Nov ०२, २०१९ २०:१४ Asia/Kolkata
  • नया सवेराः अमरीकी युवा Henry Shulen Junior हेनरी शूलेन जूनियर का कहना है कि मैंने तीन से चार महीनों तक क़ुरआन और इंजील का तुलनात्मक अध्ययन किया+वीडियो

हेनरी का कहना है कि यह बात मेरी समझ में नहीं आती कि ईसा मसीह ने सूली पर क्यों कहा कहा था कि हे ईश्वर! तूने मुझको क्यों छोड़ दिया? हेनरी कहते हैं कि मैं इस बात को तो मानता था कि ईसा मसीह का जन्म बिना पिता के हुआ है किंतु यह बात मेरी समझ में नहीं आती थी कि जब हम इसाइयों की नज़र में ईसा मसीह, ईश्वर की सबसे अच्छी सृष्टि थे तो फिर ईश्वर ने उनको हमारे गुनाहों की माफ़ी के लिए क्यों मार डाला?

हताशा से भरे वातावरण में चमकने वाला प्रकाश, सच्चाई की तलाश में भटकने वालों को अपनी ओर आकृष्ट कर रहा है।  चमकने वाला यह प्रकाश कुछ और नहीं बल्कि इस्लाम है।  वर्तमान समय में संसार में प्रतिदिन मुसलमान होने वालों की संख्या में वृद्धि हो रही है।  

हेनरी शूलेन जूनियर

हेनरी शूलेन जूनियर एक अमरीकी हैं।  वह न्यूयार्क के रहने वाले हैं।  वह बहुत ही सक्रिय, भावुक और सच्चे इंसान हैं।  मुसलमान हो जाने के बाद हेनरी का यह प्रयास है कि वह दूसरों का मार्दर्शन करते हुए उनको भी सच्चाई बताने का प्रयास करें।  हेनरी द्वारा इस्लाम स्वीकार करने की घटना वास्तव में सुनने वाली है।

एक अमरीकी युवा Henry Shulen Junior हेनरी शूलेन जूनियर का कहना है कि मैं पाबंदी से चर्च या गिरजाघर जाया करता था।  मैंने तीन से चार महीनों तक क़ुरआन और इंजील का तुलनात्मक अध्ययन किया।  इस्लाम एकेशेवरवाद की बात कहता है जिसका अर्थ होता है कि ईश्वर एक है।  क़ुरआन के हिसाब से हज़रत ईसा, ईश्वर के दूत हैं।  इस्लामी शिक्षाओं में बताया गया है कि हज़रत ईसा लोगों के पापों के प्रायश्चित के लिए नहीं मारे गए।  जब मुझको यह पता चला तो इस बात का आभास हुआ कि मेरा भी तो यही मानना है और मैं इसी पर विश्वास रखता हूं।

बहुत से वे ईसाई जो मुसलमान होते हैं उनके मुसलमान होने का एक कारण इसाई धर्म में पाए जाने वाले कुछ विरोधाभास हैं।  हेनरी जूनियर के दिमाग़ को किशोर अवस्था से ही यह विरोधाभास परेशान किये हुए था।  हेनरी का कहना है कि यह बात मेरी समझ में नहीं आती कि ईसा मसीह ने सूली पर क्यों कहा कहा था कि हे ईश्वर! तूने मुझको क्यों छोड़ दिया? हेनरी कहते हैं कि मैं इस बात को तो मानता था कि ईसा मसीह का जन्म बिना पिता के हुआ है किंतु यह बात मेरी समझ में नहीं आती थी कि जब हम इसाइयों की नज़र में ईसा मसीह, ईश्वर की सबसे अच्छी सृष्टि थे तो फिर ईश्वर ने उनको हमारे गुनाहों की माफ़ी के लिए क्यों मार डाला? मैं ईश्वर से क्यों यह नहीं कह सकता कि मुझको इस बात पर अफ़सोस है?  यह सारी बातें मेरी समझ से पूरी तरह से बाहर थीं।

