Sep २८, २०२२ १९:३० Asia/Kolkata
  • भारत-अमेरिका के विदेश मंत्रियों की हुई मुलाक़ात, तेल समेत कई मुद्दों पर हुई चर्चा

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के बीच एक अहम मुलाक़ात हुई है। इस भेंटवार्ता में भारतीय विदेश मंत्री ने अमेरिकी विदेश मेंत्री के साथ कई मुद्दों पर चर्चा की है।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के समक्ष भारत से अमेरिकी वीज़ा आवेदनों के काफ़ी संख्या में लंबित होने का मुद्दा उठाया है। इस पर शीर्ष अमेरिकी राजनयिक ने कहा कि वह इस मामले के प्रति संवेदनशील हैं और इसे सुलझाने के लिए उनके पास योजना है। ब्लिंकन ने भारतीय नागरिकों के वीज़ा आवेदनों के लंबित होने के लिए कोविड-19 महामारी को ज़िम्मेदार ठहराया। अमेरिका द्वारा मार्च 2020 में महामारी के कारण दुनिया भर में लगभग सभी वीज़ा आवेदनों पर आगे बढ़ने की प्रक्रिया को रोकने के बाद अमेरिकी वीज़ा सेवाएं अब लंबित आवेदनों के निस्तारण की कोशिश कर रही हैं। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच करीब एक घंटे तक मुलाक़ात चली। इस भेंटवार्ता के बाद विदेश मंत्रालय के ‘फॉगी बॉटम' मुख्यालय में ब्लिंकन के साथ मीडिया से बातचीत के दौरान जयशंकर ने कहा, “प्रतिभा के विकास और आवाजाही को सुगम बनाना भी हमारे पारस्परिक हित में है। हम इस बात पर सहमत हुए कि इस पर आने वाली बाधाओं को दूर किया जाना चाहिए।”

इस बीच भारत ने जी-7 (सात औद्योगिक देशों का समूह) द्वारा प्रस्तावित रूसी तेल पर मूल्य सीमा के बारे में भी अपनी चिंता जताई। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के साथ बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, "हमारी प्रति व्यक्ति 2,000 डॉलर की अर्थव्यवस्था है। हम तेल की क़ीमत को लेकर चिंतित हैं। तेल की क़ीमत हमारी कमर तोड़ रही है। यह हमारी बड़ी चिंता का विषय है।" बैठक के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए जयशंकर ने कहा कि दोनों पक्षों ने मूल्य सीमा पर "संक्षिप्त चर्चा" की, जिस पर विकासशील देशों की गहरी चिंता है। ग़ौरतलब है कि यूरोपीय संघ के देश विवादास्पद मुद्दे को लेकर एक समझौते पर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, जिस पर उन्हें कई सदस्य देशों के प्रतिरोध का सामना भी करना पड़ रहा है। बाइडन प्रशासन जी-7 देशों द्वारा कैप को लागू करने पर ज़ोर देने का विरोध करने की कोशिश कर रहा है। वैश्विक बाज़ार में रूस के तेल की उपलब्धता रखते हुए, उसके ख़िलाफ़ प्रतिबंधों के हिस्से के रूप में तेल की बिक्री पर रूस के राजस्व को सीमित करने का विचार है। (RZ)

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