Feb ०१, २०२० १५:३५ Asia/Kolkata
  • नया सवेराः नार्वे की मोनिका हैंग्सलेम ने गहन अध्ययन के बाद इस्लाम को गले लगाया उनका कहना है कि दुनिया का कोई भी धर्म औरतों को इतना सम्मान नहीं देता जितना इस्लाम देता है

नई नई मुसलमान होने वाली नार्वे की "मोनिका हैंग्सलेम" इस्लाम के बारे में कहती हैं कि इस्लाम को समझने के बाद मुझे यह पता चला कि दुनिया का कोई भी धर्म औरतों को इतना सम्मान नहीं देता जितना इस्लाम देता है। 

इस्लाम ने महिलाओं की स्वतंत्रता और उनके सम्मान पर विशेष ध्यान दिया है।  मोनिका का कहना है कि पश्चिम में आज़ादी का अर्थ यह है कि महिलाएं बहुत छोटे कपड़ों में या बिना कपड़ों के सड़कों पर निकलें।  हालांकि यह सोच ही ग़लत है जिसे आज़ादी नहीं कहा जा सकता।  वे कहती हैं कि इस्लाम ने वास्वत में महिला को आज़ादी दी है।  विशेष बात यह है कि इस्लाम न केवल यह कि हिजाब या पर्दे को महिला के लिए अपमान नहीं समझता बल्कि उसके लिए इसे आवश्यक मानता है।

नार्वे

यूरोपीय देशों में से एक देश नार्वे भी है।  यह उत्तरी यूरोप में है।  नार्वे, स्कैंडिनेवियाई देशों में से एक देश है।  इसकी जनसंख्या पचास लाख से अधिक है।  नार्वे की जनसंख्या में मुसलमान दो से तीन प्रतिशत तक हैं।  मुसलमानों को वहां का सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय माना जाता है।  नार्वे वासियों के बीच इस्लाम के प्रति झुकाव पाया जाता है।  इस देश में भौतिकता से ऊब चुके लोग अब इस्लाम को ही अपनी पनाहगाह के रूप में देख रहे हैं।  "मोनिका हैंग्सलेम" नार्वे की रहने वाली हैं।  उन्होंने गहन अध्ययन करने के बाद इस्लाम को स्वीकार किया है।  वे कहती हैं कि मैंने स्वयं क़ुरआन का अध्ययन किया और बहुत सी वास्तविकताओं को समझा।  मोनिका कहती हैं कि दो कारक एसे हैं जिन्होंने मुझको इस्लाम स्वीकार करने के लिए प्रेरित किया।  एक पश्चिम में फैला नैतिक भ्रष्टाचार और दूसरे फेरबदल वाला इसाई धर्म।

 

मोनिका हैंग्सलेम

 

पश्चिम को वर्तमान समय में जिन समस्याओं का सामना है उनमें से एक वहां पर महिलाओं के विरुद्ध पुरूषों की हिंसा है।  Euro State के आंकड़ों के अनुसार सन 2015 में यूरोपीय संघ के देशों में महिलाओं के विरुद्ध हिंसा के लगभग दो लाख पंद्रह हज़ार केस दर्ज किये गए थे।  हालांकि महिलाओं के विरुद्ध पुरूषों की हिंसा की बहुत सी घटनाएं या तो दर्ज ही नहीं हो पातीं या दर्ज नहीं कराई जातीं।  मुसलमान होने के बारे में वे कहती हैं कि मैं नार्वे में देखा करती थी कि हमारे यहां के बहुत से लोग शराब पीकर अपनी बीवियों की बहुत ही बुरी तरह से पिटाई किया करते थे।  इसको देखकर या सुनकर मुझको बहुत पीड़ा होती थी।

मोनिका कहती हैं कि एक अन्य विषय जिसने मुझको आरंभ से दुखी कर रखा था वह मेरे धर्म की शिक्षाओं में पाए जाने वाले कुछ विरोधाभास थे।  वे कहती हैं कि इंजील की कुछ बातें मेरी समझ से परे थीं।  आपको बताते चलें कि वर्तमान समय में इसाईयों की धार्मिक किताब इंजील को हज़रत ईसा के कई वर्षों के बाद लिखा गया।  इस इंजील को उनके साथियों ने लिखा जिनको "हवारी" कहा जाता है।  

वर्तमान इंजील के विपरीत पवित्र क़ुरआन को पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद के जीवन काल में ही लिखा गया।  इसको पैग़म्बरे इस्लाम के कुछ विश्वसनीय लोगों ने लिखा।  मूल क़ुरआन को हज़रत मुहम्मद के जीवन काल में लिखा जा चुका था अतः इसमें किसी भी प्रकार का मतभेद नहीं दिखाई देता।  वर्तमान समय में यदि कोई भी व्यक्ति संसार के किसी भी हिस्से में जाकर पवित्र क़ुरआन को ले और उसकी तुलना क़ुरआन के किसी भी अन्य एडिशन से करे तो उसमें उसको एक अक्षर का भी अंतर नहीं मिल सकता।  क़ुरआन का एक चमत्कार यह भी है कि वह पूरे संसार में एक ही है।  क़ुरआन  के एडिशन अलग-अलग हो सकते हैं किंतु किसी में भी कोई मतभेद देखने में नहीं मिलेगा। "मोनिका हैंग्सलेम" को इस बात ने बहुत अधिक प्रभावित किया।  उनका कहना है कि यह बात महत्वपूर्ण है कि शताब्दियों पुरानी किताब में आरंभिक समय से लेकर आजतक कोई परिवर्तन दिखाई नहीं देता।

