Oct २५, २०२० १५:२४ Asia/Kolkata
  • फ़्रांसीसी राष्ट्रपति के मानसिक उपचार की सलाह पर भड़का फ़्रांस, तुर्की से अपना राजदूत वापस बुला लिया

शनिवार को तुर्क राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोगान ने अपने फ़्रांसीसी समकक्ष इमानुएल मैक्रां से कहा था कि उनकी दिमाग़ी हालत सही नहीं है, इसलिए उन्हें तुरंत उपचार की ज़रूरत है।

तुर्क राष्ट्रपति की इस सलाह पर कड़ी आपत्ति के रूप में फ़्रांस ने तुर्की से अपने राजदूत को वापस बुलाने का एलान किया है।

फ़्रांस का कहना है कि राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रां की मानसिक स्थिति के बारे में तुर्क राष्ट्रपति की टिप्पणी अस्वीकार्य है और हम तुर्की से अपना राजदूत वापस बुला रहे हैं।

अर्दोगान का आरोप है कि मैक्रां इस्लामोफ़ोबिया फैला रहे हैं और अपने ही देश के लाखों मुसलमानों के साथ बुरा बर्ताव कर रहे हैं।

अर्दोगान का यह बयान फ़्रांसीसी सरकार द्वारा पेरिस स्थित एक मस्जिद को बंद किए जाने का आदेश देने और दर्जनों अप्रवासी मुसलमानों को फ़्रांस से निकालने की घोषणा के बाद सामने आया है।

अंकारा का कहना है कि फ़्रांसीसी सरकार कट्टरपंथी इस्लाम के ख़िलाफ़ अभियान चलाने और फ्रांस के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा के बहाने इस्लाम और मुसलमानों को निशाना बना रही है।

अर्दोगान का कहना है कि एक ऐसे राष्ट्राध्य के बारे में क्या कहा जा सकता है, जो धार्मिक आज़ादी को नहीं समझता है और अपने ही देश के लाखों अल्पसंख्यकों के साथ ऐसा बुरा बर्ताव कर रहा है? सबसे पहले ऐसे शख़्स को अपने दिमाग़ का इलाज कराना चाहिए।

दर असल, फ़्रांस और उसके कुछ सहयोगी, पूर्वी भूमध्यसागर में समुद्री अधिकारों, लीबिया और नागोर्नो-कारबाख़ जैसे मुद्दों को लेकर एक दूसरे के सामने हैं।

विवादित आज़री क्षेत्र नागोर्नो-काराबाख़ को लेकर आर्मेनिया और आज़रबाइजान के बीच क़रीब पिछले एक महीने से संघर्ष जारी है।

फ्रांस इस संघर्ष के समाधान के लिए गठित समिति का हिस्सा है। हालांकि तुर्क राष्ट्रपति का कहना है कि आज़रबाइजान-आर्मेनिया युद्ध के पीछे फ़्रांस का हाथ है।

उन्होंने कहा कि फ़्रांस मिन्स्क समूह में है, लेकिन उसने आज़रबाइजान के इलाक़े को आज़ाद कराने के बजाए, आर्मेनिया को हथियार भेजे हैं। क्या आर्मेनिया को हथियारों की आपूर्ति से इस क्षेत्र में शांति की स्थापना होगी।

तुर्की एक बहुसंख्यक मुस्लिम लेकिन धर्मनिरपेक्ष देश है, जो नाटो का भी सदस्य है, लेकिन यूरोपीय संघ का सदस्य नहीं है, क्योंकि फ़्रांस और जर्मनी जैसे यूरोपीय देशों से कई विवादों को लेकर दशकों से इसकी सदस्यता पर बात आगे नहीं बढ़ी है। msm

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