Nov २३, २०१९ १७:४७ Asia/Kolkata
  • नया सवेराः विश्व विख्यात भ्रूणशास्त्री प्रोफेसर

संसार में ऐसे बहुत से न्यायप्रिय एवं जागरूक विद्वान गुज़रे हैं जिन्होंने जैसे ही पवित्र क़ुरआन के चमत्कार को देखा, उसे स्वीकार करके वे मुसलमान हो गए। 

क़ुरआन शरीफ़ में जिन वैज्ञानिक विषयों पर विस्तार से बात की गई है उनमें से एक विषय, मनुष्य का जन्म और जन्म से पूर्व के चरणों का उल्लेख है जिन्हें तै करके भ्रूण, बच्चे का रूप लेकर दुनिया में आता है।  यहां पर विशेष बात यह है कि क़ुरआन ने शताब्दियों पहले मनुष्य के जन्म लेने और जन्म से पूर्व के जिन चरणों का उल्लेख किया है उनका ज्ञान शताब्दियों बाद तक इंसान को नहीं था।  आधुनिक विज्ञान ने इसकी सत्यता को सिद्ध किया है।  वे विद्वान और वैज्ञानिक जिनको इस सत्यता ने प्रभावित किया है उनमे से एक विख्यात एम्ब्रियोलाॅजिस्ट या भ्रूणशास्त्री प्रोफेसर "कीथ मूर" हैं।

केनेडा के Prof. Keith L. Moore, प्रोफेसर कीथ मूर, विश्व के मश्हूर और सर्वमान्य भ्रूणशास्त्री हैं।  उनको भ्रूणविज्ञान का जनक भी कहा जाता है।  सन 1984 में प्रोफेसर कीथ मूर को कनाडा की Autopsy संस्था की ओर से JCB पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।  इसके अतिरिक्त भी भ्रूणविज्ञान के क्षेत्र में प्रोफेसर कीथ मूर को बहुत से दूसरे पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।  उनका जन्म 5 अक्तूबर सन 1925 को हुआ था।

मात्र एक घटना ने विख्यात एम्ब्रियोलाॅजिस्ट या भ्रूणशास्त्री प्रोफेसर "कीथ मूर" के जीवन को बदल कर रख दिया।  हुआ यह कि एक बार कई मुसलमान धर्मगुरूओं ने मनुष्य के जन्म से पूर्व के चरणों के बारे में आयतों को जमा किया।  यह मुसलमान विद्धान चाहते थे कि यह देखा जाए कि आधुनिक विज्ञान का इन आयतों के बारे में क्या कहना है जिनमें मनुष्य के जीवन के पहले के चरण की बातों को बताया गया है।  इस काम के लिए प्रोफेसर कीथ मूर को निमंत्रित किया गया।

स्वभाविक सी बात है कि प्रोफेसर कीथ मूर जैसे विद्वान के लिए, जो विख्यात एम्ब्रियोलाॅजिस्ट या भ्रूणशास्त्री होने के साथ ही साथ भ्रूणविज्ञान के जनक भी हैं, पहले चरण में यह बात बहुत ही आश्चर्च चकित करने वाली थी।  उनके हिसाब से भ्रूण के बारे में शताब्दियों पुरानी बात आधुनिक विज्ञान के हिसाब से सही नहीं हो सकती थी।  वे सोचते थे कि लगभग 1400 वर्षों पहले भ्रूण के बारे में जो कुछ भी बातें कही गई हैं वे नवीन विज्ञान के अनुरूप हो ही नहीं सकतीं क्योंकि विज्ञान में उस समय तक इतनी प्रगति नहीं हुई थी।  प्रोफेसर मूर का कहना था कि विगत में विशेषकर दसवी ईसवी शताब्दी में मुसलमानों की वैज्ञानिक प्रगति से वे अवगत थे।  मुझको पता था कि उस काल में मुसलमान विद्वानों ने चिकित्सा के क्षेत्र में कितनी उपलब्धियां हासिल की थीं।  उन्होंने कहा कि इसके बावजूद मुझको यह पता नहीं है विज्ञान के बारे में क़ुरआन और हदीसों में क्या है।  इसके बावजूद डा. कीथ मूर ने कहा कि उन्होंने भ्रूण के बारे में क़ुरआन में लिखा आयतों का अध्धयन किया।  सूरे मोमेनून की आयत संख्या 12 से 14 में ईश्वर कहता हैः

और हमने आदमी को गीली मिट्टी के जौहर से पैदा किया। फिर हमने उसको एक सुरक्षित जगह (औरत के गर्भाशय में) नुत्फ़ा बना कर रखा। फिर हम ही ने नुतफ़े को जमा हुआ ख़ून बनाया फिर हम ही ने जमे हुए खून को गोश्त का लोथड़ा बनाया, हम ही ने लोथडे क़ी हड्डियाँ बनायीं फिर हम ही ने हड्डियों पर गोश्त चढ़ाया फिर हम ही ने उसको (रुह डालकर) एक दूसरी सूरत में पैदा किया तो (सुबहान अल्लाह) ख़ुदा बा बरकत है जो सब बनाने वालो से बेहतर है। 

 

इन आयतों का अध्धयन करने के बाद डा. कीथ मूर ने कहा कि क़ुरआन में भ्रूण के बारे में जो बातें कही गई हैं वे बहुत अच्छे और साइटिफिक ढंग से हैं उनमें और भ्रूणशासत्र के बारे में आधुनिक विज्ञान में बताई गई बातों में कोई अंतर नहीं है।  उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि भ्रूण के बारे में जो कुछ क़ुरआन में कहा गया है उनमे से अभी भी कुछ बातों को मैं पूर्ण रूप से समझ नहीं सका हूं।  इस संबन्ध में वे सूरे अलक़ की आयत संख्या 1 और 2 की ओर संकेत करते हैं।

