Aug २१, २०२० १२:४४ Asia/Kolkata
  • कोरोना को लेकर नई बात आई सामने, अपने घरों को घातक वायरस से कैसे रखें सुरक्षित?

भारतीय और जर्मन शोधकर्ताओं का कहना है सूखे कमरे और वातानुकूलित जगहों पर कोरोना वायरस ज़्यादा फैलता है। शोधकर्ता इमारतों के अंदर और सार्वजनिक यातायात के लिए हवा में नमी के आदर्श मानक को स्थापित करने के लिए कह रहे हैं।

एक भारतीय-जर्मन शोध टीम ने कहा है कि तुलनात्मक नमी यानी हवा में नमी घरों के अंदर वायरसों के प्रसार पर "मज़बूत असर" डालती है, विशेष रूप से सूखे कमरों में। शोधकर्ता टीम हाल में हुए 10 अंतर्राष्ट्रीय अध्ययनों का मूल्यांकन कर इस नतीजे पर पहुंची है। शोधकर्ताओं की रिपोर्ट एच1 एन1 और एमईआरएस-कोव जैसे नए कोरोना वायरस से मिलते जुलते वायरसों पर पहले हुई जांचों के नतीजों पर भी आधारित है। इस रिपोर्ट के अनुसार, "इमारतों के अंदर कोविड-19 के हवा के ज़रिए प्रसार में नमी की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण लगती है।" रिपोर्ट में यह अनुशंसा भी की गई है कि सार्वजनिक इमारतों के अंदर नमी कम से कम 40 प्रतिशत और अधिकतम 60 प्रतिशत होनी ही चाहिए जिससे की वहां रहने वालों के लिए वायरस के प्रसार के जोखिम को कम किया जा सके। इस टीम का नेतृत्व भारत के सेंटर फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च के डॉक्टर सुमित कुमार मिश्रा और जर्मनी के लीबनीज़ इंस्टीट्यूट फॉर ट्रोपोस्फियरिक रिसर्च के डॉक्टर अल्फ्रेड वाइडेनसोलर और डॉक्टर अजीत अहलावत कर रहे थे।

हवा में नमी कैसे प्रसार पर असल डालती है?

शोधकर्ताओं की रिपोर्ट में आया है कि हवा में नमी वायरस के प्रसार में तीन तरह से मदद करती है: बूंदों का आकार, वायरस वाले एयरोसोल कैसे घंटों तक हवा में तैरते रहते हैं और सतहों पर गिरने के बाद भी वायरस ज़िन्दा रहता है। ज़्यादा नमी वाली जगहों पर वायरस वाली बूंदों का आकार बढ़ता है और वो जल्दी गिर जाती हैं। इस से "दूसरे लोगों के सांस के ज़रिए संक्रामक वायरल बूंदों को अंदर लेने की संभावना घट जाती है।" लेकिन कमरों के अंदर की रूखी हवा में भाप की वजह से छोटी हो चुकी बूंदें हल्की हो जाती हैं और हवा में तैरती रहती हैं। रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है कि "दूसरे लोगों के वायरस को सांस के ज़रिए अंदर लेने या सतहों पर बैठ जाने का सर्वोत्त्कृष्ट रास्ता है।" सतहों पर वायरस कई दिनों तक ज़िन्दा रह सकते हैं। शोध टीम का कहना है कि कमरों के अंदर तुलनात्मक नमी को 40 से 60 प्रतिशत के बीच रखने से नाक के द्वारा वायरस को सोख लेने का जोखिम भी कम होता है। डॉक्टर अहलावत का कहना है कि, "रूखी हवा हमारी नाक में म्यूकस की झिल्लियों को भी रूखी और वायरसों के लिए प्रवेश के योग्य बनाती है।"

खतरे की संभावना

डॉक्टर वाइडेनसोलर ने चेतावनी दी है कि उत्तरी गोलार्ध में आने वाली सर्दियां गर्म किए हुए कमरों में "करोड़ों लोगों" के लिए ज़्यादा जोखिम ले कर आ सकती हैं, क्योंकि वातानुकुलीत उपकरण ठंडी हवा को कमरों के अंदर खींच लेते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस हवा को आरामदायक तापमान तक गर्म करने से "कमरों के अंदर की तुलनात्मक नमी या आरएच के स्तर को काफ़ी नीचे ले आएगी, जिससे वहां रहने वाले लोगों के लिए अत्यंत ख़तरनाक स्थिति उत्पन्न हो सकती है, विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के दौरान।" सिंगापुर और मलेशिया में हुए अध्ययनों का हवाला देते हुए, इन शोधकर्ताओं ने ट्रॉपिकल स्थानों के निवासियों को "अत्यंत ठंडा करने वाले उपकरणों" से बचे रहने की चेतावनी दी क्योंकि उनकी वजह से कमरों के अंदर जो रूखी हवा आएगी वो कोविड-19 के प्रसार में सहायक होगी।" अंत में, टीम ने कहा कि मानकों को सामयिक बनाने में इमारतों के निरीक्षकों और सरकारों की "अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका" होगी। सीएसआईआर के सुमित मिश्रा ने कहा, "अधिकारियों को भविष्य के दिशानिर्देशों में नमी को शामिल कर लेना चाहिए।" रिपोर्ट में कहा गया कि इससे "कोविड-19 का ही नहीं बल्कि भविष्य में होने वाले वायरल के प्रकोप का असर भी कम होगा।" फिलहाल के लिए, टीम के अनुसार, मास्क पहनने के अलावा, "सामाजिक दूरी बनाए रखनी चाहिए, और एक कमरे में जितने कम लोग हो सकें उतना अच्छा।" (RZ)

 

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