Jul २६, २०२० १९:०१ Asia/Kolkata

क़ुरआन के सूरए बक़रह की आठवीं आयत का अनुवाद हैः लोगों का एक गुट कहता है कि हम ईश्वर तथा प्रलय पर ईमान ले आए हैं जबकि वे ईमान नहीं लाए हैं।

क़ुरआन जो कि ईश्वर की ओर से मार्गदर्शन की किताब है हमें ईमान वालों, काफ़िरों तथा मुनाफ़िक़ों अर्थात मिथ्याचारियों की विशेषताएं बताती है ताकि हम स्वयं को पहचानें कि हम किस गुट में हैं और अन्य लोगों को भी पहचान सकें तथा उनके साथ उचित व्यवहार कर सकें।

बहरहाल मिथ्याचार और रंग बदलना ऐसी समस्या है जिसका सभी क्रांतियों एवं सामाजिक परिवर्तनों को सामना करना पड़ता है इसीलिए हमें कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि जो कोई अपने आप को ईमान वाला बताए उसके दिल में ईमान अवश्य होगा। ऐसे लोग बहुत हैं जो ऊपर से इस्लाम पर विश्वास दिखाते हैं परन्तु भीतर से उसकी जड़ें काटते हैं।

इस आयत से हमें पता चलता है कि ईमान एक आंतरिक वस्तु है न कि ज़बानी अतः हमें केवल लोगों की बातों से ही संतुष्ट नहीं हो जाना चाहिए।

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