Oct १९, २०२० २२:३१ Asia/Kolkata
  • ट्रम्प के ट्वीट से हंगामा, क्या ज़िन्दा है उसामा बिन लादिन? कुछ चुभते सवाल, रायुलयौल का धमाकेदार जायज़ा

लंदन से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र रायुल यौम ने अपने संपादकीय में उसामा बिन लादिन के मारे जाने के बारे में ट्रम्प के एक ट्वीट का जायज़ा लिया है।

अमरीकी राष्ट्रपति ने एक बार फिर अपने बयान से अमरीका और दुनिया में तूफान खड़ा कर दिया है। दर उन्होंने उस ट्वीट को रीट्वीट कर दिया जिसमें दावा किया गया है कि अलकायदा का सरगना उसामा बिन लादिन मरा नहीं और वह अब भी ज़िंदा है और जिसे मारा गया वह वास्तव में उसका डुप्लीकेट था।

     वैसे ट्रम्प झूठ बोलने के लिए काफी  बदनाम हैं इसी तरह सब को मालूम है कि वह दूसरी बार अमरीका का राष्ट्रपति बनने के लिए कितना हाथ पैर मार रहे है लेकिन, ट्रम्प के समर्थकों की " क्यू एनोन" नामक  बेबसाइट के ट्वीट को रीट्वीट करना भूल तो नहीं हो सकती वह भी अमरीका जैसे देश के राष्ट्रपति की ओर से जिसके पास हर प्रकार की सूचना प्राप्त करने के पर्याप्त साधन हर वक्त मौजूद रहते हैं।

 

     हमें इस बात में तो  कोई शक नहीं कि ट्रम्प ने इस दावे को चुनावी अभियान के हिस्से के रूप में रीट्वीट किया है और इस तरह से अपने प्रतिस्पर्धी जो बाइडन की पोज़ीशन कमज़ोर करने की कोशिश की है जो उसामा बिन लादिन के मारे जाने के समय अमरीका के उप राष्ट्रपति थे और जिन्हें सर्वेक्षणों में ट्रम्प से आगे बताया जा रहा है लेकिन हमें यह नहीं लगता कि वह अपने इस तरह के बयानों से चुनावी फायदा उठा पाएंगे हां लेकिन इस से वह अपने देश की सेना और खुफिया व्यवस्था की बड़ी आसानी की मिट्टी पलीद ज़रूर कर देंगे।

     उसामा बिन लादिन की हत्या के लिए जाने वाली टीम के हिस्सा रहे रार्बट ओनील ने एक डाक्यूमेंन्ट्री में कहा है कि उन्हों उसामा बिन लादिन पर गोली चलायी थी, अब ट्रम्प के बयान के बाद उन्होंने ट्रम्प का मज़ाक उड़ाते हुए कहा है कि उन्होंने जिसे मारा है वह खुद शेख उसामा बिन लादिन था कोई और नहीं।

     यहां पर इस ट्वीट की सच्चाई और उसके झूठ होने के बारे में कुछ चीज़ें  हैं जिन पर ध्यान देना चाहिएः

एक तो यह कि उसामा बिन लादिन के मारे जाने के लगभग 9 साल बाद भी आज तक हमने अलकायदा के इस सरगना की लाश का कोई फोटो नहीं देखा हालांकि हमने राष्ट्रपति ओबामा और उसने सहयोगियों को उसामा बिन लादिन की हत्या के आप्रेशन को मिनट मिनट पर देखते हुए देखा और यह भी कहा गया कि पूरे आप्रेशन के क्षण क्षण को रिकार्ड किया गया है, आरंभ से लेकर अंत तक।

     दूसरी बात यह है कि समुद्र में इस्लामी तरीक़े से और एक इस्लामी मौलवी की उपस्थिति में उसामा को दफ्न करने का दावा बहुत से लोगों के गले से नहीं उतरा विशेष कर इस लिए कि अमरीका ने इसके लिए यह दावा किया कि वह उसामा बिन लादिन को " शहीद" और उसकी क़ब्र को मज़ार नहीं बनाना चाहता था।