हेनरी जूनियर का कहना था कि यह कैसे संभव है कि ईसा मसीह, ईश्वर भी और ईश्वर की संतान भी? यह विरोधाभास मेरी समझ से परे है।  अगर ईसा मसीह, ईश्वर हैं तो फिर यह कैसे संभव है कि ईश्वर, 9 महीनों तक मां के पेट में रहे और जन्म के बाद वह मां के दूध पर निर्भर रहे।  फिर इस नशवर संसार में 30 वर्षों तक ज़िंदगी गुज़ारने के बाद नरक में चला जाए।  इसाईयों का मानना है कि ईसा को सूली दे दी गई और वे तीन दिनों के लिए नरक चले गए ताकि पूरी मानव जाति के पापों का प्रायश्चित हो जाए।  इसके बाद वे जीवित हो गए।  हेनरी जूनियर ने एक इसाई पादरी से पूछा था कि अगर ईसा मसीह ही ईश्वर या ख़ुदा हैं तो फिर यह बताइए कि जब वे तीन दिनों के लिए मर गए थे तो इस दौरान, संसार का संचालन कौन कर रहा था? हेनरी का कहना है कि पादरी ने मेरे इस सवाल का जवाब संतुष्ट करने वाला नहीं दिया।

इसाई धर्म की शिक्षाओं में पाए जाने वाले विरोधाभास और उससे संबन्धित प्रश्नों के संतोश जनक उत्तर न मिल पाने के कारण हेनरी जूनियर ने 17 वर्ष की आयु से चर्च जाना छोड़ दिया।  हेनरी सत्रह वर्षों के बाद से चर्च नहीं जा रहा था किंतु ईश्वर पर उनकी आस्था बाक़ी थी और वह अधर्मी नहीं हुए थे।  इस घटना के तीन वर्षों के बाद जब हेनरी की आर्थिक स्थिति बहुत ख़राब हो चुकी थी उस समय उनके साथ एक घटना घटी जिसने उनके जीवन को परिवर्तित कर दिया।  इस घटना के बारे में हेनरी जूनियर का कहना था कि बीस साल में मेरी स्थिति इतनी ख़राब हो गई कि मेरे पास घर नहीं रहा।  अब जब मैं बेघर हो गया तो एक बार रात के वक़्त मैं रोटी ख़रीदने के लिए जा रहा था।  रास्ते में मैं पालनहार से यह दुआ करता हुआ जा रहा था कि अगर तू मुझको इस हालत से बाहर निकाल दे तो जिस तरह से तू चाहेगा मैं उसी तरह से तेरी उपासना करूंगा।  हेनरी का कहना था कि मैं नहीं जानता कि यह दुआ थी या कुछ और किंतु मैंने रास्ते में जो कुछ कहा वह यही था।  अगले दिन मैं अपने पुराने मुहल्ले से एक दूसरे मुहल्ले में जा रहा था।  वहां पर एक यूनिवर्सिटी थी।  उस समय मैं इंटर मीडिएट की पढ़ाई छोड़ चुका था।  मैंने मन ही मन सोचा कि क्यों न मैं इस यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेकर अपनी पढ़ाई जारी रखूं?  इसी विचार के साथ मैंने यूनिवर्सिटी में प्रवेश की परीक्षा में भाग लेने का निर्णय किया और उसमें सफल भी रहा।  कुछ दिनों के बाद एक सुपर मार्केट में मुझको नौकरी मिल गई।  हेनरी का कहना है कि मेरा एक दोस्त था जो बेरोज़गार था।  वह भी काम की तलाश में भटक रहा था।  उसके माता और पिता ने मुझसे कहा था कि अगर हो सके तो हमारे बेटे के लिए कोई काम ढूंढ दो।  हेनरी ने कहा कि मैंने अपने मित्र के माता-पिता से कहा कि क्या आप मेरे रहने का कोई इन्तेज़ाम कर सकते हैं? इसपर उन्होंने कहा कि हम तुम्हारे लिए एक कमरे का प्रबंध कर सकते हैं जिसमें तुम रह सको।  अमरीकी युवा हेनरी शूलेन जूनियर का कहना था कि लगभग 72 घण्टों के भीतर मेरे दोस्त के लिए काम और मेरे रहने के लिए जगह का प्रबंध हो गया।  इस प्रकार से मैने यूनिवर्सिटी जाना आरंभ कर दिया।

