Mar ३१, २०२० १५:३१ Asia/Kolkata
  • कोरोना वायरस के बारे में एक मुस्लिम वैज्ञानिक का अब तक का सबसे सटीक ख़ुलासा

ऑर्गेनिक केमिस्ट्री के विशेषज्ञ एक मुस्लिम वैज्ञानिक का कहना है कि बहुत तेज़ी से फैलने वाला कोरोना वायरस कोविड-19 प्राकृतिक रूप से इंसानों में नहीं फैला है, बल्कि अमरीकी प्रयोगशाला में इसे एक जैविक हथियार के रूप में ढाला गया है।

ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में कैम्ब्रिज से पीएचडी और एससीडी डिग्री होल्डर तथा शोधकर्ता डॉक्टर अताउर्रमाहन से जब कोविड-19 महामारी के बारे में कि अब तक दुनिया भर में जिसकी चपेट में क़रीब साढ़े सात लाख लोग आ चुके हैं और 35,000 से ज़्यादा मर चुके हैं, पूछा गया तो उन्होंने कहाः इस बात की प्रबल संभावना है कि मौजूदा कोरोना वायरस एक जैविक हथियार है, जिसे एक ख़ास रूप में संशोधित करके उससे बायोलॉजिकल बम तैयार किया गया हो।  

डॉक्टर रहमान का कहना था कि इस बात के सुबूत मौजूद हैं कि अमरीका एक प्रयोगशाला में जैविक हथियारों पर काम कर रहा था। जिसे हाल ही में एक लीकेज के बाद बंद कर दिया गया था। यह एक सैन्य प्रयोगशाला थी।

उनका दावा था कि इस बात के भी सुबूत हैं कि यह वायरस चीन के वुहान से शुरू नहीं हुआ है, बल्कि इसे अमरीका और ब्रिटेन समेत पश्चिमी देशों की कुछ विशेष प्रयोगशालाओं में विकसित किया गया है। इन प्रयोगशालओं में जैविक हथियारों पर शोध कार्य किए जा रहे थे।

डॉक्टर रहमान का कहना था कि यह सब चीन को पछाड़ने के लिए किया गया था, लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि बाज़ी पलट गई है।

उन्होंने यह कहा कि सच्चाई पर लम्बे समय तक पर्दा नहीं डाला जा सकेगा और जो भी इसके लिए ज़िम्मेदार है, उसका चेहरा सबके सामने आ जायेगा।

इस महीने की शुरुआत में सीआईए के एक पूर्व अधिकारी ने भी कहा था कि कोरोना वायरस एक जैविक हथियार है, संभवतः इसे एक प्रयोगशाला में तैयार किया गया था।

5 मार्च को स्ट्रैटेजिक कल्चर फ़ाउंडेशन द्वारा प्रकाशित एक लेख में फ़िलिप गिराल्डी ने लिखा थाः कई रिपोर्टों से पता चलता है कि यह वायरस एचआईवी वायरस से काफ़ी मिलता जुलता है, जो स्वाभाविक रूप से पैदा नहीं हुआ है।

अगर यह सही है कि यह वायरस विकसित किया गया है या फिर उसे हथियार के रूप में तैयार किया गया था, तो इससे यह समझ में आएगा कि वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी लैब से यह लीक हुआ है और जानवरों और इंसानों में फैल गया है। ऐसे वातावरण में काम करने वाले तकनीशियन यह जानते हैं कि प्रयोगशालाओं से इस तरह के लीकेज होते रहे हैं।

लेकिन जब महामारी के प्रकोप के बारे में व्यापक रूप से ऑनलाइन चर्चा होने लगी तो अमरीकी मीडिया ने इसे एक नया रुख़ देने का प्रयास किया कि यह बीमारी पिछले साल दिसंबर में चीन के वुहान शहर की मीट मार्केट से शुरू हुई थी।

हालांकि अब ख़ुद अमरीकी स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह बात स्वीकार कर रहे हैं कि कोविड-19 मीट मार्केट से नहीं फैला है। msm

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