Oct २३, २०१९ १३:३३ Asia/Kolkata
  • अमरीकी सांसदों ने भारत में अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हिंसा और भेदभाव पर चिंता जताई

अमरीका ने कहा है कि भारत में अल्पसंख्यकों को क़ानूनी संरक्षण हासिल होने के बावजूद उनके ख़िलाफ़ हिंसा और भेदभाव की घटनाएं हो रही हैं।

दक्षिण और मध्य एशिया के मामलों के लिए अमरीका के विदेश मंत्रालय की उप सचिव एलिस जी. वेल्स ने एशिया, प्रशांत और परमाणु अप्रसार पर सदन की विदेश मामलों की समिति की उपसमिति में कहा है कि भारत में अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हिंसा व भेदभाव और गोरक्षकों द्वारा दलितों और मुस्लिमों पर हमले जैसी घटनाएं अल्पसंख्यकों को हासिल क़ानूनी संरक्षण के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान के तहत इस धर्मनिरपेक्ष देश को सभी नागरिकों के अधिकार सुरक्षित रखना चाहिए ताकि वे अपने धर्म का आज़ादी के साथ पालन कर सकें। उन्होंने कहा कि अमरीका ने भारत की सरकार से कहा है कि वह धार्मिक स्वतंत्रता के सार्वभौमिक अधिकार को पूरी तरह क़ायम रखे और अति संवेदनशील लोगों की रक्षा करे जिनमें असम के वे 19 लाख लोग भी शामिल हैं जिनकी नागरिकता को लेकर सवाल उठने की वजह से उन्हें राज्य से हटाए जाने का खतरा मंडरा रहा है। अमरीका ने भारत से मांग की है कि वह हिंसा की सभी घटनाओं की निंदा करे और उन्हें अंजाम देने वालों को उत्तरदायी ठहराए।

 

अमरीका के विदेश मंत्रालय की उप सचिव एलिस जी. वेल्स ने इसी तरह पाकिस्तान में नागरिक समाज और मीडिया स्वतंत्रता के सीमित किए जा रहे दायरे को चिंताजनक बताते हुए कहा है कि अमरीका को पाकिस्तान में मानवाधिकार के हनन और लोगों के साथ धर्म के आधार पर हो रहे भेदभाव पर गहरी चिंता है। अमरीका ने पाकिस्तान सरकार से विधि का शासन और देश के संविधान में निहित स्वतंत्रता को बरक़रार रखने की मांग की है। एलिस जे. वेल्स ने कहा है कि हालिया वर्षों में पाकिस्तान में कुछ चिंताजनक चलन देखने में आए हैं जिनमें नागरिक समाज और मीडिया स्वतंत्रता का सीमित किया जा रहा दायरा भी शामिल है। (HN)

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