 

आगे के बारे में हेनरी का कहना था कि जब मैंने यूनिवर्सिटी में जाना आरंभ किया तो वहां पर मेरे कई मित्र बन गए जिसमें कुछ विदेशी भी थे।  हेनरी ने बताया कि वहां पर बांग्लादेश के भी कुछ छात्रों से मेरी दोस्ती हो गई।  मैंने उनसे इस्लाम के बारे में बातचीत की।  वे कहते हैं कि अपने बांग्लादेशी मित्रों से मैं अक्सर इस्लाम के बारे में बात किया करता था।  हेनरी कहते हैं कि जब मैंने उनसे कहा कि तुम अपने धर्म के हिसाब से मुझको ईसा मसीह के बारे में बताओ तो उनका कहना था कि हमारा यह मानना है कि ईसा मसीह, बिना पिता के पैदा हुए थे और उनकी माता हज़रत मरयम थीं।  मेरे मुसलमान दोस्तों ने बताया कि हम इस बात को नहीं मानते कि ईसा मसीह, हमारे गुनाहों की वजह से मारे गए अर्थात मनुष्यों के पापों के प्रायश्चित के लिए ईसा मसीह को मार दिया गया।  बाद में उन्होंने मुझको पढ़ने के लिए क़ुरआन दिया।

हेनरी का कहना है कि मैंने कई महीनों तक इंजील और क़ुरआन का तुल्नात्मक अध्ययन किया।  क़ुरआन पढ़कर मुझको पता चला कि इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार ईश्वर एक है और ईसा मसीह, ईश्वर के दूत हैं।  उनको लोगों के पापों के प्रायश्चित के लिए नहीं मारा गया।  हेनरी कहते हैं कि मैंने महसूस किया कि यह वे बातें हैं जिनको मैं मानता हूं।  मुझको लगा कि अब शायद मुझको मेरे पश्नों के उत्तर मिल जाएंगे।  इसके बाद से हेनरी ने क़ुरआन पढ़ना आरंभ कर दिया।  यह वास्तविकता है कि पवित्र क़ुरआन एक चमत्कार है जो वास्वतिकता के खोजियों का उचित मार्गदर्शन करता है।  Henry Shulen Junior हेनरी शूलेन जूनियर के साथ भी कुछ एसा ही हुआ और वह वास्तविकता से अवगत होकर मुसलमान हो गए।

वास्तविकता के खोजी हेनरी के लिए केवल मुसलमान होना पर्याप्त नहीं था।  हेनरी ने जब इस्लामी किताबों का अधिक अध्ययन किया तो उन्होंने लोगों से पैग़म्बरे इस्लाम और उनके पवित्र परिजनों के बारे में जानकारी हासिल करनी चाही।  इस बारे में उनको कोई ढंग का जवाब नहीं मिलता था।  अब वह पैग़म्बरे इस्लाम और उनके पवित्र परिजनों के बारे में अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त करने के इच्छुक थे।  इसी दौरान हेनरी के सामने एक घटना घटी जिसके बाद उसको शिया मुसलमानों के बारे में जानने की उत्सुक्ता बढ़ती गई।  हुआ यह कि एक स्थान पर उन्होंने देखा कि एक मुसलमान धर्मगुरू अपने एक मानने वाले को डांटते हुए कह रहे थे कि तुमने क्यों एक शिया मुसलमान के साथ दोस्ती की? तुम उस शिया के साथ एक कमरे में क्यों रहते हो?  उस धर्मगुरू का कहना था कि शिया काफ़िर हैं और वे अली को पूजते हैं।

 

