Jan १६, २०२० ११:१४ Asia/Kolkata
  • क्या अमरीका की चिढ़ बन गया है रूस का एस-400 सिस्टम?

पिछले कुछ वर्षों से यह देखने में आ रहा है कि जैसे ही कोई देश रूस से एस-400 मिसाइल रक्षा व्यवस्था ख़रीदने की बात करता है अमरीका बेचैन हो जाता है।

यही नहीं कुछ देशों ने तो यह भी किया कि अमरीका से अपनी मांग मनवाने के लिए एस-400 ख़रीदने की बात शुरू कर दी और अमरीका ने एस-400 का सौदा रोकने की शर्त पर वह मांग स्वीकार कर ली। यह सऊदी अरब के मामले में देखने में आया। सऊदी अरब कई साल से कोशिश कर रहा था कि अमरीका से मिसाइल रक्षा सिस्टम थाड ख़रीद ले लेकिन अमरीका ने यह सिस्टम बेचने के लिए बेहद कड़ी शर्तें लगा रखी हैं।

सऊदी अरब अब तक अमरीकी निर्मित पैट्रियट मिसाइल ढाल सिस्टम प्रयोग करता रहा है लेकिन यह सिस्टम यमन युद्ध में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। यमन ने सऊदी अरब के बेहद संवेदनशील ठिकानों और प्रतिष्ठानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर दिए जबकि पैट्रियट सिस्टम इन हमलों को रोकने में पूरी तरह नाकाम रहा। सऊदी अरब ने अमरीका की कड़ी शर्तों को देखते हुए रूस से एस-400 ख़रीदने की बात शुरू कर दी तो अमरीका ने तत्काल थाड सिस्टम बेचने की शर्तों में नर्मी का इशारा देना शुरू कर दिया।

 

हालिया दिनों इराक़ ने भी एस-400 मिसाइल ढाल व्यवस्था ख़रीदने की बात शुरू कर दी है तो अमरीका तिलमिलाया हुआ है। अमरीका ने कहना शुरू कर दिया है कि अगर इराक़ ने रूस से एस-400 सिस्टम ख़रीदा तो इराक़ पर प्रतिबंध लगा दिए जाएंगे। रूस ने मूल रूप से इराक़ का प्रस्ताव मान लिया है और वह कुछ देशों को यह सिस्टम बेचना चाह रहा है।

 

तुर्की ने तो अमरीका की लाख धमकियों के बावजूद रूस से एस-400 सिस्टम ख़रीद लिया। अमरीका ने धमकी दी कि तुर्की के साथ एफ़-35 युद्धक विमानों का सौदा रद्द कर दिया जाएगा लेकिन तुर्की की सेहत पर इन धमकियों का कोई असर नहीं हुआ।

अमरीका तो भारत पर भी दबाव डाल रहा है कि वह रूस से एस-400 का सौदा ख़त्म कर दे लेकिन भारत ने कई बार साफ़ शब्दों में कहा है कि वह एस-400 के सौदे से पीछे नहीं हटेगा।

 

कुछ यूरोपीय देश भी एस-400 सिस्टम ख़रीद चुके हैं।

एस-400 सिस्टम सामने आने के बाद से पैट्रियट मिसाइल ढाल व्यवस्था की डिमांड पूरी तरह समाप्त हो गई है और यहां तक कहा जा रहा है कि एफ़-16 युद्धक विमानों पर भी एस-400 का बड़ा गहरा असर पड़ा है। यह सिस्टम एफ़-16 युद्धक विमानों को मार गिराने में पूरी तरह सक्षम बताया जाता है अतः यदि किसी भी देश ने एस-400 सिस्टम ख़रीदा तो उसके प्रतिद्वंद्वी देशों को एफ़-16 युद्धक विमानों में कोई रुचि नहीं रह जाती।

 

रक्षा उद्योग का अमरीकी अर्थ व्यवस्था में बहुत बड़ा योगदान है अब अगर इस उद्योग पर असर पड़ता है तो निश्चित रूप से अमरीकी अर्थ व्यवस्था को भारी नुक़सान उठाना पड़ सकता है। यही वजह है कि एस-400 मानो अमरीका की चिढ़ बन गया हो! कोई देश अमरीका की नींद हराम करना चाहता है तो एस-400 सिस्टम ख़रीदने की बात शुरू कर देता है।   

टैग्स

कमेंट्स