Jul ०४, २०२२ १८:१६ Asia/Kolkata
  • तुर्की में मंहगाई ने एक बार फिर तोड़ा रिकॉर्ड

तुर्क सरकार की एजेंसी टर्किश स्टेटस्टिकल इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के मुताबिक़, तुर्की में महंगाई दर जून में बढ़कर 78.62 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह पिछले 24 सालों में सबसे ज़्यादा महंगाई दर है।

एजेंसी के मुताबिक़, मासिक महंगाई में सबसे कम बढ़ोतरी 0.8 प्रतिशत और सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी घरेलू सामानों में 16.51 प्रतिशत हुई है।

दिन ब दिन बढ़ती मंहगाई ने इस देश की जनता की चिंताओं में वृद्धि कर दी है और लोग सत्ताधारी पार्टी जस्टिस एंड डेवलप्मेंट की नीतियों से नाराज़ हैं।

तुर्की में बढ़ती मंहगाई का मुद्दा अब देश की सीमाओं से निकलकर क्षेत्रीय स्तर पर चिंताओं का कारण बन रहा है और क्षेत्रीय मीडिया इसका सही विश्लेषण करने का प्रयास कर रहा है। अल-जज़ीरा टीवी चैनल ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा हैः तुर्की में 73 प्रतिशत की दर से मंहगाई अभूतपूर्व है और इसने आम लोगों को बुरी तरह से प्रभावित किया है।

तुर्की में लोगों का कहना है कि कुछ चीज़ों की क़ीमत तीन गुना हो गई है, वहीं प्रॉपर्टी की क़ीमतों में भी बड़ा उछाल आया है।

इस तरह की परिस्थितियों में तुर्क राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोगान लोगों की बुनियादी समस्याओं को संबोधित करने के बजाए एक दूसरा ही राग अलाप रहे हैं। उन्होंने हाल ही में कहा थाः जम़ीन, समुद्र और हवा में कोई ऐसी शक्ति नहीं है, जिस पर तुर्क सेना अपना वर्चस्व नहीं जमा सके।

स्पष्ट है कि इस तरह के दावों से न ही आर्थिक समस्याओं का समाधान हो सकता है और न ही लोगों की मुश्किलें कम हो सकती हैं। बल्कि एक तरह से यह लोगों के ज़ख़्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। क्योंकि जनता को सरकार से मंहगाई पर निंयत्रण करने और आर्थिक संकट पर क़ाबू पाने की उम्मीद है, लेकिन सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए एक दूसरा ही राग अलाप ही है।

रॉयटर्स के सर्वे के मुताबिक़, पहले से ही तुर्की में जून के महीने में 78 प्रतिशत से अधिक महंगाई जाने के आशंका जताई गई थी।

तुर्की में यह महंगाई दर 1998 के बाद से सबसे ज़्यादा है। तब महंगाई दर 80.4 प्रतिशत तक पहुंच गई थी।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक़, तुर्की उच्चतम महंगाई दर वाले दुनिया के 20 बड़े देशों में शामिल है। तुर्की के बाद अर्जेंटीना 51.27 प्रतिशत महंगाई दर के साथ दूसरे नंबर पर है।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि पिछले एक दशक के दौरान, तुर्क राष्ट्रपति ने केवल आक्रामक नीति अपनाई है, जिसके कारण क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी आर्थिक, राजनीतिक और सामरिक शक्ति कमज़ोर पड़ी है।

 

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