Sep १९, २०२० २१:३५ Asia/Kolkata
  • ट्रम्प को यूरोपीय ट्राॅयका का एक और ज़न्नाटेदार थप्पड़, अपना बेड़ा फ़ार्स की खाड़ी में भेज कर ट्रम्प ने क्या अमरीकी सैनिकों को मौत के मुंह में भेज दिया?

जर्मनी, फ़्रान्स और ब्रिटेन ने अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प और इस देश के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो को एक और करारा तमांचा रसीद कर दिया है।फ़

इन तीन यूरोपीय देशों ने संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद को एक पत्र भेज कर ईरान के ख़िलाफ़ राष्ट्र संघ के प्रतिबंधों की बहाली पर अपने विरोध की घोषणा कर दी है। इन देशों ने अपने पत्र में लिखा है कि ईरान के ख़िलाफ़ किसी भी तरह के प्रस्ताव या राष्ट्र संघ के प्रतिबंधों की बहाली का कोई क़ानूनी औचित्य नहीं है। इन तीन यूरोपीय देशों ने जो पारंपरिक रूप से अमरीका के घटक हैं, अपना यह पत्र, ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों की बहाली के लिए पोम्पियो की ओर से निर्धारित तारीख़ यानी 20 सितम्बर से एक दिन पहले भेजा है। यह पत्र भेज कर ब्रिटेन, फ़्रान्स और जर्मनी ने ईरान के मुक़ाबले में क़ानूनी व अंतर्राष्ट्रीय दृष्टि से अमरीका का साथ पूरी तरह छोड़ दिया है।

 

यूरोप की यह ठोस नीति, चीन व रूस के रुख़ की मज़बूती का कारण बनी है जिन्होंने पहले ही अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में अमरीका की एकपक्षीय नीतियों की निंदा की थी। रूस ने ईरान के मुक़ाबले में अमरीकी सरकार के रवैये को लाभहीन बताया और कहा है कि इसका कोई नतीजा नहीं निकलेगा। चीन ने भी लागतार यही कहा है कि ईरान पर प्रतिबंध लगवाने की अमरीका की कोशिशें सुरक्षा परिषद के अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों के विरुद्ध हैं। ट्रम्प द्वारा अमरीका की वर्तमान सरकार में इस्राईल के सबसे मज़बूत मोहरे जेरेड कूश्नर का आंख बंद करके अनुसरण, इस बात का कारण बना कि उन्होंने परमाणु समझौते को ठीक से पढ़े बग़ैर ही उससे निकलने का फ़ैसला कर लिया। इस तरह से उन्होंने विश्व स्तर पर अमरीका की साख तो ख़राब की है, अपने अहम यूरोपीय घटकों को भी खो बैठे।

 

ट्रम्प के इस मूर्खतापूर्ण क़दम को तीन साल बीत चुके हैं लेकिन न सिर्फ़ यह कि यूरोप ने अमरीका का समर्थन नहीं किया है बल्कि रूस और चीन पूरी से खुल कर ईरान के विरुद्ध अमरीकी नीतियों के ख़िलाफ़ खड़े हो गए हैं।  इससे भी अहम बात यह है कि ईरान, अमरीका के दबाव में नहीं आया और वह अमरीका के आर्थिक आतंकवाद के मुक़ाबले में डट कर खड़ा हो गया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अमरीका की जो फ़ज़ीहत हो रही है और वह अपमानजनक तरीक़े से अलग-थलग पड़ गया है, उसकी सिर्फ़ एक वजह है, और वह है ईरानी का ज़िम्मेदारानी और बुद्धिमत्तापूर्ण रवैया जिसके चलते उसने अन्य देशों के सिलसिले में अमरीका के कुरूप चेहरे को सबके सामने उजागर कर दिया।

 

पोम्पियो की धमकी को सिर्फ़ एक दिन का समय बचा है और वे अपनी धमकी के अनुसार रविवार को ट्रिगर मेकेनिज़म को सक्रिय करने वाले हैं। टीकाकारों का कहना है कि इस ट्रिगर के दबने से अमरीका की ज़ंग लगी बंदूक़ से कोई गोली फ़ायर नहीं होगे। पोम्पियो और उनके आक़ा यानी ट्रम्प के पास अब यही विकल्प बचा है कि अन्य अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की तरह वे संयुक्त राष्ट्र संघ से भी निकल जाएं, या फिर इस संगठन की वित्तीय सहायताएं बंद कर दें। ट्रम्प और पोम्पियो ने इसी परिप्रेक्ष्य में ईरान को धमकाने के लिए अपना एक बेड़ा फ़ार्स की खाड़ी में भेज दिया है ताकि दुनिया को ईरान के साथ सहयोग के परिणाम से डरा सकें लेकिन यह दोनों यह बात भूल रहे हैं कि ईरान में अभी ऐसे मर्द हैं जो कई दशकों से यह जानते हैं कि किस तरह अमरीका के विमान वाहक पोतों को निशाना बनाएं। ट्रम्प की टीम का शुक्रिया जो वह अपने बेड़ों के शिकार का ऐसा अवसर इन मर्दों को दे रही है। (HN)

 

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