May २६, २०२० १५:४८ Asia/Kolkata
  • अमरीका की चौधराहट ख़त्म होने वाली है, चीन, अमरीका से आगे बढ़ जाएगाः यूरोपीय संघ

यूरोपीय संघ के विदेशी मामलों के प्रभारी ने कहा है कि दुनिया पर अमरीका का एकछत्र राज का अंत निकट आ गया है।

जनवरी 2017 में अमरीका के नए राष्ट्रपति के रूप में डोनल्ड ट्रम्प के सत्ता में आने के बाद से ही अमरीका में एकपक्षवाद की नीति को नया जीवन मिल गया। उन्होंने "अमेरिका फ़र्स्ट" का नारा लगा कर और अमरीका के हितों व लक्ष्यों को प्राथमिकता देने के साथ ही यह दावा किया कि वाॅशिंग्टन की ओर से ज़ोर-ज़बरदस्ती की नीति और सिर्फ़ अपने ही हितों के बारे में सोचने से अमरीका की ताक़त बढ़ेगी और दुनिया के एकमात्र नेता के रूप में उसकी हैसियत मज़बूत होगी। उनका यह दावा अब तक तो सिद्ध नहीं हो सका है। इस बारे में यूरोपीय संघ के विदेशी मामलों के प्रभारी जोज़ेप बोरेल ने कहा कि दुनिया पर अमरीका के राज का समय समाप्त हो रहा है और अब चीन के संबंध में उचित व ठोस नीति अपनानी चाहिए। उनका कहना है कि कोरोना, शक्ति के नए काल का आरंभ है जिसमें एशिया विशेष कर चीन, अमरीका से आगे बढ़ जाएगा।

 

बोरेल ने कहा कि टीकाकार काफ़ी पहले से अमरीका के नेतृत्व वाली विश्व व्यवस्था की समाप्ति और एशिया की सदी शुरू होने की बात कर रहे थे और अब कोरोना वायरस के फैलाव ने अमरीका की ताक़त की समाप्ति की रफ़्तार बढ़ा दी है। सच्चाई यह है कि कोरोना का फैलाव, जिसकी वजह से दुनिया में काफ़ी अहम व गहरे बदलाव आए हैं, इस प्रक्रिया को गति प्रदान कर रहा है और इस वक़्त अमरीका को अभूतपूर्व आर्थिक, सामाजिक व चिकित्सा संकटों का सामना है। इसी बात को नज़र में रख कर यूरोपीय संघ के विदेशी मामलों के प्रभारी ने कोरोना वायरस के फैलाव को, पश्चिम से पूरब की ओर ताक़त के झुकाव की राह में एक अहम मोड़ बताया है और कहा है कि यूरोपीय संघ पर यह बात निश्चित करने के लिए दबाव बढ़ रहा है कि वह किस तरफ़ रहना चाहता है।

 

एक अहम बात जिसकी ओर जोज़ेप बोरेल ने यूरोपीय संघ के विदेशी मामलों के प्रभारी की हैसियत से इशारा किया है, वही विषय है जिसके बारे में अंतर्राष्ट्रीय मैदान में अमरीका के विरोधी व समर्थक बात कर चुके हैं और जो इस समय विश्व मंच पर चर्चा का मुद्दा बन गया है। यह विषय अमरीका के पतन का है जिसके अनेक आंतरिक व बाहरी आयाम हैं। विदेश नीति के मंच पर अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने बहुत ही व्यवस्थित ढंग से बहुपक्षवाद के सभी आदर्शों व साधनों को तबाह कर दिया है और एकपक्षवाद को बढ़ावा दिया है। वे सिर्फ़ अमरीका के हितों को ही अहमियत देने पर बल दे रहे हैं जिससे अमरीका की हैसियत और उसका वैश्विक प्रभाव घट गया है। उन्होंने अहम अंतर्राष्ट्रीय समझौतों व संधियों से निकल कर बहुपक्षवाद को रौंदने की कोशिश की है।

 

ट्रम्प की सरकार शुरू में पेरिस के जलवायु समझौते से और फिर परमाणु समझौते से निकल गई। ट्रम्प की सरकार ने हथियारों पर नियंत्रण के समझौतों से निकलने को भी अपनी कार्यसूचि में शामिल कर लिया और वह मध्यम दूरी के परमाणु हथियारों के समझौते और इसी तरह ओपन स्काई संधि से निकल चुकी है, साथ ही नए स्टार्ट समझौते की समय सीमा न बढ़ाने की कोशिश में है। ट्रम्प ने अमरीका को यूनेस्को और संयुक्त राष्ट्र संघ मानवाधिकार परिषद से भी निकाल लिया है। ट्रम्प अमरीका व यूरोप और अमरीका व चीन के बीच आर्थिक युद्ध का भी कारण बन हैं। उन्होंने नेटो में अमरीका के रोल पर भी सवाल उठाए हैं। ट्रम्प के इस रवैये से अमरीका व यूरोप के बीच मतभेद काफ़ी गहरे हो गए हैं। फ़्रान्स के विदेश मंत्री लोद्रियान के शब्दों में "ट्रम्प, अमेरिका फ़र्स्ट के नारे के साथ वाइट हाउस में घुसे थे लेकिन अब उन्होंने अपने पैर ज़्यादा ही पसार लिए हैं और "ओनली अमेरिका" का नारा लगा रहे हैं। इसका मतलब यह है कि अमरीका, सभी के साथ सत्ता की जंग लड़ रहा है और हर तरह की वार्ता में सिर्फ़ अपनी श्रेष्ठता की कोशिश में है।"

 

इन हालात में अमरीका के दो मुख्य प्रतिस्पर्धियों यानी राजनैतिक व सामरिक मोर्चे पर रूस और व्यापारिक व आर्थिक मोर्चे पर चीन ने ट्रम्प के राष्ट्रपति काल में विश्व मंच पर अमरीका के रुख़ की कड़ी आलोचनाएं की हैं। अमरीका का एकपक्षवाद, जो अब भी अपने आपको श्रेष्ठ शक्ति और दुनिया का अकेला सुपर पावर समझता है और इसी भ्रम के चलते वैश्विक मामलों में दूसरों के लिए दायित्वों का निर्धारण करता है, अमरीका के ख़िलाफ़ रूस की आलोचना का सबसे अहम विषय है। चीन का भी मानना है कि ट्रम्प का एकपक्षवाद, संसार में व्यापारिक युद्ध, आर्थिक प्रगति में कमी और विभिन्न देशों में आर्थिक अराजकता का कारण बना है। (HN)

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