Mar २५, २०२० ०८:५८ Asia/Kolkata
  • क्या कोरोना वायरस अमरीकी साम्राज्य के विनाश की उलटी गिनती साबित होगा? वाशिंग्टन पोस्ट की रिपोर्ट से हटकर भी हमें मालूम है कि अमरीकी साम्राज्य ध्वस्त हो रहा है!

संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटरेस ने अपील की है कि दुनिया में जहां भी युद्ध चल रहा है उसे तत्काल रोका जाए ताकि घातक कोरोना वायरस का सब मिलकर मुक़ाबला कर सकें और उन राष्ट्रों को कोरोना के ख़तरे से मुक्ति दिलाएं जहां जंग के हालात हैं।

गुटेरस के साथ ही अरब लीग के महासचिव अहमद अबुल ग़ैत ने भी अपील की है लेकिन उन ताक़तों का नाम किसी ने भी नहीं लिया जिन्होंने इस युद्ध की आग भड़का रखी है और पैसे और हथियारों की मदद से इन जंगों का समर्थन कर रही हैं या जिन्होंने अन्य देशों की नाकाबंदी कर रखी है। नाम इसलिए नहीं लिया कि उन्हें अपने पद की चिंता है हालांकि यह लोग 70 साल की उम्र गुज़ार चुके हैं मगर अब भी निडर होकर बात करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।

इराक़ पर हमला और क़ब्ज़ा अमरीका ने किया, उसी ने लीबिया को ध्वस्त करके विफल स्टेट बनाने वाली नैटो की कार्यवाही का नेतृत्व किया और वही इस समय लीबिया में जारी गृह युद्ध के पीछे भी सक्रिय है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने अपनी ज़बान से कहा कि अमरीका ने सीरिया में 90 अरब डालर ख़र्च किए, वह सीरिया का तेल चोरी कर रहे हैं और उससे होने वाली आमदनी आतंकी और अलगाववादी संगठनों की फ़ायनेन्सिंग के लिए प्रयोग कर रहे हैं। हमें तो चीन के इस आरोप में भी दम नज़र आता है कि कोरोना वायरस भी अमरीका ने ही फैलाया है।

हमारा तो दिल चाहता था कि अरब लीग के महासचिव कई देशों की नाकाबंदी और उन पर लगे प्रतिबंध भी समाप्त करने की मांग करते। ईरान, सीरिया और ग़ज़्ज़ा पर लगे प्रतिबंध हटाने की बात करते और यमन को भूखमरी की ओर ढकेल देने वाली नाकाबंदी के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाते। जिन देशों की नाकाबंदी की गई है वह कैसे इस महामारी से लड़ पाएंगे।

कोरोना वायरस ख़तरनाक है इसमें कोई संदेह नहीं और इससे लड़ने के लिए पूरी दुनिया का सहयोग ज़रूरी है लेकिन इससे पहुंचने वाला नुक़सान अमरीका के युद्धों से कम है विशेष रूप से उन युद्धों से जो मध्यपूर्व में लड़े गए। इन जंगों में दसियों लाख लोग मारे गए, बेघर हुए। इस कोरोना वायरस का शायद एक ही सकारात्मक पहलू यह है कि इससे अमरीकी साम्राज्य चरमरा गया है और हो सकता है कि दुनिया को अमरीका की दुष्टता और लड़ाइयों से निजात मिल जाए।

वाशिंग्टन पोस्ट ने अपने लेख में यह बात लिखी है लेकिन हमें यूं भी मालूम है कि कोरोना वायरस ने अमरीका में आम जनजीवन को और अमरीकी अर्थ व्यवस्था को जो भारी नुक़सान पहुंचाया है उससे दुनिया में अमरीकी साम्राज्य और वर्चस्व ध्वस्त हो सकता है। जब अमरीकी नेतृत्व ने इस मामले में तनिक भी इंसानियत नहीं दिखाई बल्कि अपने क़रीबी घटकों को भी मुसीबत में देख के मुंह घुमा लिया और एक मास्क तक देने को तैयार नहीं है जबकि वह दुनिया के सबसे ताक़तवर और सबसे धनी देश होने का दावा करता है तो इसका साफ़ मतलब यही है कि वह पहली परीक्षा में नाकाम हो गया है।

युद्ध और क़त्ल से कोई बड़ा नहीं होता और हथियारों के व्यापार और दूसरों पर प्रतिबंध लगाने से कोई धनी नहीं होता इसके लिए न्याय और इंसानियत जैसे सिद्धांतों पर अमल करना ज़रूरी होता है, कमज़ोरों और मज़लूम लोगों की मदद करने की ज़रूरत होती है जबकि अमरीका की डिक्शनरी में इन चीज़ों के लिए कोई जगह ही नहीं है।

हम ने नहीं सुना और न कहीं पढ़ा के अमरीका ने ग़ज़्ज़ा वासियों के लिए एक बोरी चावल भेजा हो या भुखमरी और महामारी से जूझ रहे यमन की मदद के लिए कोई दवा या खाने पीने की चीज़ भेजी हो, या सीरिया और तुर्की की सीमा पर बहुत बुरी स्थिति में रहने वाले सीरियाई शरणार्थियों के लिए उसने कोई मदद भेजी हो।

हम यह बात मानते हैं कि अमरीका के बर्बर प्रशासन से हमें तनिक भी लगाव नहीं है इसलिए कि वह हमारे ख़िलाफ़ भयानक नस्लवाद पर अमल कर रहा है और हमारे देशों में उन शासकों का समर्थन कर रहा है जो मानवता के दुशमन बने हुए हैं, हमारे देशों के संसाधन लूट रहा है।

कोरोना वायरस ने अमरीका का नस्लवाद भी जगज़ाहिर कर दिया, उसका घमंड ही तोड़ दिया और यह भी साबित कर दिया कि उसे किसी भी देश की कोई चिंता नहीं है। जबकि इस बीच चीनी, रूसी और क्यूबा के जहाज़ सहायता लेकर इटली, स्पेन, फ़्रांस और ईरान जैसे देशों में पहुंच रहे हैं। ट्रम्प की हालत यह है कि वह कोरोना से प्रभावित देशों की मदद के लिए 100 मिलियन डालर की पेशकश करते हैं जबकि इससे ज़्यादा पैसे तो उन्होंने उन महिलाओं को चुप कराने के लिए दे दिए जो ट्रम्प के सेक्स स्कैंडल का भांडाफोड़ कर सकती।

स्वेज़ नहर की लड़ाई ने ब्रिटिश साम्राज्य के पतन की उल्टी गिनती शुरू करवा दी थी तो कोरोना वायरस शायद अमरीकी साम्राज्य की बर्बादी की उलटी गिनती का आरंभ बिंदु बनने जा रहा है।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के प्रख्यात लेखक और टीकाकार

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