May २७, २०२२ १४:३३ Asia/Kolkata
  • आख़िर पुतीन ने क्यों किया ईश्वर का शुक्रिया अदा? पुतीन के नए अंदाज़ से यूरोप समेत अमेरिका भी चिंतित

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतीन ने इस बात के लिए शुक्र जताया है कि कुछ विदेशी कंपनियां उनका देश छोड़कर चली गई हैं। यूक्रेन के ख़िलाफ़ रूस द्वारा शुरू किए गए विशेष सैन्य अभियान के बाद से बहुत सी पश्चिमी कंपनियों ने रूस को विदा कह दिया है।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतीन ने कहा कि विदेशी कंपनियों का रूस छोड़ना फ़ायदे की बात है। उन्होंने कहा कि इन कंपनियों के रूस छोड़ने से वह ख़ुश हैं क्योंकि इससे स्थानीय उद्योग उनकी जगह ले सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि रूस अब भी नई तकनीकें और आराम दायक जीवन की चीज़ें हासिल करने के रास्ते खोज लेगा। पुतीन ने कहा कि यूक्रेन में रूस की ‘सैन्य कार्रवाई' एक ऐतिहासिक घटना है जो रूस के इतिहास को नई दिशा में मोड़ने वाला साबित होगा। उन्होंने कहा कि 1991 में सोवियत संघ के टूटने के बाद से अमेरिका ने रूस को शर्मिंदा किया है और यह रूस की अमेरिका के ख़िलाफ़ एक क्रांति है। ग़ौरतलब है कि यूक्रेन के ख़िलाफ़ रूस की सैन्य कार्यवाही के बाद से अमेरिका ने रूस को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की तमाम कोशिशें की हैं। उस पर बेहद कड़े आर्थिक और वित्तीय प्रतिबंध लगाए गए हैं और उसके उत्पादों की अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में बिक्री को मुश्किल बना दिया है। अमेरिका ने रूस का तेल खरीदना भी बंद कर दिया है। हालांकि इस वजह से दुनिया में भी आर्थिक संकट पैदा हो गया है क्योंकि सप्लाई चेन बाधित हुई है। इसके अलावा रूस से आने वाले उत्पाद जैसे कि अनाज, खाने का तेल, खाद और ईंधन की क़ीमतें भी आसमान छू रही हैं।

रूस का सैन्य क़ाफ़िला यूक्रेन में विशेष सैन्य ऑप्रेशन के लिए जाता हुआ

वहीं रूस द्वारा यूक्रेन के ख़िलाफ शुरू किए गए विशेष सैन्य ऑप्रेशन के बाद से ही बड़ी अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों ने रूस छोड़ना शुरू कर दिया था। इनमें बीपी से लेकर मैकडॉनल्ड्स तक हर क्षेत्र की मल्टिनेशनल कंपनियां शामिल हैं। इस वजह से यह दावा किया जा रहा है कि रूस की अर्थव्यवस्था को भारी नुक़सान पहुंचा है। वहां हज़ारों लोगों की नौकरियां चली गई हैं और लोगों के लिए सामान ख़रीदना भी मुश्किल हुआ है। साथ में यह भी दावा किया जा रहा है कि रूस इस समय 1991 में सोवियत संघ के बिखरने के बाद से सबसे ज़्यादा उथल-पुथल से गुज़र रहा है। लेकिन दावों से अलग रूस की स्थिति वैसी नहीं है जैसे दावे किए जा रहे हैं। यही कारण है कि पुतिन ने इसके लिए ईश्वर का धन्यवाद किया है। उन्होंने कहा, "कई बार जब आप देखते हैं कि कौन छोड़कर गया तो कहते हैं कि शायद ईश्वर की कोई मर्ज़ी है। हम उन जगहों को भर देंगे। हमारे उद्योग, हमारे उत्पादक, वेह बड़े होने लगे हैं और वह उन जगहों को सुरक्षित रूप से धारण कर लेंगे, जो हमारे साझेदारों द्वारा तैयार की जा रही है।"

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतीन

पुतीन एक वीडियो लिंक द्वारा सोवियत संघ में शामिल रहे पूर्व सदस्य देशों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मर्सिडीज़ बेंजं जैसी लग्ज़री चीज़ें अब भी रूस में उपलब्ध होंगी, बस थोड़ी ज़्यादा महंगी होंगी। रूसी राष्ट्रपति ने कहा, "यह चीज़ें उन लोगों के लिए थोड़ी ज़्यादा महंगी होंगी। लेकिन यह वह लोग हैं जो मर्सिडीज़ 600एस पहले से ही चलाते रहे हैं और आगे भी चलाते रहेंगे। मैं आपको भरोसा दिला सकता हूं कि वह लोग कहीं ना कहीं से, किसी ना किसी देश से उन्हें ले ही आएंगे।" पुतीन ने कहा कि रूस को जिस चीज़ की अब भी सबसे अधिक ज़रूरत होगी, वह है आधुनिक तकनीकें, जो विकसित अर्थव्यवस्थाओं के पास उपलब्ध हैं। लेकिन उन्होंने इसका रास्ता खोजने की भी बात कही। उन्होंने कहा, "हम अपने आप को इन चीज़ों से अलग नहीं कर लेंगे, वे हमें थोड़ा दबाना चाहते हैं, लेकिन आधुनिक दौर में ऐसा करना पूरी तरह असंभव है।" वहीं पुतीन के नए अंदाज़ से यूरोपीय देशों और विशेषकर अमेरिका की चिंताएं बढ़ गईं है। यूक्रेन युद्ध के आरंभ से जिस तरह एक के बाद दूसरा प्रतिबंध रूस पर लग रहा था उससे ऐसे व्यतीत हो रहा था कि बहुत जल्द रूस बिखर जाएगा और युद्ध बंद करने पर मजबूर हो जाएगा, लेकिन पुतीन का इतमेनान यह दिखा रहा है कि उन्होंने वह तमाम रास्ते खोज लिए हैं जिसको अमेरिका यूरोपीय देशों के साथ मिलकर बंद करना चाह रहा था। (RZ)

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