Jun ०२, २०२० ०९:१५ Asia/Kolkata
  • अब इस लम्हे से कैसे शुरू करें वास्तविक बदलाव? ओबामा ने पेश किया नुस्ख़ा, संदेह के घेरे में ट्रम्प का नेतृत्व

अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बाराक ओबामा ने एक लेख लिखा है जिसमें उन्होंने देश में मचे तूफ़ान का जायज़ा लिया है। अब यह सवाल गश्त कर रहा है कि इस समय वास्तविक बदलाव के जारी क्रांति का ज़ोर इसी तरह कैसे क़ायम रखा जाए?

मीडियम वेबसाइट पर अपने लेख में ओबामा ने लिखा कि आख़िरकार इस तरह के गंभीर हालात के लिए रणनीतियां बना ली जाएंगी लेकिन मेरा मानना है कि अतीत में जो संघर्ष हुए हैं उनसे भी कुछ पाठ लेने की ज़रूरत है।

प्रदर्शनों की यह लहरें साबित करती हैं कि एक वास्तविक और जायज़ निराशा मौजूद है जिसकी वजह कई दशकों के दौरान पुलिस के बर्ताव और न्याय व्यवस्था में सुधार की कोशिशों का नाकाम रहना है। प्रदर्शनों में शामिल लोगों में अधिकतर शांति प्रेमी, साहसी और सम्मानजनक लोग हैं।

दूसरी ओर कुछ संख्या उन लोगों की भी है जो हिंसा का रास्ता अपनाते हैं और वह पूरे प्रकरण को अलग रंग दे देते हैं।

मैंने कई प्रदर्शनकारियों को यह कहते सुना कि न्यायिक व्यवस्था में बार बार नस्लवादी भेदभाव देखने में आ रहा है और इसे केवल प्रदर्शनों से ही सुधारा जा सकता है राजनैतिक प्रक्रिया का हिस्सा बनकर सुधार की उम्मीद करना समय नष्ट करना है

मगर सच्चाई यह है कि वास्तविक बदलाव के लिए प्रदर्शनों और राजनीति में से किसी एक विकल्प को चुनना सही नहीं बल्कि दोनों विकल्पों को एक साथ लेकर आगे बढ़ने की ज़रूरत है।

हालिया महीने बहुत कठिन और निराश कर देने वाले थे। कोरोना वायरस की महामारी ने जो ख़ौफ़, दुख, शक और कठिनाइयां पैदा की हैं वह सब पीछ रह गईं जबकि यह घटनाएं सबसे ऊपर आ गई हैं यानी हमें एहसास दिलाती हैं कि अत्याचार और भेदभाव अब भी अमरीकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा हिस्सा हैं।

हर समुदाय और हर नस्ल के युवाओं को चाहिए कि शांतिपूर्ण गतिविधियां स्थायी रूप से आगे बढ़ाएं ताकि वास्तविक बदलाव लाया जा सके।

ओबामा के इस लेख पर यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि इस पूरे प्रकरण में ट्रम्प का रवैया विपक्ष के  नेताओं जैसा है। ट्रम्प इस समय देश की बागडोर नहीं संभाल रहे हैं बल्कि विपक्षी नेताओं की तरह सरकार से अपनी मांगें मनवाने के लिए हालात ख़राब कर रहे हैं।

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