Mar ३०, २०२० १७:२५ Asia/Kolkata
  • युरोप का  वह एकलौता देश जिसे कोरोना की बिल्कुल चिंता नहीं! सब कुछ सामान्य, राष्ट्रपति  ने बताया नुस्खा, क्या भारत में भी प्रभावी है यह तरीक़ा?

युरोप आजकल कोरोना के फैलाव का केन्द्र बना हुआ है लेकिन इसी युरोप में एक ऐसा देश भी है जिसे कोरोना के फैलाव की चिंता बिल्कुल नहीं है लेकिन इसकी वजह  लापरवाही बिल्कुल नहीं है।

       बेलारूस, युरोप का वह एकमात्र देश है जहां के अधिकारी अपने देश की जनता को कोरोना की वजह से असामान्य स्थिति में डालने के इच्छुक नहीं हैं।

    बेलारूस कई पहलुओं से एक असाधारण देश है शायद यही वजह है कि उसने कोरोना से मुक़ाबले के लिए भी अपने बेहद निकटवर्ती पड़ोसियों, रूस और युक्रेन से भी हट कर नया रास्ता अपनाया है।

    युक्रेन में किसी भी समय अपातकाल की घोषणा की जा सकती है और रूस ने भी स्कूल बंद करे, सार्वाजनिक  कार्यक्रम रद्द करे और सभी  उड़ानें रोक कर कोरोना वायरस से मुक़ाबले की तैयारी कर ली है लेकिन बेलारूस में कई पहलुओं से जन जीवन सामान्य है, सीमाएं यथावत खुली हुई हैं, लोग काम पर जा रहे हैं और कोई भी डर की वजह से टॉयलेट पेपर का भंडारण नहीं करता।

 

    बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्ज़ेंडर लोकान्शो का कहना है कि उनके देश को कोरोना वायरस से नहीं डरना चाहिए और न ही उनके देश को कोरोना से बचाव के लिए इतनी अधिक सतर्कता की ज़रूरत है।

बेलारूस के राष्ट्रपति का मानना है कि खेत में कड़ी मेहनत, कोरोना वायरस से बचाएगी।

 

    उन्होंने चीनी राजदूत के साथ अपनी एक बैठक में कहा कि " यह सब होता रहता है , महत्वपूर्ण बात यह है कि हम डरें न।"

    बेलारूस की सरकार ने सेनेमा हॉल बंद नहीं किये, थियेटर भी खुले हैं और सार्वाजिनक कार्यक्रमों पर भी कोई प्रतिबंध नहीं है।

    बेलारूस दुनिया के उन गिने चुने देशों में है जहां आज भी फुटबाल मैच हो रहे हैं। बेलारूस की फुटबॉल लीग यथावत चल रही है और पड़ोस में रूस के फुटबाल प्रेमी भी  उसके मैचों से आनंद उठा रहे हैं।

    बेलारूस के राष्ट्रपति का मानना है कि खेत में कड़ी मेहनत, कोरोना वायरस से बचाएगी।

    उन्होंने कहा कि " ट्रेक्टर कोरोना की समस्या को खत्म करेगा" उनके इस बयान में बाद सोशल मीडिया पर उनका काफी मज़ाक़ भी उड़ाया गया। उनका आशय यह था कि खेतों में कड़ी मेहनत करने से कोरोना वायरस से बचा जा सकता है। उन्होंने यह  भी सलाह दी कि वोदका शराब की कुछ घूंट भी कोरोना से बचा सकती है हालांकि उन्होंने कहा कि वह शराब नहीं पीते।

    बेलारूस से बाहर कोरोना के फैलाव और उसके बाद विभिन्न देशों की हालत देख कर हालांकि इस देश में भी कुछ लोग चिंतित हैं और उन्होंने सरकार से मांग की है कि वह बचाव का उपाय करे लेकिन बेलारूस के राष्ट्रपति का कहना है कि चिंता की ज़रूरत नहीं क्योंकि बेलारूस में घुसने वाले हर यात्री का पहले कोरोना का टेस्ट लिया जाता है।

    उन्होंने बताया कि पूरे दिन के टेस्ट में दो या तीन लोग पाज़ेटिव पाए जाते हैं जिन्हें आइसोलेट किया जाता है और फिर एक डेढ़ हफ्ते में हम उन्हें छोड़ देते हैं।

अधिकांश देशों में फुटबॅाल बंद मगर बेलारूस में जारी 

 

    बेलारूस के राष्ट्रपति ने बौखलाहट और चिंता को कोरोना वायरस से अधिक खतरनाक बताया है। उन्होंने खुफिया एजेन्सी को आदेश दिया है कि देश वासियों को डराने वालों को पकड़े और सख्त सज़ा दे।

    बेलारूस कई पहलु से युरोप का अनोखा देश है। मिसाल के तौर पर बेलारूस युरोप का एकमात्र देश है जहां अब भी मृत्युदंड दिया जाता है। इसी तरह युरोप का एकमात्र देश है जहां के अधिकारियों पर कोरोना वायरस की वजह से बौखलाहट नहीं छायी है।

    रोचक बात तो यह है कि हर बात में सरकार और राष्ट्रपति का विरोध करने वाले कड़े सरकार विरोधी आंद्रे कीम ने भी बेलारूस के राष्ट्रपति का इन विचारों का समर्थन किया है। उन्होंनें कहा कि उनका मानना है कि देश में लॉकडाउन, बेलारूस की आर्थिक मौत लिख देगा। बेलारूस वह एकमात्र देश है जहां के अधिकारी जनवाद से प्रभावित नहीं हैं और अपने देश की जनता के लिए सब से अच्छा रास्ता चुनते हैं, मुझे पता है कि जो मैं कह रहा हूं वह सुन कर कुछ लोग मुझे ज़िंदा ही निगल जाना चाहेंगे लेकिन मैं सार्वाजनिक पागलपन के प्रति चुप नहीं रह सकता।

    सार्वाजनिक पागलपन से उनका आशय, कोरोना से बचने के लिए पूरी दुनिया में उठाए जाने वाले कद़म थे।  Q.A.

 

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