Oct ०१, २०२२ १२:५१ Asia/Kolkata
  • सुरक्षा परिषद में रूस का वीटो, भारत ने फिर दिया पश्चिमी देशों को ख़ास संदेश

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका और अल्बानिया की ओर पेश किए गए मसौदा प्रस्ताव पर जहां रूस ने वीटो कर दिया है वहीं भारत इस मतदान से दूर रहा। इस प्रस्ताव में रूस द्वारा कराए गए जनमत संग्रह और यूक्रेनी क्षेत्रों पर उसके नियंत्रण की निंदा की गई थी।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, सुरक्षा परिषद में एक बार फिर भारत कहीं न कहीं रूस के साथ खड़ा दिखाई दिया। इस बार अमेरिका और अल्बानिया ने सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव पेश करके यह मांग की थी कि रूस यूक्रेन से अपने सैन्य बलों को तत्काल वापस बुलाए। 15 देशों की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अमेरिका और अल्बानिया द्वारा पेश किए गए उस प्रस्ताव पर मतदान किया, जिसमें रूस के द्वारा यूक्रेन के चार क्षेत्रों में कराए गए "जनमत संग्रह" को अवैध क़रार दिए जाने और डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और ज़ापोरिज्जिया के विलय की निंदा की गई थी। इस प्रस्ताव के खिलाफ रूस द्वारा वीटो किए जाने के कारण यह प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हो सका। 15 देशों की परिषद में से, 10 देशों ने प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया और चार देशों ने इस मतदान में भाग नहीं लिया। मतदान में भाग न लेने वालों में भारत भी एक देश रहा। रूस ने घोषणा की है कि यूक्रेन के डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और ज़ापोरिज्जिया के यूक्रेनी क्षेत्रों का जनमत संग्रह के बाद रूस में विलय किया गया है।

यूक्रेन के चारों क्षेत्रों के विलय को लेकर हुए जनमंत संग्रह के नतीजों के आने के बाद

वहीं संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने गुरुवार को कहा कि धमकी या बल प्रयोग से किसी अन्य राज्य द्वारा किसी राज्य के क्षेत्र पर क़ब्ज़ा करना संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतर्राष्ट्रीय क़ानून के सिद्धांतों का उल्लंघन है। गुटेरेस ने कहा, "यूक्रेन के डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और ज़ापोरिज्जिया क्षेत्रों के अधिग्रहण के साथ आगे बढ़ने के किसी भी निर्णय का कोई क़ानूनी मूल्य नहीं होगा और इसकी निंदा की जानी चाहिए। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा, "ऐसा करना अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनी ढांचे के साथ मेल नहीं खा सकता है। उन्होंने कहा कि यह अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के ख़िलाफ़ उठाया गया क़दम है। गुटेरेस ने यह भी कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों, सिद्धांतों के उल्लंघन के साथ-साथ एक ख़तरनाक पारंपरा की शुरूआत है और आगे इसमें वृद्धि ही होगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक दुनिया में इस तरह के कामों का कोई स्थान नहीं है, इसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। (RZ)

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