Aug ०६, २०२० २१:५१ Asia/Kolkata
  • विस्फोटक पदार्थ बैरूत ले जाने वाले जहाज़ के अधिकारी ने सुनाई इस अभिषप्त खेप की दास्तान

बैरूत में होने वाले महाविनाशकारी धमाके की वजह अमोनियम नाइट्रेट की वह खेप थी जो एक विदेशी जहाज़ से ज़ब्त की गई थी। रशा टुडे ने इस जहाज़ के कर्मी दल के एक अधिकारी से इस बारे में बात की।

एमवी रोज़स नाम के जहाज़ को बैरूत में रोक लिया गया था और उस पर लदी अमोनियम नाइट्रेट की खेप ज़ब्त कर ली गई थी। यह मालवाहक जहाज़ सितम्बर 2013 में तकनीकी समस्या उत्पन्न हो जाने के कारण बैरूत की बंदरगाह पर रुका था मगर फिर उसे वहां से आगे जाने की अनुमति नहीं मिली।

जहाज़ मोलदावा के फ़्लैग के साथ सफ़र कर रहा था और इसके कर्मीदल में शामिल लोग मुख्य रूप से यूक्रेन और रूस के थे। कर्मीदल के लोगों से मिली जानकारी के अनुसार जहाज़ में बहुत सारी समस्याएं थीं। इसमें खाने पीने की चीज़ें रखने के लिए रेफ़रीजरेटर तक नहीं था। यह जहाज़ टेटो शिपिंग कंपनी का था और जब भी बंदरगाह से इसके बारे में शिकायत होती तो कंपनी जहाज़ की समस्याएं दूर करने के बजाए रिश्वत देकर काम चलाने की कोशिश करती थी।

बैरूत में रोके जाने से पहले स्पेन में इसे दो हफ़्ते तक रोका गया था। वहां बंदरगाह के अधिकारियों ने जहाज़ की मालिक कंपनी पर दबाव डालकर इसमें बैकअप जनरेटर लगवाया था।

2013 में इस जहाज़ ने जार्जिया से अमोनियम नाइट्रेट की 2750 टन की खेप उठाई और उसे मोज़ाम्बीक ले जा रहा था मगर टेक्निकल कारणों से इसे बैरूत में रोक लिया गया।

इसके बाद जहाज़ की मालिक कंपनी ने ख़ुद को दीवालिया घोषित कर दिया। जहाज़ के कप्तान और चार अन्य कर्मियों को गिरफ़तार कर लिया गया और 11 महीने बाद छोड़ा गया। कप्तान बोरिस प्रोकोशेव ने जहाज़ की मालिक कंपनी के ख़िलाफ़ 2014 में एक याचिका दायर की जिसमें उन्होंने कहा कि कर्मी दल को बग़ैर तनख़्वाह और बग़ैर खाने पीने के बेसहारा छोड़ दिया गया।

कप्तान का कहना था कि बैरूत बंदरगाह के अधिकारी उसे छोड़ सकते थे, जो भी फ़ैसला किया गया वह अच्छा नहीं था। जहाज़ से जुड़े एक व्यक्ति का कहना था कि इस पर लदी खेप उतार ली गई और उसे बंदरगाह के भंडार में रख दिया गया और इतने साल तक इसे वहीं रखा गया जबकि इस खेप को पानी में डाल कर नष्ट कर दिया जाना चाहिए था। कप्तान ने कहा कि जहाज़ में एक छेद था जिससे पानी भर जाता था और हम पानी बाहर निकालते थे अगर सामान ज़ब्त न किया गया होता तो जहाज़ डूब जाता और इतनी बड़ी तबाही न होती।

सुरक्षा अधिकारियों को ख़तरे का आभास था लेकिन ग्राउंड पर जो अधिकारी थे उन्हें शायद मामले की गंभीरता का पूरी तरह अनुमान नहीं था। हालांकि 2001 में तूलूज़ और 1947 में टेक्सास में इसी पदार्थ से भयानक तबाही हो चुकी है।

इस बीच यह ख़बरें आ रही हैं कि कुछ अधिकारियों ने इस खेप के क़रीब ही पटाखों की एक खेप रखवा दी और वहां वेल्डिंग का काम भी करवाया गया और नतीजा यह हुआ कि इतनी बड़ी तबाही हो गई।

स्रोतः रशा टुडे

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