Sep १९, २०२० १३:५२ Asia/Kolkata
  • यूरोपीय तिकड़ी ने अमेरिका की साज़िश पर फेरा पानी, ईरान पर नहीं लगेगा प्रतिबंध, अमेरिकी कार्यवाही की कोई क़ानूनी हैसियत नहीं

यूरोपीय देशों की तिकड़ी के नाम से मशहूर जर्मन, फ्रांस और ब्रिटेन ने अमेरिका को एक ज़ोरदार झटका देते हुए सुरक्षा परिषद को एक साझा पत्र भेजकर कहा है कि परमाणु समझौते के अनुसार ईरान पर प्रतिबंधों का निलंबन 20 सितंबर के बाद जारी रहेगा और ईरान के ख़िलाफ प्रतिबंधों की वापसी के लिए की जाने वाली किसी भी तरह की कार्यवाही की कोई क़ानूनी हैसियत नहीं होगी।

रोयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, यूरोपीय देशों की तिकड़ी ने सुरक्षा परिषद को लिखे अपने पत्र के माध्यम से यह एलान किया है कि ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते के अनुसार, इस देश पर प्रतिबंधों का निलंबन 20 सितंबर के बाद भी जारी रहेगा। सुरक्षा परिषद को लिखे अपने ख़त में इन तीनों यूरोपीय देशों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वे जेसीपीओए के प्रति कटिबद्ध हैं। जर्मन, फ्रांस और ब्रिटेन में अपने पत्र के ज़रिए यह भी साफ कह दिया है कि ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंध वापस लाने की किसी भी तरह की कार्यवाही की कोई क़ानूनी हैसियत नहीं होगी। सुरक्षा परिषद को लिख पत्र में आया है कि प्रतिबंधों को वापस लागू करने के लिए किसी भी तरह की कार्यवाही 2006 के प्रस्ताव 1696, 2006 के प्रस्ताव 1737, 2007 के प्रस्ताव 1747, 2008 के प्रस्ताव 1803, 2008 के प्रस्ताव 1845 और 2010 के प्रस्ताव 1929 के अनुसार उसकी कोई क़ानूनी हैसियत नहीं होगी।

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिका द्वारा ईरान के ख़िलाफ़ ट्रिगर मेकेनिज़म का इस्तेमाल करके यूएनओ के सभी प्रतिबंधों को दोबारा लगाए जाने के दावे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कह चुके हैं कि, संयुक्त राष्ट्र संघ जेसीपीओए के बारे में सुरक्षा परिषद के दृष्टिकोण के अनुसार अमल करेंगे। इस बीच जानकारों का कहना है कि अगर अमेरिका एकपक्षीय और बलपूर्वक तरीक़े से 20 सितंबर मध्य रात्रि से ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों की वापसी की घोषणा करता है तो इसको लेकर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर एक बड़ा विवाद पैदा हो जाएगा और विवाद उस समय टकराव में बदल जाएगा जब प्रतिबंधों के कार्यान्वयन की देखरेख के लिए समितियों के गठन का मामला सामने आएगा।

वहीं संयुक्त राष्ट्र संघ में एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया है कि अमेरिका सुरक्षा परिषद के प्रमुख के नाम एक पत्र भेजकर यह मांग करना चाहता है कि वह एक ऐसी समिति का गठन करे जो प्रतिबंधों के कार्यान्वयन की निगरानी करे, लेकिन माना जा रहा है सुरक्षा परिषद अमेरिका की इस मांग को स्वीकार नहीं करेगा। इस अमेरिकी अधिकारी ने अपना नाम न बताए जाने की शर्त पर कहा कि अमेरिका की ओर से की जाने वाली कार्यवाहियां असफल रहेंगे, क्योंकि सुरक्षा परिषद में किसी भी मामले को लेकर उसके पास बहुमत नहीं है। इस बीच रोयटर्स ने लिखा है कि ट्रम्प सुरक्षा परिषद में लगातार मिलती हार से इतना ज़्यादा बौखला गए हैं कि वह चाहते हैं कि ईरान के ख़िलाफ़ ऐसा आदेश जारी करें कि जिसकी बुनियाद पर उसके ज़रिए ईरान पर हथियारों के प्रतिबंधों के उल्लंघन करने वालों पर भी वह पाबंदी लगा सके। (RZ)

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