बेगुनाह इंसानों का ख़ून बह रहा है उसके लिए कहीं सीधे तौर पर तो कहीं हथियारों की सप्लाई करके अमेरिका ही ज़िम्मेदार है। पर अब यह आग धीरे-धीरे अमेरिकी समाज को जला रही है। आए दिन अमेरिका से गोलीबारी की घटनाओं की ख़बरें आने लगी हैं। इन गोलीबारी में मासूमों की जाने जा रही है जो एक दुखद बात है। यूक्रेन से लेकर ताइवान की रक्षा का प्रण करने वाला सुपरपावर अमेरिका आज अपने ही लगाई आग में जल रहा है। हज़ारों परमाणु बमों से धरती को कई बार तबाह करने की क्षमता रखने वाला अमेरिका अपने ही बनाए हथियारों और बमों से धीरे-धीरे तबाह हो रहा है।

टेक्सास में हुई गोलीबारी का आरोपी साल्वाडोर रामोस

पिछले दिनों टेक्सास में हुई गोलीबारी पिछले कई दशक में हुई गोलीबारी की सबसे बड़ी घटना से अमेरिका हिल गया है। ताज़ा घटना में टेक्‍सास प्रांत में एक 18 साल के लड़के साल्वाडोर रामोस ने अपने जन्‍मदिन पर अत्‍याधुनिक राइफल ख़रीदी और सबसे पहले अपनी दादी को भून दिया। इसके बाद हमलावर स्‍कूल पहुंचा और उसने 19 बच्‍चों समेत 21 लोगों को गोलियों से छलनी कर दिया। वहीं मासूमों के परिवारवालों का रो-रोकर बुरा हाल है। अमेरिका अधिकारियों ने बताया कि टेक्सास के प्राथमिक स्कूल में हुई गोलीबारी में जो लोग मारे गए हैं, वे सभी एक ही कक्षा में थे। टेक्सास जनसुरक्षा विभाग के लेफ्टिनेंट क्रिस्टोफर ओलिवर ने सीएनएन को बताया कि सभी पीड़ित यूवालडी स्थित रॉब एलिमेंट्री स्कूल की चौथी कक्षा में मौजूद थे। अधिकारियों ने बताया कि 18 वर्षीय हमलावर साल्वाडोर रामोस भी पुलिस की जवाबी कार्रवाई में मारा गया है। जांच में रामोस का कोई आपराधिक या मानसिक बीमारी का कोई इतिहास नहीं मिला है।

टेक्सास के स्कूल में हुई गोलीबारी के बाद शोक में डूबा अमेरिकी समाज

वहीं हर बार की गोलीबारी की घटना के बाद जिस तरह अमेरिकी राष्ट्रपति सामने आते हैं अफ़सोस ज़ाहिर करते हैं और हथियारों की बिक्री के संबंध में कड़ी क़ानून बनाने की बात करते हैं और फिर समय के साथ उसे भुला देते हैं। इस बार फिर अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने हत्‍याकांड पर दुख जताया और देश में हथियार संबंधी क़ानूनों को सख़्त बनाने के लिए अमेरिकी सांसदों से भावुक अपील की। उन्होंने पूछा कि साथी सांसदों को यह समझाने में कितना समय लगेगा कि 'यह कार्यवाही का समय है।' उधर, टेक्सास के अटॉर्नी जनरल केन पैक्सटन ने उल्‍टा राग अलापा और कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए शिक्षकों के पास हथियार होने चाहिए। इन सबके बीच जिसपर बात नहीं हो रही है वह है कि हथियारों रखने पर ही क्यों न प्रतिबंध लगाया जाए। पर यह सब जानते हैं कि जिस अमेरिका को हथियारों को बेचने और उससे पैसा कमाने की लत लग चुकी है वह उसपर कैसे पाबंदी लगा सकता है। यही कारण है कि आज सोशल मीडिया पर लोग जहां टेक्सास में हुई घटना पर दुख व्यक्त कर रहे हैं वहीं यह भी कह रहे हैं कि अमेरिका ने इतने वार्षों में जो बोया है वही तो काटेगा। (RZ)

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