Feb २०, २०२० १२:४७ Asia/Kolkata
  • अमरीका पर रूस को आया गुस्सा, क्या संयुक्त राष्ट्र का मुख्यालय हट सकता है अमरीका से?

हालांकि संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्यालय के बारे में अमरीका ने हमेशा ही मनमानी की है और नियमों का खुला उल्लंघन किया है लेकिन हालिया महीनों में और ट्रम्प सरकार के काल में यह प्रक्रिया तेज़ी से बढ़ी है और अमरीका की इस मनमानी का शिकार, रूस भी हुआ लेकिन रूस ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया प्रकट की है। रायुल यौम ने इस का जायज़ा लिया है।

न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्यालय में जाने का इरादा रखने वाले कूटनयिकों के  लिए वीज़ा न देने के अमरीकी फैसले के खिलाफ रूस ने जो अपातकाल बैठक बुलाई है तो इसका उसे पूरा अधिकार है क्योंकि अमरीका की मनमानी का हालिया शिकार रूसी प्रतिनिधिमंडल हुआ है जो न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्यालय में निशस्त्रीकरण की बैठक में भाग लेने के लिए जाना चाहता था मगर उसे वीज़ा मिलने में परेशानी हुई जिसकी वजह से बैठक में 10 दिनों का विलंब भी हुआ। 

यह निश्चित रूप से दुष्टता की सीमा है कि अमरीकी सरकार अतंरराष्ट्रीय नियमों का इस तरह से खुला उल्लंघन कर रही है इससे एक बार फिर साबित होता है कि अमरीका सरकार , किसी भी अंतरराष्ट्रीय नियम का पालन नहीं करती। इसकी एक बड़ी मिसाल, ईरान के साथ होने वाले परमाणु समझौते से अमरीका का निकलना भी है। 

अन्य देशों के प्रतिनिधियों को वीज़ा न देने तक ही अमरीकी दुष्टता सीमित नहीं है बल्कि अमरीका में अन्य देशों को कूटनयिकों और प्रतिनिधियों की जामा तलाशी भी ले जाती है। 

एक अरब विदेशमंत्री की न्यूयार्क एयरपोर्ट पर इस तरह से तलाशी ली गयी कि उनके सारे कपड़े तक उतार लिये गये जबकि वह कूटनयिक पास्पोर्ट पर यात्रा कर रहे थे और संयुक्त राष्ट्र संघ की एक बैठक में भाग लेने के लिए अमरीका जाने वाले प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भी कर रहे थे। 

अमरीकी अधिकारियों के इस व्यवहार पर उस अरब विदेशमंत्री को इतना गुस्सा आया कि वह न्यूयार्क एयरपोर्ट से ही वापस हो गये और उस समय तक न्यूयार्क नहीं गये जब तक तत्कालीन अमरीकी विदेशमंत्री कोन्डोलीज़ा राइस ने औपचारिक रूप से उनसे माफी  नहीं मांग ली। 

यह तो एक मिसाल है अमरीका में इस तरह का अपमान बहुत से लोगों को सहन करना पड़ता है। यही नहीं इस प्रकार के व्यवहार का शिकार अरब मूल के या मुसलमान अमरीकी नागरिकों को भी होना पड़ता है। अमरीका ने तो पांच इस्लामी देशों के नागरिकों के अमरीका प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगा रखा है और इसका कारण बताया है कि इन देशों से अमरीका को आतंकवाद का खतरा है। रोचक बात है यह है कि यह दावा अमरीका की वह सरकार कर रही है जो तथ्यों के अनुसार, दुनिया की सब से बड़ी आतंकवादी सरकार है और जिसके शासकों के हाथ बीस लाख से अधिक इराक़ी नागरिकों के खून से रंगे हैं, लीबिया और सीरिया की बात न भी करें तब भी और यह सूचि काफी लंबी है। 

यह हास्यास्पद नहीं है कि अमरीकी सरकार, संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा के अधिवेशन में भाग लेने के लिए ईरान के विदेशमंत्री को भी वीज़ा नहीं देती क्योंकि उनका नाम आतंकवादियों  की सूचि में है जबकि वह एक पढ़े लिखे बुद्धिजीवी हैं जिन्होंने शायद कभी मुर्गी भी नहीं हलाल की होगी। 

अमरीका की इस गुंडागर्दी का अंत होना चाहिए अन्यथा संयुक्त राष्ट्र संघ का मुख्यालय दूसरे देश में बनाया जाए जहां उसके नियमों का पालन होता हो। हालात से यह लग रहा है कि अगर अमरीका ने अपना व्यवहार नहीं बदला तो बड़ी शक्तियां इस बारे में सोच सकती हैं, रूस अपने कूटनयिकों को वीज़ा न दिये जाने के मामले  पर काफी गंभीर नज़र आ रहा है। तो क्या रूस की गंभीरता, संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्यालय को अमरीका से हटाने का आरंभ हो सकती है? फिलहाल इस सवाल का जवाब मुश्किल है। Q.A. साभार, रायुलयौम, लंदन

 

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