Sep १७, २०१९ १८:५७ Asia/Kolkata
  • क्या कोई जानता है कि ईरान के बारे मे ट्रम्प का क्या है प्लान?  क्योंकि ट्रम्प, ईरान के बारे में अपनी नीति को बार-बार भूले जा रहे हैं!

अमेरिका के एक प्रसिद्ध मीडिया ने ट्रम्प द्वारा ईरान को लेकर बार-बार बनाई जा रही नई-नई नीति और हर दिन बदले जा रहे बयानों को लेकर डोनल्ड ट्रम्प की कड़ी आलोचना की है। अमेरिकी मीडिया ने कहा है कि ट्रम्प ईरान को लेकर संशय का शिकार हैं।

समाचार एजेंसी मेहर ने सीएनएन के हवाले से पीटर बर्गन द्वारा लिखे गए लेख का उल्लेख करते हुए लिखा है कि, ईरान के बारे ट्रम्प के उद्देश्यों को लेकर अगर ईरानी अधिकारियों को संशय है तो यह स्वाभाविक है। ट्रप्म की डमाडोल नीति, कभी वह युद्ध, हमले और धमकाने की बात करते हैं तो कभी वह साज़िश, समझौते और वर्ता की बात करते हैं। हो सकता है कि उनके इस तरीक़े से उन्हें मैनहट्टन की संपत्ति के लेनदेन में लाभ हो, लेकिन जब मध्यपूर्व के सबसे शक्तिशाली ईरान जैसे देश से सामना हो तो उनका यह तरीक़ा काफ़ी भ्रामक और ख़तरनाक भी साबित हो सकता है। वैसे ट्रम्प के डमाडोल रवैये से न केवल ईरानी अधिकारी संशय की स्थति में हैं बल्कि स्वयं ट्रम्प के सहकर्मी भी उनके हर दिन बदलते रुख से परेशान और भ्रमित हैं।

अमेरिकी के वित्त और विदेश मंत्रियों ने पिछले सप्ताह इस बात पर बल दिया था कि ट्रम्प बिना किसी शर्त के राष्ट्रपति रूहानी से मिलने के लिए तैयार हैं। यहां तक की स्वयं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने भी जून महीने में यह एलान किया था कि, वह बिना शर्त के ईरान के राष्ट्रपति रूहानी से मुलाक़ात करने के लिए तैयार हैं। हलांकि अब ऐसा लग रहा है कि ट्रम्प इस मामले में भूलने की बीमारी से पीड़ित हो गए हैं और अब वह अपने ईरानी समकक्ष से मुलाक़ात की ख़बरों को फ़र्ज़ी बता रहे हैं। यह पहली बार नहीं है कि जब ट्रम्प, ईरान के संबंध में अपने ही द्वारा कही हुई बात को भूल गए हैं और पहले वाले बयान से बिल्कुल उलटा बयान दिया है। इससे पहले जब ईरान ने अमेरिका के आरक्यू-4 ग्लोबल हॉक ड्रोन को मार गिराया था उस समय ट्रम्प ने ट्वीट किया था कि, “ईरान ने बहुत बड़ी ग़लती की है।”  ट्रम्प ने इसके बाद ईरान के मिसाइल प्रतिष्ठानों पर सैन्य हमले का आदेश भी जारी कर दिया था, लेकिन अंतिम क्षण में अपने आदेश को वापस ले लिया था। इस बीच हालिया दिनों में एक बार फिर ट्रम्प ने ईरान के साथ वार्ता और शांति की बात की और साथ ही उन्होंने कट्टर ईरान विरोधी अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन को हटा भी दिया।

देखा जाए तो इस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की विदेश नीति पूरी तरह आशंकाओं से भरी हुई और डमाडोल है। उत्तरी कोरिया के साथ ज़ोर-शोर से आरंभ हुई वार्ता अब ठंडे बस्ते में पहुंच गई है। ट्रम्प ने तालेबान से जारी वार्ता को इसी महीने अचानक रोक दिया। इसी तरह चीन के साथ अमेरिका की व्यापारिक वार्ता को भी ट्रम्प ने टाल दिया है वहीं यह भी माना जा रहा है कि इस्राईल और फ़िलिस्तीन के बीच संभावित शांति समझौता भी खटाई में पड़ जाए। ईरान के ख़िलाफ़ अधिकतम दबाव की नीति ने सऊदी अरब की ऑयल फ़ील्ड्स पर हालिया ड्रोन में महत्वपूर्ण भुमिका निभाई है और व्यापक युद्ध की संभावनाओं को बढ़ा दिया है और यह है ट्रम्प के समझौते का नमूना।

ट्रम्प और ईरान के बीच किस तरह की घटनाएं घटित होंगी? बातचीत से तो ऐसा लगता है कि युद्ध की संभावना सबसे अधिक है और यही ट्रम्प की आदत और उनका असली स्वभाव है। उन्होंने वर्ष 2017 में बेमन से अधिक अमेरिकी सैनिकों को अफ़ग़ानिस्तान भेजने की घोषणा की थी और फिर अचानक अफ़ग़ानिस्तान से सैनिकों की वापसी और तालेबान से वार्ता का मन बना लिया। इसी तरह वर्ष 2018 के अंत में उन्होंने सीरिया से अमेरिकी सैनिकों की वापसी का एलान किया था और इसी कारण तात्कालीन अपने रक्षा मंत्री को भी हटा दिया था। ट्रम्प ने पहले उत्तरी कोरिया को युद्ध की धमकी दी और फिर उत्तरी कोरिया के नेता को प्यार के संदेश भेजने लगे। डोनल्ड ट्रम्प को पहली बार इस समय वास्तविक विदेश नीति का सामना है और उनके पास सभी सैन्य और कूटनीतिक समन्वय के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के नाम पर केवल एक ही व्यक्ति है।

कुल मिलाकर अगर देखा जाए तो ट्रम्प की डमाडोल नीतियों और शंकाओं से भरी बातों के कारण ऐसी स्थिति बनती जा रही है कि जिससे विश्व राजनीति में नया समीकरण दिखाई दे रहा है, वह यह है कि अमेरिका दुनिया के मामलों से ख़ुद को अलग करता जा रहा है। डोनल्ड ट्रम्प मूलतः व्यवसायी हैं। यानी वह नफ़ा-नुक़सान की गणना में माहिर हैं। उन्हें किसी की परवाह नहीं  और वह जो करना चाहेंगे, करेंगे। साथ ही यह भी कि फिलहाल उनकी आंख एकमात्र 'अमेरिकी हित' पर टिकी हुई है और उन्हें दुनिया के हितों की कोई चिंता नहीं है। स्वयं ट्रम्प ने यह भी संदेश दिया है कि वह एक अपरंपरागत तरह के राजनेता हैं, इसलिए वह कब क्या कह देंगे, कर देंगे, अनुमान लगाना राजनीतिक विशेषज्ञों के बस की बात नहीं है। इसलिए दुनिया अभी यही मान रही है कि इस समय जो स्थिति है उसको देखते हुए यह कहा जा सकता है कि कुछ भी हो सकता है। लेकिन जानकारों का मानना है कि ट्रम्प ईरान को लेकर बहुत सतर्क हैं और वह कोई भी ऐसा क़दम नहीं उठाएंगे जिससे उन्हीं को नुक़सान हो इसलिए वे केवल अरब देशों से अमेरिका के 2020 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले मोटी रकम ऐंठना चाहते हैं। (RZ)

 

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