 

     तीसरी बात यह कि बिन लादिन का परिवार, उसकी बीवी, बेटे और बेटियां, इस वक्त सऊदी अरब के जद्दा नगर में एक इमारत में सऊदी सुरक्षा कर्मियों के कड़े पहरे में रह रही हैं और उन्हें उसामा बिन लादिन की हत्या के बारे में किसी भी प्रकार की सूचना देने की अनुमति नहीं है विशेष कर किसी पत्रकार को, और अगर इस बारे में किसी से बात करना है तो  उसकी सऊदी सरकार से पहले से अनुमति लेनी होगी और यह बातचीत सऊदी अधिकारियों की उपस्थिति में होगी इन सब के बावजूद आज तक गार्डियन के एक पत्रकार के अलावा कोई मिल नहीं सका और यह भेंट भी सऊदी सुरक्षा अधिकारियों की देख रेख में हुई  थी।

     चौथी बात यह कि हमने यह कभी नहीं सुना कि उसामा बिन लादिन का भी कोई डुप्लीकेट है। हां अमरीकी सरकार ने सद्दाम के बारे में यह हथकंडा अपनाया था और डुप्लीकेट की बात मशहूर की थी लेकिन सद्दाम को मृत्युदंड दिये जाने के बाद यह विचार भी गलत सिद्ध हो  गया लेकिन ट्रम्प के पास सच्चाई जानने के पर्याप्त साधन मौजूद  हैं।

     पांचवी बात  यह है कि अगर यह ड्रामा है तो  स्वंय ट्रम्प सरकार भी इसी नाटक का मंचन कर चुकी है और ट्रम्प भी ओबामा की ही राह पर चले हैं क्योंकि ट्रम्प सरकार ने भी आतंकवादी संगठन दाइश के सरगना अबूबक्र अलबगदादी के मारे जाने की कहानी गढ़ी थी और दावा किया था कि अबूबक्र अलबगदादी, अमरीकी खुफिया एजेन्टों के चंगुल में एक गुफा में फंस गया था और उसके साथ उसकी कई बीवियां और बच्चे थे लेकिन आज तक उनका एक फोटो तक किसी को नज़र नहीं आया। हो  सकता है ट्रम्प ने भी अमरीका में खुफिया तंत्रों के इस प्रकार के ड्रामों  से पाठ लिया हो।

बिन लादिन की मां 

 

     छठीं बात यह है कि सद्दाम को फांसी दिये जाने की आडियो वीडियो दोनों को सामने आने दिया इसी तरह सद्दाम के दोनों बेटों, उदय और कुसैय की लाशों को फोटोग्राफरों को दिखाया इसी तरह फ्रांस की खुफिया एजेन्सी ने गद्दाफी की लाश को भी सब को दिखाया तो फिर बिन लादिन और अलबगदादी की लाशों के साथ ऐसा क्यों नहीं किया?

     सच्चाई तो यह है कि हमारे पास इतनी मालूमात नहीं है कि हमें इन सब सवालों के जवाब मिल जाएं लेकिन हमें यह ज़रूर और बहुत अच्छी तरह से पता है कि एक ट्रम्प ही अकेले झूठे नहीं हैं  बल्कि उनका संबंध उस सरकार से है जो अपने भयानक युद्धों का औचित्य दर्शाने और अपने अपराध छुपाने के लिए पेशेवराना तौर पर झूठ बोलती है, सच्चाई को तोड़ मरोड़ देती है विशषकर मध्य एशिया में जिसकी एक मिसाल, इराक़ में सामूहिक विनाश के हथियार होने का दावा भी है।

     अब पता नहीं उसामा बिन लादिन की हत्या के बारे में ट्रम्प का यह ट्वीट चुनाव में उनकी मदद करेगा या उनके पतन की गति तेज़ करेगा हां यह भी हो सकता है कि पिछले 4 बरसों में उन की ज़बान से निकलने वाली यही एकमात्र सच्चाई हो!  साभार, रायुलयौम, लंदन Q.A

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