Aug २५, २०२० २०:३९ Asia/Kolkata
  • रूस के विपक्षी नेता को ज़रह दिए जाने को लेकर विरोधाभासी बातें आई सामने, जर्मन डॉक्टरों के बयान से मचा हड़कंप

रूस के विपक्षी नेता अलेक्सी नावाल्नी का बर्लिन में इलाज कर रहे डॉक्टरों ने उन्हें ज़हर दिए जाने की पुष्टि की है। नावाल्नी के जर्मनी भेजे जाने से पहले रूसी डॉक्टरों ने उनके शरीर में किसी भी तरह के ज़हर ना मिलने की बात कही थी।

44 वर्षीय अलेक्सी नावाल्नी को शनिवार, 22 अगस्त को जर्मनी ले जाया गया है। इससे पहले रूस में उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों का कहना था कि सुबह से कुछ ना खाने के कारण उनके शरीर में शुगर की मात्रा कम होने से वे बेहोश हो गए थे। वहीं नावाल्नी की प्रवक्ता ने आरोप लगाया है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के अन्य विरोधियों की तरह नावाल्नी को भी ज़हर दिया गया है। अब जर्मन की राजधानी बर्लिन के मशहूर शारिटे अस्पताल ने ज़हर दिए जाने की बात की पुष्टि कर दी है। अपने बयान में अस्पताल ने लिखा है कि नावाल्नी पर हुए टेस्ट दिखाते हैं कि "कोलेनेस्टरेज इनहिबिटर्स ग्रुप के किसी रसायन" के ज़रिए उन्हें जहर दिया गया है। कोलेनेस्टरेज एक एंज़ाइम है जिसकी ज़रूरत शरीर के तंत्रिका तंत्र को होती है। इसके इनहिबिटर ऐसे तत्व होते हैं जो इसके काम में अवरोध पैदा करते हैं। ऐसा कुछ दवाओं में, कीटनाशकों में और सरीन जैसे नर्व एजेंट में पाया जाता है।

याद रहे कि कोलेनेस्टरेज इनहिबिटर्स के कारण नसें मांसपेशियों तक ठीक तरह संदेश नहीं भेज पाती हैं। दोनों के बीच तालमेल रुक जाने की स्थिति में मांसपेशियां काम करना बंद कर देती हैं। ऐसे में सांस लेने के लिए ज़रूरी मांसपेशियां भी असक्रिय हो जाती हैं और सांस ना ले पाने के कारण इंसान बेहोश हो जाता है। इसका सीधा असर दिमाग़ पर भी पड़ता है। ज़्यादातर मामलों में घुटन से या फिर दिल का दौरा पड़ने से मौत हो जाती है। ज़हर किस तरह से काम करेगा यह इस पर भी निर्भर करता है कि ज़हर किस तरह दिया गया है, अगर खाने में मिला कर दिया जाए तो व्यक्ति सबसे पहले बेहोश हो जाता है और फिर बेहोशी में ही सांस ना आने से जान चली जाती है। इससे पहले गुरुवार, 20 अगस्त को नावाल्नी की फ्लाइट में हालत इतनी ख़राब हुई कि प्लेन को इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। रूसी डॉक्टरों ने कहा कि उन्हें ज़हर नहीं दिया गया, लेकिन फिर उन्हें इलाज के लिए जर्मनी ले जाया गया और वहां के डॉक्टरों ज़हर दिए जाने का दावा किए जाने के बाद रूस सहित पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया। बर्लिन में उनका इलाज कर रहे शारिटे अस्पताल ने ट्वीट कर कहा है कि नावाल्नी की हालत के बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता और "नर्वस सिस्टम पर लॉन्ग टर्म इफेक्ट" की संभावना को खारिज भी नहीं किया जा सकता।

नावाल्नी फिलहाल आईसीयू में कोमा में हैं। शारिटे अस्पताल के अनुसार "उनकी हालत गंभीर है लेकिन फिलहाल जान को ख़तरा नहीं है।" इस तरह के ज़हर का इलाज करने के लिए मरीज़ को दवा दे कर कोमा में भेजा जाता है। यह एक बेहद पेचीदा तरीक़ा है जिसमें कई दिनों या कई हफ्तों का समय लग सकता है, लेकिन जितना ज़्यादा वक़्त लगेगा ज़हर के असर को ख़त्म करना उतना ही मुश्किल भी हो जाएगा। वहीं जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल ने कड़े शब्दों में रूस से इस मामले की जांच करने को कहा है। जर्मनी के विदेश मंत्री हाइको मास के साथ साझा बयान में उन्होंने रूस से "पूरी पारदर्शिता के साथ" जांच करने की मांग है। अंगेला मैर्केल ने कहा, "जो भी ज़िम्मेदार है उसकी पहचान की जाए और उसे दोषी ठहराया जाए।" वहीं यूरोपीय संघ ने भी रूस से "स्वतंत्र और पारदर्शी जांच" की मांग की है। (RZ)

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