Aug ०८, २०२२ १२:१९ Asia/Kolkata
  • अफ़ग़ानिस्तान के शियों की हिफ़ाज़त में कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए

अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रतिनिधि कार्यालय और वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि देश में शियों की आतंकी हमलों से हिफ़ाज़त ज़रूरी है।

सुयक्त राष्ट्र संघ के कार्यालय ने पश्चिमी काबुल में हुसैनी अज़ादारों पर होने वाले आतंकी हमले पर प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि इन हमलों को फ़ौरन रोका जाना चाहिए।

अफ़ग़ानिस्तान में मानवाधिकार के मामलों में संयुक्त राष्ट्र संघ के विशेष रिपोर्टर रिचर्ड बेनेत ने पश्चिमी काबुल के पुले सूख़्ते इलाक़े में होने वाले बम धमाके पर प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि पश्चिमी काबुल में हज़ारा बिरादरी के भीड़भाड़ वाले बाज़ार में आतंकी हमला शियों के ख़िलाफ़ दाइश के हमलों की एक कड़ी है। इन हमलों के ज़िम्मेदारों को सज़ा दी जाने चाहिए।

दूसरी ओर विदेशों में रहने वाले कई अफ़ग़ान राजनेताओं ने एक बयान जारी करके इस आतंकी हमले की  निंदा की।

अफ़ग़ानिस्तान के मामलों में संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रतिनिधि कार्यालय का कहना था कि शियों पर होने वाले हमले इस बिरादरी के बारे में तालेबान सरकार की लापरवाही की गंभीर निशानी है।

अफ़ग़ानिस्तान में शिया बिरादारी पर बार बार हमले हो रहे हैं जबकि मुहर्रम और सफ़र में जब शिया समुदाय के लिए अज़ादारी करते हैं, तो यह हमले और भी तेज़ हो गए हैं।

यह तालेबान सरकार को भी अच्छी तरह मालूम है। यानी वह पहले से सुरक्षा के इंतेज़ामात कर सकती थी। तालेबान सरकार यह लापरवाही तब बरत रही है जब उसने अगस्त 2021 में सत्ता अपने हाथ में लेते समय कहा था कि अफ़ग़ानिस्तान में सभी अल्पसंख्यकों की हिफ़ाज़त की जाएगी।

एक साल में अफ़ग़ानिस्तान के शियों पर बार बार हमले हुए हैं मगर तालेबान सरकार सुरक्षा के मामले में बार बार नाकाम होती  रही है।

कहा जाने लगा था कि धीरे धीरे दाइश के हमलों में कमी आएगी मगर देखने में आता है कि दाइश के अमानवीय हमलों में कमी आने के बजाए वृद्धि हो गई है।

ध्यान योग्य बिंदु यह है कि सुरक्षा समस्याएं और चुनौतियां खड़ी करने के पीछे दाइश का मक़सद शिया समुदाय को भयभीत करना है। इसके लिए दाइश की तरफ़ से शिया मुसलमानों की नमाज़े जुमा और अन्य समारोहों पर हमले हुए हैं।

तालेबान सरकार ने कहा था कि मुहर्रम और सफ़र में अज़ादारी के कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से होंगे और सुरक्षा के पूरे इंतेज़ामात किए जाएंगे लेकिन हालिया दिनों शियो पर होने वाले आतंकी हमलों से साबित हो गया कि तालेबान सरकार अपने वादे पूरे करने की या तो  इच्छा नहीं रखती या फिर यह उसके बस की बात  नहीं है।

यहीं से यह भी साबित होता है कि जब तक तालेबान सही अर्थों में व्यापक प्रतिनिधित्व वाली सरकार का गठन नहीं करेंगे जिसमें सभी समुदायों और जातियों को प्रतिनिधित्व मिले उस समय तक वे सुरक्षा जैसे चुनौतीपूर्ण लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाएंगे। इस विषय में तालेबान का अड़ियल रवैया देश को नुक़सान पहुंचा रहा है।

 

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