Oct २२, २०२० ०९:५७ Asia/Kolkata
  • यूरोप में जीवन गुज़ारने के अपने अनुभव के तहत हम फ़्रांस में मुसलमानों के ख़िलाफ़ मैक्रां के नस्लवादी हमलों का इस अंदाज़ से जवाब देंगे

मैं पिछले 42 साल से यूरोप में जीवन गुज़ार रहा हूं और यहां के मशहूर विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा हासिल करने का मुझे मौक़ा मिला। इस समय मैं मुसलमानों और प्रवासियों के ख़िलाफ़ जिस प्रकार की भवनाएं और तेज़ हमले देख रहा हूं वह पहले कभी नज़र नहीं आए।

इस स्थिति के चलते इन देशों में शांतिपूर्ण सामाजिक जीवन ख़तरे में पड़ता जा रहा है और गृह युद्ध की आशंकाएं पैदा हो रही हैं।

मैं यहां फ़्रांस के हालात और इस देश के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रां की ओर से इस्लाम और मुसलमानों पर जारी हमलों की बात कर रहा हूं। अब तक 328 से अधिक मस्जिदों और मदरसों को बंद किया जा चुका है। यह सब कुछ तब शुरू हुआ जब क्लास के अंदर इतिहास के एक टीचर ने पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद का एक कार्टून दिखाया जो बेहद आपत्तिजनक और अपमानजनक था और इससे आहत होकर चेचनियाई मूल के एक युवा ने सड़क पर उस टीचर का सिर काट दिया।

लगभग 18 साल के किशोर ने जिस तरह अपने टीचर सैमुएल बाटी का सिर काटा वह बेहद निंदनीय क़दम है इसमें किसी को कोई शक नहीं है। इस तरह की घटनाएं यूरोपीय देशों में लगातार हो रही हैं। मगर इसे इस्लामी आतंकवाद कहना और टीचर की घटिया हरकत के बारे में कोई बात न करना खुला हुआ नस्लवाद है। इससे धार्मिक प्रतीकों के अनादर की घटनाओं में वृद्धि होगी।

यह सही है कि यूरोप में मुस्लिम आबादी के भीतर चरमपंथी मैजूद हैं मगर उनकी संख्या बहुत सीमित है अधिकतर मुसलमान वह हैं जो संतुलित विचार रखते हैं और अच्छे नागरिक के रूप में जीवन गुज़ार रहे हैं। चरमपंथी विचार के लोग इन मुसलमानों को भी निशाना बनाते हैं मगर उन गिने चुने चरमपंथियों की हरकत के लिए पूरे मुस्लिम समाज को निशाना बनाने की कोशिश खेदजनक है।

फ़्रांस के बड़े शहरों के उपनगरीय इलाक़ों में बसने वाले मुसलमानों के बारे फ़्रांसीसी सरकारों ने उपेक्षा की जो नीति अपनाई और उनके साथ जो भेदभाव हुआ है उसका बहुत बुरा नतीजा सामने आया है।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने गृह मंत्री के रूप में उस व्यक्ति का चयन किया जो शापिंग माल में हलाल खानों के कार्नर का तो विरोध करता है मगर वहीं यहूदियों के विशेष रेस्तोरानों कूशर पर उसे कोई एतेराज़ नहीं है। जिन मस्जिदों पर चरमपंथ फैलाने का आरोप लगाया जा रहा है उनका निर्माण और संचालन फ़्रांस के घटक अरब देशों की ओर से किया जाता रहा है जिन्हें आज भी फ़्रांस बड़े पैमाने पर हथियार बेच रहा है। हम यहां विशेष रूप से सऊदी अरब का नाम लेना चाहेंगे।

हम मैक्रां को याद दिलाना चाहेंगे कि उनके देश ने चरमपंथियों का ख़ूब हौसला बढ़ाया और सीरिया जाने के लिए उकसाया ताकि वह वहां धर्म निरपेक्ष सरकार का तख़्ता उलट दें। इन चरमपंथियों के लिए हथियारों की सप्लाई का रास्ता खुलवाने के लिए फ़्रांस के पूर्व प्रधानमंत्री पूर्व ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरोन के साथ ब्रसेल्ज़ गए थे और सीरिया के लिए हथियारों की सप्लाई पर लगा प्रतिबंध हटवाया था। जब यह चरमपंथी सीरिया में सरकार गिराने में नाकाम हो गए तो फ़्रांस ने उनसे पल्ला झाड़ लिया।

हम भी चरमपंथ और आतंकवाद के विरोधी हैं मगर हर प्रकार के आतंकवाद का विरोध करने पर ज़ोर देते हैं फिर चाहे वह यहूदी आतंकवाद हो जिसने फ़िलिस्तीन की धरती हड़प रखी है, या ईसाई आतंकवाद हो जो क्रूसेड के रूप में सामने आया या इस्लामी आतंकवाद हो। हम सभी धर्मों के मेल जोल और समानता पर आधारित संयुक्त जीवन के समर्थक हैं। हम भेदभाव का विरोध करते हैं। हम इसके विरोधी हैं कि मुसलमानों को ही आतंकवादी कहा जाए जबकि साम्राज्यवादी ताक़तों के विश्व भर में फैले आतंकवाद को नज़रअंदाज़ किया जाए।

जब पेरिस में चार्ली हेब्दू आतंकी हमला हुआ था तो पेरिस में अरब नेताओं की भीड़ लग गई थी और सबने टीशर्ट पहनी थी जिस पर लिखा था हम सब चार्ली हेब्दू हैं मगर जब न्यूज़ीलैंड का आतंकी हमला हुआ तो कितने यूरोपीय नेता वहां पहुंचे और पीड़ितों के समर्थन में खड़े हुए?

फ़्रांस में लगभग एक करोड़ प्रवासी मुसलमान रहते हैं जबकि अन्य प्रवासियों को मिलाया जाए तो यह बहुत बड़ी संख्या है। मैक्रां की यह नस्लवादी नीति उनके लिए काफ़ी महंगी पड़ सकती है।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के वरिष्ठ लेखक व टीकाकार

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