Jan ०१, २०२० १८:०२ Asia/Kolkata
  • नया सवेराः कोलंबिया के रहने वाले Lewis Javier

 उनका संबन्ध केथोलिक इसाई धर्म से था।  वे कहते हैं कि मैं इस्लाम की इस विशेषता से बहुत प्रभावित हूं कि वह सभी लोगों की समस्याओं का समाधान कर सकता है।

आइए पहले लुइस जेवियर के देश के बारे में कुछ जानते हैं, बाद में उनके इस्लाम स्वीकार करने के संबन्ध में चर्चा करेंगे।

कोलंबिया की भौगोलिक स्थिति

कोलंबिया एक बहु सांस्कृतिक देश है जिसकी राजधानी बोगोटा है।  यह अमरीका महाद्वीप के पश्चिमोत्तर में स्थित है।  कोलंबिया, अमरीका महाद्वीप का चौथा बड़ा देश है।  जनसंख्या के हिसाब से कोलंबिया, विश्व में 29वें नंबर पर है।  कोलंबिया की जनसंख्या लगभग 50 मिलयन है।  इस देश की जनसंख्या में 95 प्रतिशत लोगों का संबन्ध इसाई धर्म से है।  प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार कोलंबिया में अस्सी हज़ार से अधिक मुसलमान रहते हैं।

Lewis Javier

Lewis Javier "लुइस जेवियर" का जन्म कोलंबिया के एक इसाई परिवार में हुआ था।  जब लुइस जेवियर कुछ बड़े हुए तो उनके मन में धर्म के बारे में कुछ सवाल पैदा हुए।  मुसलमान होने वाले अन्य इसाइयों की ही भांति उन्हें भी अपने धर्म में पाए जाने वाले कुछ विरोधाभासों ने चिंतित कर दिया।  लुइस को इसाई धर्म के पाए जाने वाले कुछ विरोधाभासों का एसा उत्तर नहीं मिला जिससे वे संतुष्ट हो सकें।  यही कारण था कि उन्होंने अन्य धर्मों का अध्ययन करना शुूरू कर दिया।  धीरे-धीरे उनका लगाव इस्लाम की ओर बढ़ने लगा।  बाद में वे इस नतीजे पर पहुंचे कि इस्लाम ही उनकी समस्याओं का समाधान कर सकता है।  इस बारे में वे कहते हैं कि मैं इस्लाम की इस विशेषता से बहुत प्रभावित हूं कि वह सभी लोगों की समस्याओं का समाधान कर सकता है।

"लुइस जेवियर" का कहना था कि 14 वर्ष की आयु में मैं इस्लाम से अवगत होने लगा था और सात वर्षों के बाद 21 वर्ष की आयु में मैं मुसलमान हो गया।  वे कहते हैं कि मैंने मुसलमान होने से पहले ही नमाज़ पढ़नी आरंभ कर दी थी।  लुइस कहते हैं कि उन्होंने सुन रखा था कि मुसलमान रोज़ाना पांच बार नमाज़ पढ़ते हैं।  उन्होंने कहा कि मैंने यह देखने के लिए कि क्या मैं भी एसा कर सकता हूं, नमाज़ पढ़ना शुरू कर दी।  लुइस जेवियर कहते हैं कि नमाज़ पढ़ने से मुझको एक विशेष प्रकार की शांति का आभास होता था।  यह काम मेरे लिए इतना रोचक हो चुका था कि इसको छोड़ने की बात भी मैं सोच नहीं सकता था।

 

कोलंबिया का यह मुसलमान, इस्लाम के बारे में कहता है कि मेरी नज़र में इस्लाम अन्य धर्मों की तुलना में बहुत व्यापक है।  संसार के अन्य धर्मों की तुलना में इस्लाम, मनुष्य की आवश्यकताओं पर पूरा ध्यान देते हुए उसका उचित मार्गदर्शन करता है।  लुइस जेवियर कहते हैं कि इस्लाम की जो विशेषताएं हैं वे स्वयं में विशेष हैं।  वे कहते हैं कि जब मैं इस्लाम की तलाश में निकला तो इसी विश्वास के साथ कि इस्लाम मेरी सारी आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सक्षम है।  कोलंबिया के इस मुसलमान के अनुसार संसार के सारेे ही लोग इस प्रकार के नियमों के इच्छुक हैं।  शायद यही कारण है कि जो लोग मुसलमान हो जाते हैं फिर उनका इस धर्म से वापस आना बहुत कठिन होता है।  "लुइस जेवियर" का मानना है कि पश्चिम की समस्याओं का समाधान इस्लाम में निहित है।  पश्चिम में हम देखते हैं कि वहां पर लोगों का जीवन नैतिक दृष्टि से दिन-प्रतिदिन ख़राब होता जा रहा है।  वहां पर नैतिक समस्याएं बढ़ती जा रही हैं।  एसे में वहां के लोगों की मुक्ति का एकमात्र मार्ग इस्लाम ही है।  लुइस जेवियर कहते हैं कि इस्लाम कोई कठिन धर्म नहीं है।  उनका कहना है कि हो सकता है कि आपको इस्लाम के कुछ नियम कठिन दिखाई दें किंतु सामने दिखाई देने वाली यह कठिनाई बाद वाली बहुत सी कठिनाइयों से मुक्ति देती है।

