Aug ०९, २०२० १३:५२ Asia/Kolkata
  • पाकिस्तान ने सऊदी अरब को लौटाए 1 अरब डॉलर, दोनों देशों के बीच तनाव का क्या है कारण?

आज कल पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इधर कुछ दिनों से पाकिस्तान के विदेश मंत्री लगातार भारत प्रशासित कश्मीर में मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार के ख़िलाफ़ आले सऊद की चुप्पी की कड़े शब्दों में आलोचना कर रहे हैं। इस बीच पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने सऊदी अरब को एक अरब डॉलर वापस किए जाने की भी सूचना दी है।

समाचार एजेंसी तसनीम की रिपोर्ट के मुताबिक़, पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा है कि, विपक्षी पार्टियां उनके द्वारा सऊदी अरब और कश्मीर के लोगों के संबंध में दिए गए बयान पर आपत्ति व्यक्त कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि ऐसे लोग कश्मीर मामले को सही से समझे ही नहीं हैं। शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि कश्मीर कोई ऐसा विषय नहीं है कि जिसपर राजनीति की जाए। उन्होंने विपक्षी पार्टियों से अपील की कि वह कश्मीर संकट को सही से समझें। पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा कि, हमारे सऊदी अरब के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं, लेकिन उनको यह समझना होगा कि कश्मीर मुद्दा हमारे लिए कितना महत्व रखता है। क़ुरैशी ने कहा कि आले सऊद शासन को भी कश्मीर की समस्या के समाधान को लेकर अपने कर्तव्यों को समझना चाहिए।

शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि, हमारा यह कर्तव्य बनता था कि हम कश्मीर मामले को सभी अंतर्राष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाएं और हमने इस काम को अंजाम भी दिया। हलांकि हमे इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी), कि जिसका नेतृत्व सऊदी अरब करता है, से जिस तरह की उम्मीद थी वह उन उम्मीदों पर खरी नहीं उतरा। तहरीके इंसाफ़ पार्टी के उपाध्यक्ष ने कहा कि अगर सऊदी अरब के अधिकारी इस बात को समझ पाते कि कश्मीर का विषय कितना महत्वपूर्ण है तो वह इसको गंभीरता से लेते हुए ओआईसी की बैठक बुलाकर कश्मीर समस्या के समाधान पर चर्चा करते। क़ुरैशी कश्मीर के मुद्दे पर सऊदी अरब की दृश्टिकोण से बहुत आहत हुए हैं और यही कारण है कि उन्होंने कश्मीर विषय पर समर्थन प्राप्त करने के लिए एक नए गठबंधन की बात की है। इस बीच पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा कि हमने सऊदी अरब को एक अरब डॉलर वापस लौटा दिए हैं। उन्होंने कहा कि हमे इस बात का एहसास है कि तेल की क़ीमतों के नीचे आने से सऊदी अरब में कितना आर्थिक संकट आ गया है। याद रहे कि सऊदी अरब का आले सऊदी शासन भारत के साथ अपने साझा हितों के कारण कश्मीरी जनता और भारतीय मुसलमानों पर लगातार होते अत्याचारों के बारे में बात करने से हिचक रही है। (RZ)

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