वे कहती हैं कि मुसलमान होने से पहले मैंने नार्वेजियन भाषा में क़ुरआन के अनुवाद को पढ़ा। क़ुरआन का अनुवाद पढ़ने के बाद मैंने इंजील से उसकी तुलना की।  इस तुलना के पश्चात मेरा झुकाव क़ुरआन की ओर बढ़ता गया।  क़ुरआन के विषयों ने मुझको आश्चर्च में डाल दिया। इसमें कई स्थान पर एकेशवर की बात कही गई थी।  इसको पढ़कर मुझे ज्ञात हुआ कि ईश्वर न तो किसी की संतान है और न ही कोई ईश्वर की संतान है।  वे कहती हैं कि क़ुरआन के एक सूरे इख़लास या तौहीद को पढ़कर तो मेरी आंखें ही खुल गईं।  यह सूरा एकेश्वरवाद के बारे में विस्तार से बताता है।

سوره توحید

 

इस सूरे में ईश्वर के एक होने और बिना किसी के पैदा होने की बात कही गई है।  सूरे तौहीद का अनुवाद इस प्रकार है।  अल्लाह एक है।  वह किसी का मोहताज नहीं है और सब उसके मोहताज हैं।  न वह किसी की औलाद है और न ही कोई उसकी औलाद है।  कोई भी उस जैसा नहीं है।  ब्रहमाण्ड में जो कुछ है उसे अल्लाह ने ही पैदा किया है।

प्रत्येक पश्चिमी महिला जो किसी धर्म को अपनाना चाहती है उसके लिए यह विषय बहुत ही महत्वपूर्ण है कि उस धर्म का महिलाओं के बारे में क्या विचार है।  मोनिका के मन में भी यह सवाल गूंज रहा था।  जब उसने इस्लामी पुस्तकों का अध्ययन किया तो पता चला कि धर्मों में सबसे अधिक महत्व इस्लाम ही महिलाओं को देता है।  इस बारे में मोनिका का कहना है कि इस्लाम का अध्ययन करने के बाद यह बात मेरी समझ में आई कि इस्लाम के अतिरिक्त कोई अन्य धर्म महिलाओं को इतना सम्मान नहीं देता।  इस्लाम ने महिला की स्वतंत्रता की ओर ही ध्यान केन्द्रित किया है।    इस्लाम, महिला को समाज में सुरक्षित देखना चाहता है और इसीलिए उसने हिजाब या पर्दे का प्रावधान किया है।

हेजाब

 

वे कहती हैं कि इस्लाम को गले लगाकर मैं बहुत ही खुश हूं और मेरे साथ मेरी कुछ सहेलियां भी मुसलमान हुई हैं।  नार्वे की इस मुसलमान महिला का कहना है कि मुसलमान बनने के साथ ही मुझको कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ा किंतु मैंने उनका डटकर मुक़ाबला किया।  मोनिका कहती हैं कि मेरा मुसलमान होना मेरे परिवार के लिए क्रोध का कारण बना।  वह कहती हैं कि मेरी मां ने मुझको घर से निकाल दिया जिसके कारण कई रातों तक मैं अपने मुसलमान दोस्तों के साथ रही।  हालांकि आरंभ में मेरे परिवार ने इसका विरोध किया किंतु बाद में उसका विरोध हल्का पड़ने लगा।  बाद में मेरे परिवार को वास्तविकता समझ में आई और उन्होंने मुझको घर आने की अनुमति दी।

मोनिका का कहना है कि मैंने बिना सोचे-समझे इस्लाम को गले नहीं लगाया बल्कि इसके लिए गहन अध्ययन किया है।  उनका कहना है कि नार्वे के संचार माध्यम इस्लाम की सही छवि पेश नहीं करते। वे इस्लाम की वास्तविकता लोगों को नहीं बताते।

"मोनिका हैंग्सलेम" अब हज भी कर चुकी हैं।  वे इस आध्यात्मिक यात्रा को यादगार यात्रा बताती हैं।  हज की अपनी यात्रा के बारे में वे कहती हैं कि जिस समय मैंने पहली बार पवित्र काबे को अपनी आखों से देखा उस समय मुझको विशेष प्रकार का आभास हुआ।  वे कहती हैं कि मुझको एसा लग रहा था कि मानों मैं ईश्वर के बिल्कुल निकट हो चुकी हूं।  मेरी कामना है कि इस प्रकार की यात्रा का मुझको फिर सौभाग्य प्राप्त हो।  वे कहती हैं कि मुझको पूरा विश्वास है कि हज करने के बाद मनुष्य में बहुत बड़ा परिवर्तन होता है।

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