हेनरी का कहना है कि जब मैं इस घटना को देख रहा था तो मेरे मन में विचार आया कि पहले यह देखूं कि शिया कौन होते हैं और उनके विचार क्या हैं।  उनका कहना था कि इसी बात की खोज के लिए मैं एक इस्लामी केन्द्र गया जो मस्जिदे अहले बैत में था।  इस केन्द्र का काम लोगों का इस्लामी मार्गदर्शन करना था।  हेनरी कहते हैं कि मैं दो सप्ताहों तक लगातार शिया मुसलमानों के इस्लामी केन्द्र में गया जहां पर मैंने कई प्रकार के प्रश्न पूछे।  उनका कहना है कि इस केन्द्र के ज़िम्मेदार ने अपनी बातों के बहुत ही संतोषजनक उत्तर दिये।  बाद में उन्होंने मुझको पढ़ने के लिए एक पुस्तक दी जिसका नाम था, "देन आई वाज़ गाइडेड"।   मैंने इस पूरी पुस्तक का अध्ययन किया।  इस किताब के लेखक डाक्टर "मुहम्मद तीजानी" ने अपनी बातों को समझाने के लिए विशेष प्रकार की शैली अपनाई थी। उन्होंने क़ुरआन की आयतों के साथ पैग़म्बरे इस्लाम के केवल उन्ही कथनों का उल्लेख किया था जिसे शिया और सुन्नी मुसलमान दोनो ही मानते हैं।  हेनरी का कहना था कि इस किताब को पढ़ने के बाद मुझको वास्तविकता का पता चल गया और मैं शिया मुसलमान बन गया।

हेनरी शूलेन जूनियर के मुसलमान होने का प्रभाव उनकी पत्नी पर भी पड़ा।  इसके बावजूद उन्होंने अपनी पत्नी पर मुसलमान होने के लिए कोई दबाव नहीं डाला।  उनका कहना था कि जब भी मेरी पत्नी इस्लाम के बारे कुछ पूछती तो मैं उससे कहता था कि वे स्वयं इस्लामी किताबों का अध्ययन करें।  इसका परिणाम यह निकला कि काफ़ी अध्ययन करने के बाद हेनरी जूनियर की पत्नी भी शिया मुसलमान हो गईं।  हेनरी जूनियर के मुसलमान होने की कहानी भी बहुत रोचक है।  इस बारे में हेनरी कहते हैं कि एक दिन मैं अपने घर के किचन में था।  मेरी बीवी हाल ही में मुसलमान हुई थी।  रसोई में मेरी पत्नी ने मुझसे पूछा कि पैग़म्बरे इस्लाम के परिजनों का क्या हुआ? इसका कारण यह था कि मेरी बीवी को यह बताया गया था कि पैग़म्बरे इस्लाम के स्वर्गवास के बाद मानो इस्लामी इतिहास ही समाप्त हो गया।  इस सवाल के जवाब में मैंने अपनी पत्नी से फिर कहा कि अब तुम जाकर शिया मुसलमानों के इतिहास के बारे में पढ़ो।  हेनरी का कहना था कि इस घटना के कुछ सप्ताहों के बाद एक दिन मैंने देखा कि मेरी बीबी नमाज़ पढ़ रही है और उसके सामने सिजदागाह रखी हुई है।

 

इस समय हेनरी शूलेन जूनियर और उनकी पत्नी दोनों ही मुसलमान हो चुके हैं।  इन दोनों को दूसरों के बारे में अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास है।  इन दोनों ने यह फैसला किया है कि वे अपने अनुभवों को दूसरों तक पहुंचाएंगे और संसार के अन्य क्षेत्रों में रहने वाले मुसलमानों की हर मुमकिन मदद करेंगे।  हेनरी का कहना है कि इस समय अमरीका में एसे भी मुसलमान हैं जिनके पास इतना पैसा भी नहीं है कि वे हिजाब के लिए कपड़ा और नमाज़ के लिए जानमाज़ ख़रीद सकें।  इस प्रकार के लोग किताबें ख़रीदने में भी सक्षम नहीं हैं।  उन्होंने कहा कि मैंने और मेरी बीवी ने मिलकर दो दर्जन से अधिक हिजाब, महिलाओं के लिए भिजवाए हैं।  उनका कहना है  कि इस प्रकार के कामों को हमें करते रहना चाहिए।  हेनरी का कहना है कि हमको नए मुसलमानों के लिए हिजाब, किताबें या अन्य सामान भेजने का प्रबंध करना चाहिए।

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