Jun २६, २०२२ ००:३७ Asia/Kolkata
  • क्या अब अमरीका में मौत के तांडव पर लगेगी रोक, जनता की मांगों के आगे झुका अमरीकी प्रशासन

अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन आख़िरकार पिछले कुछ दशकों के सर्वाधिक महत्वपूर्ण माने जा रहे बंदूक़ हिंसा रोधी विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिए।

इस विधेयक को डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों राजनीतिक दलों का समर्थन मिला। टेक्सास में एक प्राथमिक विद्यालय में एक बंदूकधारी द्वारा 19 छात्रों और दो शिक्षकों की हत्या किए जाने की घटना के बाद देश में हथियार ख़रीदने संबंधी एक कड़े क़नून के लिए सरकार पर दबाव था।

स्कूल की घटना सहित हाल में हुईं गोलीबारी की सिलसिलेवार घटनाओं से पहले इस तरह के किसी विधेयक को अकल्पनीय माना जा रहा था। बाइडन ने विधेयक पर हस्ताक्षर करने के बाद वाइट हाउस में कहा कि इससे लोगों के जीवन की रक्षा होगी। गोलीबारी की घटनाओं में मारे गए लोगों के परिजनों का संदेश था कि हम कुछ करें, आज हमने यह कर दिया।

बृहस्पतिवार को इस विधेयक को अमरीकी संसद के उच्च सदन सीनेट से और शुक्रवार को निचले सदन प्रतिनिधि सभा से मंज़ूरी मिल गई थी जबकि शनिवार को बाइडन के हस्ताक्षर के बाद यह विधेयक एक क़ानून बन गया है।

बाइडन ने यूरोप में दो शिखर सम्मेलनों के लिए वाशिंगटन से रवाना होने से ठीक पहले विधेयक पर हस्ताक्षर किए। 13 अरब डॉलर के इस विधेयक के तहत कम उम्र के बंदूक ख़रीदारों की पृष्ठभूमि की कड़ी जांच की जाएगी और राज्यों को ख़तरनाक समझे जाने वाले लोगों से हथियार वापस लेने का अधिकार दिया जाएगा।

इसके अलावा विद्यालयों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य एवं हिंसा की रोकथाम के स्थानीय कार्यक्रमों को निधि मुहैया कराई जाएगी। अमरीका को हिलाकर रख देने वाली गोलीबारी की घटनाओं के परिप्रेक्ष्य में यह कानून अत्यंत महत्वपूर्ण है।

टेक्सास में हुई घटना से कुछ दिन पहले ‘नस्ली भावना’ रखने वाले 18 वर्षीय एक श्वेत युवक ने अमरीका के बफेलो शहर के एक सुपरमार्केट में अंधाधुंध गोलबारी कर 10 अश्वेत लोगों की हत्या कर दी थी। अमरीका में बंदूक हिंसा के ख़िलाफ उठाया गया सांसदों का पिछले कुछ दशकों में यह सबसे बड़ा कदम है।

रिपब्लिकन पार्टी हथियारों की बिक्री पर रोक लगाने के डेमोक्रेटिक प्रयासों को वर्षों से बाधित कर रही थी लेकिन न्यूयॉर्क और टेक्सास में हुई गोलीबारी की घटनाओं के मद्देनजर डेमोक्रेटिक पार्टी के अलावा कुछ रिपब्लकिन सांसदों ने इस बार फैसला किया कि इस संबंध में संसद की निष्क्रियता अब स्वीकार्य नहीं है। दो सप्ताह तक चली वार्ता के बाद दोनों दलों के सांसदों के एक समूह ने यह विधेयक पेश करने संबंधी समझौता किया, ताकि बंदूक हिंसा को रोका जा सके। (AK)

 

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