Jul ०४, २०२२ २०:५३ Asia/Kolkata
  • रूस के साथ टकराव, जर्मनी को बहुत मंहगा पड़ा

रूस की एक धमकी ने जर्मनी को किया चारो ख़ानें चित कर दिया है। 

जर्मनी में ऊर्जा का संकट इस समय चरम पर है।  इस ऊर्जा संकट के कारण जर्मनी का औद्धोगिक ढांचा टूटने की कगार पर पहुंच चुका है।  जर्मनी में ऊर्जा संकट और ईंधन के अभाव के कारण बढ़ती मंहगाई को देखते हुए वहां की सरकार, ट्रेड यूनियन से बात करने जा रही है।

जर्मनी की सबसे बड़ी ट्रेड यूनियन पहले ही चेतावनी दे चुकी है कि इस देश का औद्योगिक ढांचा अब पूरी तरह से ढहने की कगार पर है।  जर्मन फेड्रेशन आफ ट्रेड यूनियन डीजीबी की प्रमुख ने एक इन्टरव्यू में कहा है कि गैस सप्लाई में रुकावट के कारण देश के उद्योगों के ढह जाने का ख़तरा बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि अगर एसा होता है तो इसके बहुत बुरे परिणाम जर्मनी की अर्थव्यवस्था पर पड़ेंगे।  उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर हालात क़ाबू में नहीं आते तो इससे जर्मनी में सामजिक अशांति भी फैल सकती है।

उल्लेखनीय है कि यूक्रेन मुद्दे को लेकर पश्चिम की ओर से रूस पर लगने वाले प्रतिबंधों के बाद रूस ने जर्मनी के लिए प्राकृतिक गैस की सप्लाई को 60 प्रतिशत तक कम कर दिया है।  रूस का यह भी कहना है कि जूलाई के अंत तक पाइपलाइन से की जाने वाले गैस की आपूर्ति पूरी तरह से बंद कर दी जाएगी।

रूस की इस चेतावनी के बाद जर्मनी मे अफरातफरी का माहौल बन गया है।  रूसी चेतावनी के बाद जर्मनी में गैस बहुत मंहगी हो गई है।  वैसे जून में ही इस बात के संकेत मिलने लगे थे कि जर्मनी की अर्थव्यवस्था, संकटग्रस्त हो सकती है।

विशेष बात यह है कि यूरोपीय संघ के भीतर जर्मनी ही उसकी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।  अब यह बात मानी जाने लगी है कि रूस के साथ टकराव, जर्मनी को बहुत मंहगा पड़ रहा है।

अबसे कुछ समय पहले जर्मनी के ऊर्जा मंत्री राबर्ट हैबेक ने कहा था कि अगर देश में प्राकृतिक गैस की कमी बनी रहती है तो हम देश के उद्योगों को बंद करने के लिए मजबूर होंगे।  उन्होंने यह भी कहा था कि यह बात, जर्मनी के उद्योग के लिए एक बहुत ही बड़ी त्रासदी सिद्ध होगी।

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