May २३, २०२० १९:१६ Asia/Kolkata
  • जर्मनी! चर्च के दरवाज़े खोले नमाज़ियों के लिए... चर्च की ज़िम्मेदार ने भी पढ़ी नमाज़ !

जर्मनी में मस्जिद के निकट बने चर्च ने मुसलमानों  की नमाज़ के लिए अपने दरवाज़े खोल दिये और मुसलमानों ने चर्च में जाकर नमाज़ पढ़ी।

अजज़ीरा टीवी चैनल की रिपोर्ट के अनुसार जर्मनी की राजधानी बर्लिन में एक चर्च ने अपने निकट की मस्जिद में रमज़ान के अंतिम जुमा की नमाज़ पढ़ने वालों की भीड़ देख कर अपने दरवाज़े खोल दिये। पूरे जर्मनी में चर्च के अधिकारियों के इस फैसले की सराहना की जा रही है।

जर्मनी में लॉकडाउन खत्म किये जाने के बाद उपासना स्थलों को खोलने की भी अनुमति मिल गयी है लेकिन उसके यह गाइड लाइन जारी की गयी है कि उपासना करने वाले लोगों के बीच कम से कम डेढ़ मीटर की दूरी रहे।

जर्मनी की राजधानी बर्लिन में दारुस्सलाम  मस्जिद में जुमे की नमाज़ के लिए सैंकड़ों मुसलमान जमा हो गये जबकि नयी गाइडलाइन के हिसाब से मस्जिद में केवल पचास लोग ही नमाज़ पढ़ सकते थे।

इस मस्जिद के निकट ही मार्था लुथेर्न चर्च था जिसने नमाज़ियों के लिए अपने दरवाज़े खोल दिये।

मस्जिद के इमाम ने कहा कि यह सब सहिष्णुता है जब चर्च के अधिकारियों ने नमाज़ियों को परेशान देखा तो हम से पूछा कि क्या आप के पास जगह नहीं है? तो हमने उन्हें बताया तो उन्होंने चर्च के दरवाज़े खोल दिये। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी ने हमें एक समाज बना दिया है, हमें एक दूसरे के निकट कर दिया है।

चर्च में जुमा की नमाज़ पढ़ने वाले एक जर्मन मुसलमान ने कहा कि कुछ देर बाद चर्च का माहौल सामान्य लगने लगा।

मुहम्मद हमदून ने बताया कि चर्च में पहले तो वाद्य यंत्र, और फोटो आदि ने असहज किया किंतु ध्यान देने पर यह छोटी चीज़े दिमाग से निकल गयीं और यह विचार मज़बूत हुआ कि यह भी ईश्वर का ही घर है।

चर्च की ज़िम्मेदार मोनिका मैट्थियस ने कहा कि " मैंने नमाज़ में हिस्सा लिया। मैंने जर्मन भाषा में भाषण भी दिया और नमाज़ के दौरान मेरे मुंह से बार बार  " यस यस " के शब्द निकल रहे थे क्योंकि हमारी भी वही चिंताएं हैं जो उनके भाषण में प्रकट की जा रही थीं, हमें एक दूसरे से सीखने का रास्ता निकालना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मस्जिद के साथ सहयोग, हमारी कम्यूनिटी का फैसला था ताकि हम कोरोना वायरस के दौरान एक दूसरे का ख्याल रखें।

उन्होंने कहा कि इस से हम एक दूसरे से निकट आएं।

हालिया वर्षों में युरोप और विशेष कर जर्मनी में इस्लामोफोबिया द्वारा समाज को बांटने की कोशिश तेज़ हो गयी है। इसी लिए इस प्रकार के क़दम पर पूरे देश में स्वागत किया जा रहा है। Q.A.

 

टैग्स

कमेंट्स