May २८, २०२२ १६:५० Asia/Kolkata
  • यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमीर ज़ेलेंस्की और रूस के राष्ट्रपति व्लोदिमीर पुतीन
    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमीर ज़ेलेंस्की और रूस के राष्ट्रपति व्लोदिमीर पुतीन

यूक्रेन में रूस द्वारा आरंभ किया गया विशेष सैन्य ऑप्रेशन अपने शतक की ओर बढ़ रहा है। इस बीच यूक्रेनी सेना दोनबास से लौटने की तैयारी कर रही है क्योंकि अगर उसके सैनिक वहां से नहीं लौटते हैं तो उन्हें रूसी सेना का सामना करना पड़ेगा जो उसके लिए संभव नहीं है। इस परिस्थिति के कारण यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमीर ज़ेलेंस्की एक बड़ी दुविधा में फंस गए हैं।

ख़बरों के मुताबिक़ यूक्रेन की सेना के सामने कुआं या खाई में से एक के चुनाव की स्थिति खड़ी होती दिख रही है। दोनबास इलाक़े से मिल रही ख़बरों के अनुसार अब या तो यूक्रेन की सेना को वहां से लौटना होगा या फिर सैनिकों को रूसी फौज के हाथों मरने के लिए ख़ुद को तैयार करना होगा।  बताया जाता है कि इस परिस्थिति के कारण यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमीर ज़ेलेंस्की एक बड़ी दुविधा में फंस गए हैं। उनकी सरकार ने पश्चिमी मीडिया की मदद से जो प्रचार अभियान चला रखा है उससे इस देश में बड़ी संख्या में लोग मानते हैं कि यूक्रेन की सेना युद्ध जीतने की स्थिति में है। पिछले 24 मई को जारी हुए एक जनमत सर्वेक्षण के मुताबिक़ पूर्वी यूक्रेन में 68 फ़ीसदी और दक्षिणी यूक्रेन में 83 फ़ीसदी लोगों ने युद्ध ख़त्म करने के लिए रूस को कोई इलाक़ा देने के ख़िलाफ़ राय दी थी। लेकिन माना जा रहा है कि यह ज़ेलेंस्की के उस प्रचार की वजह से है जिसके ज़रिए वह अपने देश की जनता का यह दिखा रहे हैं कि उन्होंने रूस की सेना को कड़ी टक्कर दे रखी है और उसे पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है। लेकिन वास्तविक में ज़मीनी स्तर पर ऐसा कुछ नहीं नज़र आ रहा है।

यूक्रेन की राजधानी कीएफ़ की सड़कों पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री के साथ यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमीर ज़ेलेंस्की

पिछले दिनों अमेरिका के वरिष्ठ राजनेता और कूटनीति के दिग्गज हेनरी किसिंजर ने सुझाव दिया कि यूक्रेन को दोनबास इलाक़ा रूस को सौंप कर शांति वार्ता में शामिल हो जाना चाहिए। पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री किसिंजर ने चेतावनी दी कि ऐसा ना करने पर यूरोप में बड़े पैमाने पर अस्थिरता पैदा होने का अंदेशा है। किसिंजर के इस बयान पर ज़ेलेंस्की ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि किसिंजर अतीत में जी रहे हैं।  लेकिन रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि किसिंजर की सलाह कठोर तथ्यों पर आधारित है। दोनबास इलाक़े में रूस ने अपनी सैनिक कार्यवाहियां तेज़ कर दी हैं। तेज़ी से रूसी सेना उस क्षेत्र के शहरों और बस्तियों को अपने क़ब्ज़े में लेती जा रही है। दोनबास में लड़ाई तेज़ होने की बात यूक्रेन की उप रक्षा मंत्री हना मलयार ने भी स्वीकार की है।  वेबसाइट एशिया टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ लड़ाई में पलड़ा अब रूस की तरफ़ झुकता जा रहा है। गुरुवार को अमेरिकी थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर ने चेतावनी दी कि सेवेरोदोनेत्स्क के आसपास रूसी सेना तेज़ी से आगे बढ़ रही है। वह सेवेरोदोनेत्स्क-लिसिकांस्क क्षेत्र को घेर में लेने की कोशिश में है। बताया जाता है कि 24 फ़रवरी को युद्ध शुरू होने से पहले सेवेरोदोनेत्स्क शहर की आबादी एक लाख से ऊपर थी। अब वहां सिर्फ 15 हज़ार लोग बचे हैं।

यूक्रेन युद्ध और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतीन अपने सैन्य अधिकारी के साथ

इस बीच ब्रिटेन की ख़ुफ़िया सूचनाओं में भी दोनबास में बन रही स्थित को लेकर चिंता जताई गई है। ब्रिटेन की ख़ुफ़िया रिपोर्टों के बारे में यह हमेशा से मशहूर है कि वह आम तौर पर अपने विरोधियों के बारे में सही रिपोर्ट नहीं देता है और विशेषकर रूसी सफलता को यूक्रेन में आरंभ हुए संकट से लगातार कम करके दिखा रहा है। लेकिन शुक्रवार को इस अपडेट में कहा गया कि रूसी सेना ने पोपास्ना के आसपास कई स्ट्रैटेजिक गांवों को अपने क़ब्ज़े में ले लिया है। एशिया टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रूस ने आरंभ से ही धीरे-धीरे आगे बढ़ने की रणनीति अपनाई। इससे पश्चिमी देशों में ये धारणा बनी कि अपने पुराने पड़ गए हथियारों की वजह से रूसी सेना यूक्रेन में फंस गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक़ शुरुआत में रूसी कमांडरों ने कुछ ग़लतियां भी कीं। लेकिन अब उन्होंने उससे सीख लेकर हमले को अधिक धारदार बना दिया है। इससे दोनबास यूक्रेन के हाथ से निकलने का अंदेशा गहरा गया है, हालांकि ज़ेलेंन्स्की इसे सच को स्वीकार करने को तैयार नहीं दिख रहे हैँ।  (RZ)

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