Jun ०३, २०२० २०:०५ Asia/Kolkata
  • इस वजह से लोग ट्रम्प को कह रहे हैं मुआविया! लंदन के समाचार पत्र की रोचक रिपोर्ट

लंदन से प्रकाशित होने वाले अरबी समाचार पत्र रायुलयौम ने लिखा है कि  सोशल मीडिया पर अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प को इस्लामी इतिहास के शासक मुआविया की तरह बता रहे हैं।

अमरीका में हालात खराब हैं और प्रदर्शन हिंसक हो गये हैं और रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं, इसी दौरान अमरीकी राष्ट्रपति चर्च गये और चर्च के सामने ईसाइयों के पवित्र ग्रंथ, बाइबल को उठा कर प्रदर्शनकारियों को कड़े कदम की धमकी दी जिसके बाद सोशल मीडिया पर ट्रम्प के इस क़दम पर बहस छिड़ गयी है। कुछ लोग इसे आस्था कह रहे हैं तो कुछ लोग इसे उन तानाशाहों का काम बता रहे हैं जो मुश्किल में धर्म की आड़ लेने में भी संकोच नहीं करते और इस तरह से जनता की धार्मिक भावनाओं से फायदा उठाते हैं।

    राजनीति के प्रोफेसर डाक्टर हसन नाफे कहते लिखते हैं कि जब ट्रम्प जैसे अधर्मी, व्यापारी  और भेदभाव मे डूबे नेता हाथ में बाइबल लेकर वाइट हाउस के बगल में बने चर्च में जाते हैं तो उसे धर्म में आस्था का नाम बिल्कुल नहीं दिया जा सकता, न ही उसे अमरीकी जनता को एकजुट करने की कोशिश कहा जा सकता है, यह तो बस धर्म का नाम लेकर राजनीतिक लक्ष्यों को पूरा करने की एक आलोचनीय कोशिश है ताकि इस तरह से वह ईसाइयों का समर्थन प्राप्त करके दोबारा राष्ट्रपति पद तक की राह आसान बना लें। उन्होंने लिखा कि मेरा ख्याल है कि वह सफल नहीं होंगे या कम से कम मुझे उम्मीद यही है कि वह सफल न हों।

 

    अरब जगत में मशहूर लेखक बेलाल फज़्ल ने बाइबल हाथ में लिये ट्रम्प की फोटो पोस्ट करके ट्वीट किया कि सत्य मज़बूत और असत्य डगमगाता रहता है, धर्म में आस्था रखने वाले राष्ट्रपति डोनाल्ड पुत्र अबू सुफियान।

उन्होंने वास्तव में मिस्र के दिंवगत राष्ट्रपति मुहम्मद मुरसी के उस बयान की ओर संकेत किया है जिसमें उन्होंने हज़रत अली अलैहिस्सलाम और मुआविया के बीच युद्ध के दौरान कुरआन को भालों पर उठाने का उल्लेख किया था।

     अब्बास महमूद ओक़ाद ने लिखा है कि मुआविया से अम्र आस ने पूछाः हे आस्थावानो के सरदार! आप बहादुर हैं या बुज़दिल?

     तो मुआविया ने कहा कि अगर अवसर मिला तो बहादुर हूं और अगर अवसर नहीं मिला तो  बुज़दिल, सद्दाम, हिटलर और अर्दोगान, मिस्र के प्रसिद्ध शायर हाथ में पवित्र ग्रंथ लिये तीनों के फोटो पोस्ट करके लिखा है कि निशब्द! फोटो खुद ही बोल रहा है।

ट्रम्प राजनीतिक लाभ के लिए बाइबल उठा रहे हैं।

याद रहे इस्लामी इतिहास के अनुसार जब हज़रत अली अलैहिस्सलाम को मुसलमानों ने अपना चौथा खलीफा बनाया तो तीसरे खलीफा द्वारा शाम और वर्तमान सीरिया के गर्वनर मुआविया पुत्र अबु सुफयान ने उन्हें अपना खलीफा मानने से इन्कार कर दिया और बहुत सी घटनाओं के बाद दोनों पक्षों में युद्ध हुआ लेकिन जब युद्ध में मुआविया की हार होने लगी तो उसने अपने सलाहकार अम्र बिन आस के कहने पर आदेश दिया और उसके सैनिकों ने भालों पर कुरआन उठा कर यह नारा लगाना शुरु कर दिया कि हमारे बीच कुरआन से फैसला होगा तलवार से नहीं! उनकी यह बात सुन कर हज़रत अली के बहुत से सैनिक धोखे में आ गये और कहने लगे कि हम सब मुसलमान हैं तो फिर कुरआन से ही फैसला होगा।

     आज अरब जगत में ट्रम्प को मुआविया के नाम से याद किया जा रहा है क्योंकि वह भी मुआविया की तरह धूर्तता के साथ पवित्र किताब को इस्तेमाल कर रहे हैं। Q.A.

 

 

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