यहां पर यह बात उल्लेखनीय है कि कोलंबिया जैसे देश में इस्लाम स्वीकार करना कोई सरल काम नहीं है।  इस देश में इस्लाम के विस्तार के मार्ग में आने वाली कुछ समस्याओं के बारे में लुइस जेवियर का कहना है कि कोलंबिया में अमरीका के प्रभाव के कारण इस्लाम के प्रचार व प्रसार में काफ़ी कठिनाइयां हैं।  इसके अतिरिक्त मीडिया में इस्लाम की छवि को घूमिल करने की कोशिश भी इस मार्ग की महत्वपूर्ण बाधा है।  वे कहते हैं कि कोलंबिया में मुसलमानों के साथ अच्छा व्यवहार किया जाता है।  उनका कहना है कि मुसलमान होने के बाद मैं भी ग़ैर मुसलमानों के साथ व्यवहार में बहुत एहतियात करता हूं क्योंकि कोलंबिया के मुसलमान, वहां के रहने वालों के साथ अच्छा व्यवहार करते हैं।

 

कोलंबिया के इस मुसलमान की मनोकामना है कि वह अपने देश में इस्लाम का प्रचार व प्रसार कर सके।  इस बारे में जेवियर कहते हैं कि मैं अपने देश में सामाजिक गतिविधियां अंजाम देता हूं।  हमारे प्रयास किशोरों और जवानों को प्रभावित कर रहे हैं।  हमारे प्रयासों का यह परिणाम निकला कि बहुत से युवा हमसे मिलने के बाद मुसलमान होते गए।  कोलंबिया के नव मुस्लिम लुइस जेवियर एक बिंदु की ओर ध्यान आकृष्ट कराते हैं जो वास्वत में बहुत महत्व रखता है।  वे कहते हैं कि हमको लोगों को इस्लाम की ओर केवल मौखिक रूप में नहीं बल्कि व्यवहारिक रूप में बुलाना चाहिए।  इस संबन्ध में वे पैग़म्बरे इस्लाम के पौत्र इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम का एक कथन पेश करते हैं जिसमें इमाम कहते हैं कि लोगों को ज़बान के बिना इस्लाम का निमंत्रण दो ताकि लोग तुम्हारे व्यवहार से सच्चाई और अच्छी बातें सीखें।

लोगों के मार्गदर्शन के लिए हालांकि धार्मिक शिक्षाओं का दिया जाना आवश्यक है किंतु इन बातों को व्यवहारिक रूप में पेश करने से सामने वाले पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है।  इस बारे में जेवियर कहते हैं कि इस्लाम वास्तविकता का धर्म है।  यह लोगों के मन और हृदय को प्रभावित करता है।  किसी को भी मजबूर करके कोई बात नहीं मनवाई जा सकती।  जब हम व्यवहारिक रूप में लोगों को इस्लाम का निमंत्रण देंगे तो निश्चित रूप में वे इस ओर अधिक आकृष्ट होंगे।  वे कहते हैं कि मुसलमान बनने के बाद मैंने मौखिक रूप में अपने माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को इस्लाम का निमंत्रण देना शुरू किया।  बाद में मुझको अंदाज़ा हुआ कि इस प्रकार से मेरा यह काम सही नहीं था।  बाद में उनके व्यवहार के कारण उनकी पत्नी मुसलमान हो गई।

"लुइस जेवियर" हालांकि मुसलमान हो चुके हैं किंतु वे कहते हैं कि अभी मुझको इस्लाम के बारे में बहुत कुछ सीखना है।  उनका कहना है कि बहुत खोजबीन करने के बाद मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि इस्लामी शिक्षाओं को हासिल करने के लिए ईरान सबसे उचित स्थान है।  वे कहते हैं कि मेरी हार्दिक इच्छा है कि कोलंबिया में मैं इस्लाम का प्रचार करूं। उन्होंने मुसलमान बनने के बाद अपना नाम "अब्दुल हकीम" रखा है औस नाम से वह बहुत खुश है। 

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