May २७, २०२२ ०८:२१ Asia/Kolkata
  • आज का दिन वह काला दिन है जब ज्ञान और सत्य की शिक्षा देने वाले महान शिक्षक को शहीद किया गया था, इमाम सादिक़ (अ) की शहादत दिवस पर शोक में डूबी दुनिया

पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के पौत्र इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम की शहादत के दुखद मौक़े पर ईरान समेत संसार के विभिन्न देशों में शोक मनाया जा रहा है।

ईरान, इराक़, भारत और पाकिस्तान समेत और कई अन्य देशों में इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम की शहादत का शोक पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर ईरान के सभी छोटे बड़े शहरों में शोक सभाओं का आयोजन किया जा रहा है जिनमें वक्ता पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के पौत्र इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम के पवित्र जीवन के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाल रहे हैं। शोक सभाओं के आयोजन का क्रम गुरुवार की रात से ही शुरू हो गया था जो इस समय भी जारी है। इस संबंध में मुख्य आयोजन पवित्र नगरों मशहद, क़ुम और शीराज़ में हुए। मशहद में इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम और क़ुम में हज़रत मासूमा (स) तथा शीराज़ में हज़रत शाह चेराग़ (अ) के पवित्र मज़ार श्रद्धालुओं से भरे हुए हैं जो इन हस्तियों को इमाम सादिक़ की शहादत पर श्रद्धांजली पेश कर रहे हैं।

25  शव्वाल 1443 हिजरी बराबर 27  मई 2022  को पैग़म्बरे इस्लाम (स) के उत्तराधिकारी हज़रत अली (अ) के वशंज इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) की शहादत का दिन है। 28  वर्षों तक इमामत की ज़िम्मेदारी संभालने और मुसलमानों का मार्गदर्शन करने के बाद 765 ईसवी में 65 वर्ष की आयु में अब्बासी ख़लीफ़ा मंसूर ने ज़हर द्वारा इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) को शहीद करा दिया था। मुसलमानों के बीच इमाम की लोकप्रियता और उनके हज़ारों शिष्यों के कारण अब्बासी ख़लीफ़ा मंसूर उन्हें अपने अवैध शासन के लिए एक चुनौती समझता था। शहादत के बाद इमाम सादिक़ (अ) को पवित्र मदीना शहर में स्थित जन्नतुल बक़ी क़ब्रिस्तान में दफ़्ना दिया गया। सुन्नी मुसलमानों के चार बड़े इमामों में से तीन इमाम शाफ़ई, मालिक और अबू हनीफ़ा इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) के शिष्य थे और उन्होंने हज़रत से इस्लामी विषयों की शिक्षा प्राप्त की थी।

इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) की 34 वर्ष की इमामत के दौरान, ईश्वरीय शिक्षाओं की प्राप्ति की चाहत रखने वालों के लिए प्रत्यक्ष रूप से ईश्वरीय प्रतिनिधि द्वारा उन्हें प्राप्त करने के लिए स्वर्णिम अवसर था। इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) ने सार्वजनिक रूप से एवं विशेष रूप से लोगों को विभिन्न विषयों का ज्ञान दिया। सार्वजनिक क्लासों में शिया और सुन्नी दोनों भाग लेते थे और हज़रत इमाम सादिक़ (अ) से ज्ञान प्राप्त किया करते थे। ऐसी महान हस्ती जिसके अथक प्रयासों को पैग़म्बरे इस्लाम (स) के बाद इस्लामी इतिहास में महत्वपूर्ण माना जाता है। 148 हिजरी क़मरी में आज के दिन शहीद कर दिए गए थे। उनकी शहादत से न केवल इस्लामी जगत, बल्कि ज्ञान और सत्य की खोज में रहने वालों को बहुत दुख पहुंचा। हम इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) की शहादत की बरसी के दुखद अवसर पर हम अपने सभी पाठकों की सेवा में संवेदना प्रकट करते हैं। (RZ)

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