Aug ०६, २०२२ १९:२५ Asia/Kolkata
  • ताइवान के इर्द-गिर्द सैन्य अभ्यास करके चीन क्या दिखाना चाहता है?

चीन के सैन्य अभ्यास में लड़ाकू विमानों से लेकर युद्धपोतों तक का इस्तेमाल किया गया।

चीन ने कहा कि पिछले दो-तीन दिनों में ताइवान के आसपास 100 से अधिक लड़ाकू विमानों और 10 युद्धपोतों ने बड़े पैमाने पर हुए सैन्य अभ्यास में हिस्सा लिया है।

ताइवान के आसपास चीन के अब तक के सबसे बड़े सैन्य अभ्यास के पीछे का असल मकसद यह है कि जब स्व-शासित द्वीप पर कब्जा करने के लिए युद्ध की स्थिति पैदा हो, तो वह इसकी पूरी तरह से घेराबंदी कर सके। विशेषज्ञों ने एएफपी को यह जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि चीन की सेना इस अभ्यास को लेकर काफी उत्साहित है।

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी के ताइवान दौरे से चीन बहुत नाराज़ है और उसी के जवाब में वह ताइवान के चारों ओर ‘अभूतपूर्व पैमाने’ पर सैन्य अभ्यास कर रहा है। पेलोसी पिछले 25 वर्षों में ताइवान की यात्रा करने वाली अमेरिका की सबसे शीर्ष अधिकारी थीं। चीन ताइवान को अपना क्षेत्र बताता है और विदेशी सरकारों के साथ उसके संबंधों व यात्राओं का विरोध करता है।

चीन की सरकारी एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और यहां तक ​​कि युद्धपोतों को जुटाकर अभ्यास का मकसद ताइवान की नाकेबंदी की योजना बनाना और समुद्र में लक्ष्यों पर हमले का अभ्यास करना शामिल है। यह पहली बार है जब चीनी अभ्यास ताइवान के इतने करीब हुए हैं, जिसमें कुछ अभ्यास द्वीप के तट से 20 किलोमीटर से भी कम दूरी पर हो रहे हैं।

ताइवान के पूर्वी हिस्से में बीजिंग का अभ्यास भी अभूतपूर्व है, जो द्वीप के सैन्य बलों को आपूर्ति के लिए रणनीतिक रूप से काफी अहम क्षेत्र है। इतना ही नहीं, यही वह हिस्सा है जहां से युद्ध की स्थिति में अमेरिका संभावित रूप से ताइवान को सैन्य मदद भेज सकता है। चीन ताइवान को अपने क्षेत्र के हिस्से के तौर पर देखता है और यदि जरूरत पड़ी, तो एक दिन इसे बलपूर्वक अपनी मुख्य भूमि में शामिल कर लेगा।

नाकाबंदी योजना को लंबे समय से ताइवान पर प्रयास करने और जीतने के लिए चीन की पसंदीदा रणनीतियों में से एक होने का अनुमान लगाया गया था और इस सप्ताह के अभ्यास से पता चला है कि इस द्वीप पर कैसे काबू पाया सकता है। इस तरह की घेराबंदी का उद्देश्य वाणिज्यिक या सैन्य जहाजों और विमानों के किसी भी प्रवेश या निकास को पूरी तरह से रोकना है लेकिन यह इस क्षेत्र में तैनात अमेरिकी बलों को द्वीप तक पहुंच से भी वंचित करेगा।

एक स्वतंत्र चीनी सैन्य टिप्पणीकार ने कहा कि स्पष्ट रूप से चीनी सेना के पास इस तरह की नाकेबंदी लगाने की सभी क्षमताएं हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा अभ्यास के दौरान हम पहले से ही देख सकते हैं कि ताइवान के लड़ाकू जेट न तो उड़ान भर सकते हैं और न ही उनके जहाज अपने बंदरगाहों को छोड़कर कहीं जा सकते हैं।

बहरहाल जानकार हल्के चीन के भारी सैन्य अभ्यास को ताइवान के लिए एक चेतावनी बेल के रूप में देख रहे हैं और उनका मानना है कि ताइवान के लोगों को अभी से अपने मन यह बात बैठा लेनी चाहिये कि आज नहीं तो कल वहां भी चीनी झंडा लहरायेगा और इस बात की ग़लती न करें कि अमेरिका उन्हें बचा लेगा। क्रीमिया जैसे क्षेत्रों के रूस में विलय को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है। MM

नोटः यह आज़ाद और व्यक्तिगत विचार हैं। पार्सटूडे का इनसे सहमत होना ज़रूरी नहीं है। MM

हमारा व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए क्लिक कीजिए

हमारा टेलीग्राम चैनल ज्वाइन कीजिए

हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!

ट्वीटर पर हमें फ़ालो कीजिए 

फेसबुक पर हमारे पेज को लाइक करें

 

टैग्स