Sep ३०, २०२० १७:५६ Asia/Kolkata

नागोर्नो काराबाख़ इलाक़े में आर्मीनिया और आज़रबाइजान गणराज्य के बीच छिड़ी जंग में मौतों का आंकड़ा तेज़ी से बढ़ रहा है और दोनों की देश वार्ता के लिए पड़ने वाले दबाव को स्वीकार नहीं कर रहे हैं।

दशकों पुराने विवाद के नतीजे में चार दिन पहले झड़पें शुरू हो गईं जिसके लिए येरवान और बाकू एक दूसरे को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं।

आज़रबाइजान के रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को अपने बयान में कहा है कि काराबाख़ इलाक़े के क़रीब स्थित तरतर शहर पर आर्मीनिया की ओर से शेलिंग की जा रही है जिससे नागरिक प्रतिष्ठानों को नुक़सान पहुंचा है।

आज़रबाइजान का प्रासिक्यूटर जनरल के कार्यालय ने कहा है कि आर्मीनिया के हमलों में अब तक 12 आज़री मारे जा चुके हैं और 35 घायल हुए हैं।

आर्मीनिया का कहना है कि आज़रबाइजान की सेना ने काराबाख़ में हमले करके भारी नुक़सान पहुंचाया है।

झड़पें शुरू होने के बाद से दोनों ही देशों में मार्शल ला की घोषणा कर दी गई है।

आज़रबाइजान का कहना है कि उसकी सेना ने आर्मीनिया का एस-300 मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम ध्वस्त कर दिया है। आज़रबाइजान के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि देश की सेना ने कम से कम 2700 आर्मीनियाई सैनिकों को हताहत और घायल किया है।

इससे पहले मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि देश की सेना ने आर्मीनिया की पूरी रेजीमेंट को तबाह कर दिया।

आर्मीनिया का कहना है कि आज़रबाइजान का दावा बेबुनियाद है।

आर्मीनिया के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि झड़पों में होने वाले नुक़सान की रिपोर्ट तैयार की जा रही है जिसका बाद में एलान किया जाएगा।

आर्मीनिया का कहना है कि उसका एक विमान तुर्की के फ़ाइटर जेट ने मार गिराया है जबकि तुर्की ने इस आरोप का खंडन किया है। तुर्की इस लड़ाई में आज़रबाइजान का साथ दे रहा है। आर्मीनिया का कहना है कि तुर्की के एफ़-16 युद्धक विमान आर्मीनिया की वायु सीमा का उल्लंघन कर रहे हैं और आज़रबाइजान से उड़ान भरने वाले तुर्क एफ़-16 विमान ने आर्मीनिया का एसयू-25 जेट मार गिराया है। अंकारा और बाकू दोनों ने इस आरोप का खंडन किया है।

तेहरान का कहना है कि ईरान, तुर्की और रूस मिलकर काराबाख़ के बारे में आज़रबाइजान और आर्मीनिया का विवाद हल करवा सकते हैं मगर इस समय बाकू और येरवान दोनों ही वार्ता की मेज़ पर आने से इंकार कर रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद ने दोनों देशों से मांग की है कि वह तत्काल झड़पें बंद करें और शांति वार्ता शुरू करें।

1992 में जब आर्मीनिया और आज़रबाइजान सोवियत संघ से अलग हुए तो काराबाख़ क्षेत्र के आर्मीनियाई मूल के लोगों ने येरवान के समर्थन से काराबाख़ इलाक़े पर नियंत्रण कर लिया। झड़पों में लगभग 30 हज़ार लोग मारे गए थे और 1994 में संघर्ष विराम का समझौता हुआ था जबकि आज़रबाइजान का लगभग 20 प्रतिशत भाग आर्मीनियाई मूल के अलगाववादियों के नियंत्रण में बाक़ी रहा। इसके बाद से ही यह मुद्दा विवाद का आधार बना हुआ है।

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