Aug २९, २०२० ११:४३ Asia/Kolkata
  • पाकिस्तान की सरकार ने एफ़एटीएफ़ संबंधी बिल पास कराने के लिए संसद की संयुक्त बैठक बुलाने का फ़ैसला किया

पाकिस्तान की सरकार ने कहा है कि वह फ़ाइनैंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (एफ़एटीएफ़) से संबंधित दो बिल सेनेट से ख़ारिज होने के बाद अब संसद की संयुक्त बैठक बुलाने पर विचार कर रही है ताकि यह अहम क़ानून बनाया जा सके।

पाकिस्तान की संसद के ऊपरी सदन सेनेट में विपक्ष का बहुमत है और क़ौमी असेमबली में पास होने वाले दो बिल सेनेट ने ख़ारिज कर दिए थे। संसदीय मामलों में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के सलाहकार बाबर आवान ने संसद सभापति असद क़ैसर से टेलीफ़ोन पर बात करते हुए संसद की आगामी संयुक्त बैठक के एजेंडे के बारे में बात की और कहा कि देश को आतंकी गुटों की आर्थिक सहायता करने वाले देशों की ग्रे लिस्ट से बाहर निकालने के लिए इन बिलों की मंज़ूरी ज़रूरी है। संसद की संयुक्त बैठक की स्थिति में विपक्ष केवल 9 वोटों से आगे होगा लेकिन सरकार को आशा है कि वह बैठक में दोनों बिल पास करा लेगी।

 

सेनेट से यह दोनों बिल ख़ारिज होने पर प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा था कि विपक्ष के नेता संसद को काम करने से रोकने की कोशिश करके अपना भ्रष्टाचार का पैसा बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने पहले कोरोना के ख़िलाफ़ सरकार की प्रभावी नीति को कमज़ोर बनाया और अब एफ़एटीएफ़ की ग्रे लिस्ट से पाकिस्तान को बाहर निकालने की सरकार की कोशिश को नाकाम बनाना चाहता है।

 

इससे पहले पाकिस्तान के एक न्यायालय ने जमातुद्दावा के तीन नेताओं को जेल भेजने का फ़ैसला सुनाया था। इस गुट पर भारत और अमरीका ने सन 2008 में मुंबई में हुए धमाके में शामिल होने के आरोप लगाए थे। पाकिस्तान के लिए सितम्बर का महीना फ़ाइनैंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (एफ़एटीएफ़) की ओर से ब्लैकलिस्ट किए जाने से बचने का आख़िरी मौक़ा है। इस लिए जमातुद्दावा के तीन नेताओं को जेल भेजने के फ़ैसले को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। (HN)

 

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