Mar २७, २०२० १५:३३ Asia/Kolkata
  • जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी से त्रस्त है, कुछ ऐसे लोग हैं जो इसका स्वागत कर रहे हैं

दुनिया भर में कोरोना वायरस की महामारी ने क़हर बरपा कर रखा है और लोग इससे छुटकारा पाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं, यहां तक कि इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में लोग अपने घरों में क़ैद होकर रह गए हैं, लेकिन कई देशों में दक्षिपंथी राष्ट्रवादी इस महामारी का स्वागत कर रहे हैं।

इनमें सबसे आगे कट्टरपंथी नव-नाज़ी हैं, जो सभ्यता और संस्कृति को मिटा देना चाहते हैं और COVID-19 को इसके लिए सबसे प्रभावशाली हथियार के रूप में देख रहे हैं।

अमरीका के समाजशास्त्री और राष्ट्रवादी कट्टरपंथी संगठनों के विशेषज्ञ सिंथिया मिलर इदरीस का कहना है कि दक्षिणपंथी इस स्थिति का दुरुपयोग कर सकते हैं। महामारी से जो अनिश्चितता की स्थिति पैदा होगी, उससे परिवर्तनों के लिए भूमि प्रशस्त होगी और दक्षिणपंथी इसका लाभ उठाना चाहेंगे।

उत्तरी यूरोप में स्थित एक नव-नाज़ी आंदोलन नॉर्डिक प्रतिरोध आंदोलन (NRM) के नेता ने कहा है कि उनका संगठन जैसी दुनिया चाहता है, उसे वैसा बनाने में यह महामारी मदद कर सकती है, इसलिए वे इसका स्वागत करते हैं।

एनआरएम की स्वीडिश शाख़ा के नेता साइमन लिंडबर्ग ने अपने आंदोलन की वेबसाइट पर लिखाः एक वास्तविक राष्ट्रीय विद्रोह और क्रांतिकारी राजनीतिक ताक़तों को मज़बूत बनाने के लिए हमें जो चाहिए, वह कोविड-19 से बेहतर क्या हो सकता है।

लिंडबर्ग ने आगे लिखाः हम आज के सड़े हुए समाज की नींव पर भविष्य में हज़ारों साल तक बाक़ी रहने वाले समाज का निर्माण नहीं कर सकते हैं, हां, इसके बजाय हम उसके खंडहरों पर उसका निर्माण कर सकते हैं।

नॉर्वेजियन पुलिस के अनुसार, अगस्त 2019 में एक मस्जिद पर हुए हमले में शामिल एक 22 वर्षीय हमलावर एनआरएम से ही जुड़ा हुआ था।

भारत में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) जैसे अन्य दक्षिपंथी और कट्टरपंथी संगठन इस महामारी को अपने नस्लभेदी एजेंडों को आगे बढ़ाने के लिए अवसर के रूप में देख रहे हैं।

जर्मनी में नव-नाज़ी संगठन डाई रेच्टे (द राइट) के एक सदस्य का कहना है कि जर्मनी को हफ़्तों पहले ही ग़ैर यूरोपीयों के लिए अपनी सीमाओं को सील कर देना चाहिए था। msm

 

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