Oct २४, २०२० १६:१४ Asia/Kolkata
  • आंतरिक मुद्दों पर लड़ा जा रहा है राष्ट्रपति चुनाव, क्या सुपर पावर की छवि खो रहा है अमरीका?

अमरीका में इन दिनों राष्ट्रपति चुनाव का दंगल अपने चरम पर है। इस दंगल में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार और वर्तमान राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के मुक़ाबले में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार और ओबामा प्रशासन में उप राष्ट्रपति रह चुके जो बाइडन मौजूद हैं।

बाइडन और ट्रम्प की बहस को सुना जाए तो इन दोनों में बड़ी कड़वाहट दिखाई देती है। फिर इस बार अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में इस्लामोफ़ोबिया, आतंकवाद से युद्ध या अफ़ग़ानिस्तान से अमरीकी सैनिकों की वापसी जैसे मुद्दों के बजाए सारा ध्यान अमरीका की आंतरिक समस्याओं पर है।

चुनावी बहस के महत्वपूर्ण विषयों में कोरोना की महामारी पर नियंत्रण, स्वास्थ्य विभाग की जर्जर स्थिति, अर्थ व्यवस्था को पटरी लाने की कोशिशें और टैक्स सुधार हैं।

राष्ट्रपति ट्रम्प रंगभेद और नस्लभेद के समर्थक दिखाई देते हैं तो दूसरी ओर जो बाइडन अमरीका के हर विभाग से नस्ल परस्ती को बाहर निकाल देने का संकल्प दोहरा रहे हैं।

पुलिस के हाथों जार्ज फ़्लाइड की हत्या की बहुचर्चित घटना के बाद पूरे अमरीका में नस्ल परस्ती के ख़िलाफ़ माहौल अपने चरम पर है जबकि गोरे नस्ल परस्त भी खुलकर सामने आ गए हैं।

1971 से अमरीका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था है। ट्रम्प ने जब सत्ता संभाली थी तो उस समय अमरीका मंदी के दौर से उबर रहा था और अमरीकी अर्थ व्यवस्था एक बार फिर रफ़तार पकड़ रही थी। मगर अब कोरोना ने सारी दुनिया की तरह अमरीकी अर्थ व्यवस्था को भी बुरी तरह अपने चंगुल में जकड़ लिया है। तिमाही बुनियादों पर अमरीकी अर्थ व्यवस्था में 5 प्रतिशत तक गिर गई थी मगर वाइट हाउस की रिपोर्ट कहती है कि अर्थ व्यवस्था ने फिर रफ़तार पकड़ ली है।

जो बाइडन अर्थ व्यवस्था में भी नस्ल परस्ती को ख़त्म करने पर ज़ोर देते हैं और उनका कहना है हर अमरीकी को बिना किसी भेदभाव उसकी मेहनत की पूरी मज़दूरी मिलनी चाहिए। बाइडन ने कोरोना से प्रभावित होने वाले कारोबार में भी नस्ली भेदभाव की मिसालें पेश कर दीं। उनका कहना था कि अफ़्रीक़ी-अमरीकियों के कारोबार ज़्यादा प्रभावित हुए।

कोरोना की वजह से अमरीका के हेल्थ सेक्टर में संकट फैल गया है। अमरीका में 70 लाख लोग कोरोना का शिकार हुए हैं और 2 लाख से अधिक लोगों को जान गवांनी पड़ी है। अमरीका दुनिया की आबादी का चार प्रतिशत है जबकि अमरीका में कोरोना से होने वाली मौतें दुनिया में होने वाली मौतों का 20 प्रतिशत हैं।

अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प पूर्व राष्ट्रपति ओबामा की ओर से लाए गए ओबामा केयर बिल को ख़त्म करने की कोशिश में हैं। उनका कहना है कि उन्होंने स्वास्थ्य के विभाग पर विशेष ध्यान दिया है और दवाओं को सस्ता कर दिया है तो ओबामा केयर की ज़रूरत ही नहीं रही। वहीं बाइडन कहते हैं कि अगर मौक़ा मिला तो वह ओबामा केयर को आगे बढ़ाएंगे।

बाइडन और ओबामा दोनों इस बात पर समान विचार रखते हैं कि पैदावारी विभाग को दोबारा अमरीका के भीतर लाया जाए।

अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में अमरीकी जनता के लिए फ़ैसला करना कठिन होगा कि नस्ल परस्त ट्रम्प को वोट दें जिन्होंने टैक्स में छूट दी है या जो बाइडन जैसे लिबरल विचार के व्यक्ति को वोट दें जो अतिरिक्त टैक्स लगाने के बारे में सोच रहे हैं। फ़ैसला तो 3 नवम्बर को होगा लेकिन इतना तो है कि बहुत लंबे समय बाद अमरीका का चुनाव आंतरिक मुद्दों के इर्द गिर्द घूम रहा है।

राजा कामरान

पाकिस्तानी पत्रकार

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