Aug ०४, २०२० ०९:५२ Asia/Kolkata
  • वीगर मुसलमानों का तकनीकी नरसंहार, दिल दहला देने वाले आंकड़े, भारतीय मुसलमानों को सबक़ लेने की ज़रूरत, वरना बहुत देर हो चुकी होगी

चीन के शिनजियांग राज्य में शांति प्रिय वीगर या उइगर मुसलमानों के ख़िलाफ़ अत्याचार की दो ऐसी घटनाएं घटी हैं, जो दुनिया को झकझोर कर रख सकती हैं।

पहली वह आधिकारिक रिपोर्ट है, जिसमें योजनाबद्ध तरीक़े से वीगर मुस्लिम महिलाओं की नसबंदी के दस्तावेज़ मौजूद हैं। दूसरी अमरीकी कस्टम और सीमा सुरक्षा अधिकारियों द्वारा ज़ब्त किए गए 13 टन इंसानों के बाल हैं, जो प्रताड़ना शिविरों में क़ैद करके रखे गए वीगर मुसलमानों के हैं और जिनके जबरन काटे जाने का संदेह है।

दोनों ही घटनाएं अल्पसंख्यक वीगर मुसलमानों पर हो रहे अत्यंत अत्याचारों को दर्शा रही हैं, जिनका पिछले एक दशक से व्यवस्थित नरसंहार जारी है।

चीन ने नरसंहार कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें किसी एक समूह के सदस्यों के ख़िलाफ़ विशेष कृत्यों को नरसंहार के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसमें से उस समूह को पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से नष्ट करने का प्रयास शामिल है।

इन कृत्यों में शामिल हैः (a) हत्या, (b) गंभीर शारीरिक या मानसिक नुक़सान, (c) समूह के विनाश के लिए परिस्थितियां उत्पन्न करना (d) समूह में प्रजनन को रोकने के उपाय करना (e) समूह के बच्चों को जबरन दूसरे समूहों में स्थानांतरित करना। इनमें से कोई भी एक कृत्य, नरसंहार का कारण बन सकता है। चीन सरकार द्वारा वीगर समुदाय के जानबूझकर और व्यवस्थित नरसंहार के प्रयासों के प्रमाण इनमें से प्रत्येक कृत्य से स्पष्ट रूप से मिलते हैं।

तुर्क मूल के 10 लाख से ज़्यादा वीगर मुसलमानों को प्रताड़ना शिविरों में क़ैद करके रखा गया है और कारख़ानों में उनसे जबरन काम लिया जाता है। उनके साथ दुर्व्यवहार, उन पर अत्याचार, उनका बलात्कार और यहां तक ​​कि उनकी हत्याएं एक सामान्य बात है। उन्हें करंट लगाया जाता है, वाटरबोर्डिंग और मारपीट की जाती है, और अज्ञात पदार्थों के इंजेक्शन दिए जाते हैं।

सरकार लगातार उनके वंश को तोड़ने, उनकी जड़ों को काटने, उनके रिश्तों को ख़त्म करने और उनकी मूल पहचान को मिटा देने के आदेश दे रही है। व्यवस्थित रूप से वीगरों के प्रजनन को रोकना इस पूरे समुदाय को मिटाने की कोशिश का स्पष्ट सुबूत है।

2017 में चीनी सरकार ने शिनजियांग में जन्म दर को नियंत्रित करने के लिए एक विशेष क्रूर अभियान चलाया। 2019 तक सरकार ने दक्षिणी शिनजियांग में बच्चे को जन्म देने में सक्षम 80 प्रतिशत से अधिक महिलाओं की नसबंदी करने या उनके गर्भाशय में विशेष उपकरण (आईयूडी) रखने की योजना बनाई। लक्ष्य, जन्म की दर को शून्य तक पहुंचाना है।

इस योजना को लागू करने के लिए शिनजियांग की स्थानीय सरकार ने बहुत ही जटिल जांच प्रक्रिया को अपनाया, ताकि बच्चे को जन्म देने की उम्र की महिलाओं का शिकार किया जा सके।

एक बार पकड़ में आ जाने के बाद, इन महिलाओं के पास नज़रबंदी शिविर में भेजे जाने से बचने के लिए नसबंदी कराने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता है। वीगर महिलाओं को इंजेक्शन दिए जाते हैं और अगर वे गर्भवति हैं तो जबरन उनका गर्भपात कराया जाता है।

आंकड़े बताते हैं कि चीनी सरकार जन्म की रोकथाम के लक्ष्यों को पूरा कर रही है। 2015 और 2018 के बीच, वीगर मुसलमानों की जनसंख्या वृद्धि दर में 84 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई। 2017 और 2018 के बीच, इस इलाक़े में बांझ या विधवा महिलाओं की संख्या में क्रमशः 124 और 117 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 2018 में पूरे चीन में कुल आईयूडी प्लेसमेंट का 80 प्रतिशत केवल शिनजियांग में किया गया, जबकि वहां की आबादी देश की कुल आबादी का मात्र 1.8 प्रतिशत है।

इन उपकरणों को केवल सरकार की अनुमति के बाद ही सर्जरी करके हटाया जा सकता है, उल्लंघन करने पर जेल की सलाख़ों के पीछे धकेल दिया जाएगा। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 2019 में काशगर में, सिर्फ़ 3 प्रतिशत विवाहित महिलाओं ने बच्चों को जन्म दिया।

प्रताड़ना शिविरों में रखे जाने वाले वीगर पुरुषों और महिलाओं की नसबंदी की गई। पैदा होने वाले वीगर बच्चों में से कम से कम पांच लाख बच्चों को उनके परिवारों से अलग रखा गया है। उन्हें सरकार के तथाकथित "बच्चा आश्रय आश्रमों" में बड़ा किया जा रहा है।

तकनीक के इस्तेमाल ने इस नरसंहार को अधिक जटिल और ख़तरनाक बना दिया है। अगर विश्व समुदाय ने इस पर ध्यान नहीं दिया तो वह समय दूर नहीं, जब वीगर समुदाय का दुनिया से नाम व निशान ही मिट जाएगा।

भारत में भी आरएसएस जैसे दक्षिणपंथी हिंदुत्ववादी संगठन पिछली एक शताब्दी से मुसलमानों के नरसंहार का सपना देख रहे हैं। 2014 में केन्द्र में प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार बनने के बाद, उन्हें अपना यह सपना साकार होता नज़र आ रहा है। इसी उद्देश्य से सीएए और एनआरसी जैसे क़ानून लाए जा रहे हैं और देश भर में दर्जनों प्रताड़ना शिविरों का निर्माण किया जा रहा है। इसलिए अगर मुसलमान अभी नहीं जागे और होश में नहीं आए तो बहुत देर हो चुकी होगी और फिर पछताने का भी वक़्त नहीं मिलेगा। -foreignpolicy.com- ‎ msm

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