May ३१, २०२० १९:१८ Asia/Kolkata
  • अमरीका में प्रदर्शनों के दौरान जनरल सुलैमानी और अलमुहंदिस के फोटो,  जनरल सुलैमानी ने कैसे ट्रम्प का भविष्य खराब कर दिया? रूसी न्यूज़ एजेन्सी की एक रिपोर्ट...

 आजकल अमरीका में नस्लभेद के खिलाफ जारी प्रदर्शनों के दौरान इस देश के बहुत से युवाओं ने जनरल सुलैमानी और अबू मेहदी अलमुहंदिस की तस्वीरें उठा रखी थीं।

       ईरान के जनरल क़ासिम सुलैमानी पर हमले और हत्या को कुछ ही महीने गुज़रे थे कि अचानक कोरोना वायरस ने अमरीकी अर्थ व्यवस्था को पंगु बना दिया और दसियों लाख अमरीकी बेरोज़गार हो गये उसके बाद अब अमरीका में नस्लभेद के खिलाफ जो प्रदर्शन हो रहे हैं तो उसके दौरान अमरीकी युवा शहीद सुलैमानी और शहीद अबू मेहदी अलमुहंदिस के फोटो उठाए नज़र आ रहे हैं।

    यह बहुत कहा जाता है कि अमरीकी जनता, अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बहुत ध्यान नहीं देती। बहुत से अमरीकी तो दुनिया के नक्शे में अपना देश भी ढूंढ नहीं पाते, इराक या ईरान की बात अलग इस लिए यह बड़ी हैरत की बात है कि वह ईरान के जनरल कासिम सुलैमानी और इराक़ के स्वंय सेवी बल के कमांडर अबू मेहदी अलमुहंदिस को कैसे पहचानते हैं?

 

    सवाल यह है कि अमरीका में जिन लोगों ने शहीद क़ासिम सुलैमानी और शहीद अबू मेहदी अलमुहिंदस के फोटो उठा रखे थे उन्हें उनकी विचारधारा की भी जानकारी थी? ज़्यादा संभावना यही है कि उन्हें पता नहीं होगा लेकिन यह ज़रूर पता होगा कि ट्रम्प और उनकी नस्लभेदी टीम उनकी दुश्मन थी और उन्होंने उनकी हत्या की है इस लिए यह लोग भी अमरीकी सरकार द्वारा अत्याचार के शिकार हैं।

    अमरीका के पीड़ित 99 प्रतिशत है और अमरीका का संचालन इस देश के 1 प्रतिशत लोगों के हाथों में है। यह अमरीकी जिस तरह से लेटिन अमरीका में साम्राज्यवाद विरोधी चेग्वारा से आस्था रखते हैं उसी तरह अब वह जनरल सुलैमानी से भी आस्था रखने लगे हैं।

    अमरीका में सब कुछ पर्दे की पीछे की व्यवस्था चलाती है, बहुत से अमरीकी अरबपति एलान कर चुके हैं कि वह अपनी दौलत अपने बच्चों को विरासत में नहीं देंगे, इसके पीछे एक बहुत बड़ी वजह है। दर अस्ल इनमें से बहुत से लोग अपनी दौलत के मालिक ही नहीं हैं बल्कि वह पर्दे के पीछे रहने वाले कुछ लोगों का कारोबार चलाते हैं।

    कहा जाता है कि यही लोग अमरीकी राष्ट्रपति को भी अपने क़ाबू में रखते हैं। हालांकि ट्रम्प कभी कभी राजनीतिक दृष्टि से आतार्किक बयान दे देते हैं यार रुख अपना लेते हैं लेकिन ध्यान देने के बाद आप समझ सकते हैं कि अमरीकी राजनीति में पर्दे के पीछे की शक्तियों की यही चाहा था कि इस समय ट्रम्प जैसे किसी व्यक्ति के राष्ट्रपति बनने की आवश्यकता है।

    यह राज़ सब को मालूम है कि ट्रम्प सोशल मीडिया की मदद से अमरीका की सत्ता तक पहुंचे हैं लेकिन अब जो वह सोशल मीडिया से स्वंय ही भिड़ गये हैं तो यह निश्चित रूप से पर्दे के पीछे छुपी शक्तियों की इच्छा के अनुसार नहीं है।

 

    अब जो यह इस्राईल के प्रधानमंत्री नेतेन्याहू खुल कर कहते हैं कि ट्रम्प की उपस्थिति से फायदा उठा कर पश्चिमी तट को इस्राईल से जोड़ने का काम पूरा कर लेना चाहिए तो उनकी जल्दबाज़ी से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि अमरीका में पर्दे के पीछे की शक्तियों से संपर्क के कारण इस्राईल को यह आशंका है कि अगले राष्ट्रपति चुनाव में ट्रम्प हार सकते हैं।

    अमरीका में नस्लभेद और उस पर हिंसा व आक्रोश की घटनाएं पहले भी होती रही हैं और ओबामा भी कुछ नहीं कर पाए लेकिन यह भी सच है कि किसी ने भी ट्रम्प की तरह खुल कर प्रदर्शन कारियों को फायरिंग और मारने की धमकी नहीं दी।

    ट्रम्प के विवादस्पद ट्वीट से भी यह स्पष्ट हो गया कि ट्रम्प के लिए सत्ता में बाकी  रहना कितना कठिन हो गया है कि वह अब सारी हदें पार करके अपने देश की जनता को ही धमकाने लगे हैं।

    ट्रम्प ने दोबारा राष्ट्रपति बनने के लिए अमरीका में बेरोज़गारी में कमी और अर्थ-व्यवस्था में बेहतरी पर काफी भरोसा किया था और  इसी से उन्हें काफी उम्मीद थी लेकिन सब कुछ अब खराब हो गया है और उनके पतन की संभावना बहुत अधिक हो गयी है।

    ट्रम्प के लिए आशा की बस एक ही किरण है और वह कि फिलहाल डेमोक्रेटों के पास उन्हें टक्कर देने योग्य कोई प्रत्याशी नहीं है। Q.A.  साभार, स्पूतनिक न्यूज़ एजेन्सी

 

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