Mar २६, २०२० १६:५१ Asia/Kolkata
  • कोरोना ने मौत के मुंह में पहुंचा दिया था, लेकिन एक सादी सी दवा ने दिया नया जीवन दान

कोरोना वायरस और निमोनिया से पीड़ित, 52 वर्षीय रियो गिआर्डिनेरी को दक्षिण फ़्लोरिडा के डिमैगियो अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था।

आईसीयू में भर्ती हुए उन्हें एक हफ़्ते से ज़्यादा का समय बीत गया और उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ तो डॉक्टरों ने उन्हें जवाब दे दिया और कहा कि ऐसा कोई उपाय नहीं बचा है, जो उन्होंने उनके उपचार के लिए नहीं किया हो। जब ज़िंदा रहने की सारी उम्मीदें ख़त्म हो गईं तो गिआर्डिनेरी ने परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों को "अलविदा" कहना शुरू कर दिया।

इसी दौरान, जब उन्होंने एक दोस्त को अलविदा कहने के लिए फ़ोन किया तो उसने उन्हें बताया कि कोरोना वायरस का एक संभावित इलाज मौजूद है और वह है एंटी-मलेरिया दवा जिसे हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन कहा जाता है।

हालांकि अस्पताल के डॉक्टरों ने उनसे कहा कि वे हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का सुझाव नहीं दे सकते हैं, लेकिन उन्होंने गिआर्डिनेरी को एक संक्रामक रोग चिकित्सक से संपर्क करने दिया, जिसने उन्हें इसके इस्तेमाल की अनुमति दे दी। उनका कहना है कि अगली सुबह जब वह नींद से उठे तो ख़ुद को बिल्कुल स्वस्थ पाया।

गिआर्डिनेरी ने मंगलवार को एक रोडियो कार्यक्रम में हिस्सा लिया और अपनी इस कहानी को लोगों के साथ साझा किया। उनका कहना था कि मैं कोई वैज्ञानिक या डॉक्टर नहीं हूं। मैं आपके साथ अपनी भावनाओं को साझा कर सकता हूं। मुझे पता था कि मेरी हालत बिगड़ रही है और मुझे कोई उम्मीद नहीं थी कि अगली सुबह ही मैं आप लोगों के बीच यहां रहूंगा। इस दवा ने केवल मुझे ही अच्छा नहीं कया है, बल्कि ऐसे बहुत से लोग हैं जो इसके इस्तेमाल से अच्छे हो गए हैं।

ग़ौरतलब है कि भारत सरकार ने भी देश में कोरोना वायरस के तेज़ी से फैलने के कारण, एंटी-मलेरिया दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है।

भारतीय चिकित्सा शोध परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक बलराम भार्गव ने सोमवार को कोरोना वायरस संक्रमण के संदिग्ध या पुष्ट मामलों की देखभाल करने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के इलाज के लिए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल की सिफ़ारिश की थी। msm

टैग्स

कमेंट्स