भ्रूणशास्त्र के बारे में पवित्र क़ुरआन में बताई जाने वाली बातों की जानकारी हासिल करने के बाद इस संबन्ध में डाक्टर मूर का कहना था कि जब मैंने देखा की कु़रआन की आयतों की आधुनिक साइंस पुष्टि कर रही है तो मुझको बहुत ताजुब्ब हुआ क्योंकि यह तो सातवीं शताब्दी में आया था और उस समय भ्रूण विज्ञान के बारे में जानकारी तो अपनी जगह इस विज्ञान का जन्म तक नहीं हुआ था।  डाक्टर कीथ मूर ने अपनी किताबों में भी इन आयतों का उल्लेख किया है।  उन्होंने अपनी किताब "द डेवलपिंग ह्यूमन" के नए संस्करण में क़ुरआनी बातों को शामिल किया जिसके बाद उन्हें विज्ञान की सर्वक्षेष्ठ पुस्तक का इनाम मिला था।  इस किताब का कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।  डाक्टर कीथ मूर की इस किताब को पाठ्य पुस्तक के रूप में पढाया जाता है।

हालांकि प्रोफेसर मूर ने भ्रूण विज्ञान के संबन्ध में क़ुरआन में शोध का काम बंद नहीं किया बल्कि उन्होंने इसको जारी रखा।  वे कहते हैं कि पवित्र क़ुरआन की आयतों और हदीसों का अधिक अध्ययन करने के बाद मैं इस नतीजे पर पहुंचा कि लगभग 1400 साल पहले इस तरह की बात बताना किसी आम आदमी की बात नहीं है बल्कि यह मनुष्य से ऊपर की बात है।  डाक्टर मूर ने क़ाहिरा में आयोजित एक कांफ़्रेंस में इस संदर्भ में कहा था कि मुझको विश्वास हो चुका था कि भ्रूण के बारे में जो कुछ क़ुरआन में कहा गया है कि वह किसी आम व्यक्ति की बात हो ही नहीं सकती बल्कि यह किसी एसे की बात है जो इस क्षेत्र में व्यापक ज्ञान रखता हो।  अब मेरे लिए यह स्पष्ट हो चुका है कि यह बात ईश्वर के अतिरिक्त कोई अन्य कह ही नहीं सकता।  अपनी इस बात से एक प्रकार से प्रोफेसर मूर ने इस्लाम की वास्तविकता को सिद्ध किया है।

क़ुरआन के चमत्कारों के बारे में माॅस्को में आयोजित एक कांफ़्रेस में जब किसी पत्रकार ने प्रोफेसर कीथ मूर से पूछा कि क्या आप मुसलमान हो चुके हैं तो इसके उत्तर में उन्होंने कहा था कि नहीं।  इसके साथ ही कीथ मूर ने यह भी कहा कि मैं इस बात पर विश्वास रखता हूं कि क़ुरआन ईश्वर की किताब है और हज़रत मुहम्मद (स) ईश्वर के दूत हैं।  उनके इस जवाब पर कहा गया कि इस प्रकार से तो आप अब मुसलमान हैं।  इसपर कीथ मूर ने कहा था कि इस समय मुझपर बहुत से सामाजिक दबाव हैं जिसके कारण मैं अपने मुसलमान होने का एलान नहीं कर सकता किंतु जल्द ही आपको सुनने को मिलेगा कि कीथ मूर मुसलमान हो गए हैं।  उनकी इन बातों से पता चलता है इस्लाम के शत्रु विश्व विख्यात एम्ब्रियोलाॅजिस्ट या भ्रूणशास्त्री प्रोफेसर "कीथ मूर" के मुसलमान होने से क्रोधित थे जो उनपर इस बात के लिए दबाव बनाए हुए थे कि वे मुसलमान न बनें।  इस कांफ़्रेंस के एक साल के बाद कीथ मूर ने अपने मुसलमान होने की घोषणा कर दी।  प्रोफ़ेसर कीथ मूर के मुसलमान होने के साथ ही उनके कई सहयोगी प्रोफेसर भी मुसलमान हो गए जिनमें से एक T.V.N.Persaud भी थे।

T.V.N.Persaud

प्रोफेसर T.V.N.Persaud कनाडा के एक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हैं।  उन्होंने स्वयं कई  महत्वपूर्ण लेख लिखे हैं और डाक्टर कीथ के सहायक के रूप में काम किया है।T.V.N.Persaud ने प्रोफेसर कीथ की कई किताबें लिखने में सहायता की है।  सन 1991 में उन्हें J.C.B.पुरस्कार से सम्मानिक किया गया था।  प्रोफेसर T.V.N.Persaud का यह मानना है कि क़ुरआन में बहुत से वैज्ञानिक विषयों को पेश किया गया है।  उनका कहना है कि  प्रोफेसर कीथ मूर की ही भांति मेरा भी यही मानना है कि क़ुरआन में पेश किये गए वैज्ञानिक विषयों का संबन्ध ईश्वर से है मनुष्य से नहीं।  उनका कहना है कि आयतों के अतिरिक्त पै़गम्बरे इस्लाम के कथनों में भी वैज्ञानिक विषयों का उल्लेख मिलता है।

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