Oct २९, २०२० ०९:४८ Asia/Kolkata
  • इस्लामोफ़ोबिया के ख़िलाफ़ एकजुट होकर आवाज़ उठाने पर इमरान ख़ान का ज़ोर

पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने मुस्लिम देशों के राष्ट्राध्यक्षों को एक पत्र लिख कर कहा है कि वे इस्लामोफ़ोबिया विशेष कर यूरोपीय देशों के बयानों के ख़िलाफ़ चरमपंथ को ख़त्म करने के लिए एकजुट हो कर नेतृत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

इमरान ख़ान ने ट्वीटर पर जारी इस ख़त में लिखा है कि मुस्लिम समुदाय में बढ़ती बेचैनी और चिंता की वजह पश्चिमी दुनिया विशेष कर यूरोप में इस्लामोफ़ोबिया में तेज़ी, नफ़रत और हमारे प्यारे पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम का अनादर है। उन्होंने कहा कि पूरे यूरोप में मुस्लिम विरोधी भावनाएं फैल रही हैं जहां मस्जिदों को बंद कर दिया गया और मुस्लिम महिलाओं को सार्वजनिक स्थलों पर अपनी मर्ज़ी के कपड़े पहनने की अनुमति नहीं दी जा रही है जबकि पादरी व नन्स तक अपने धार्मिक वस्त्रों में होती हैं।

 

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि यूरोपीय देशों के नेता मुसलमानों के क़ुरआने मजीद और पैग़म्बर इस्लाम के प्रति प्यार व सम्मान के बारे में अधिकतर अज्ञान के आधार पर प्रतिक्रिया देते हैं और उनकी कार्यवाहियां ख़तरनाक क्रिया और उसकी प्रतिक्रिया का कारण बन जाती हैं जिसके परिणाम स्वरूप उन समाजों में मुसलमान पीछे रह जाते हैं। इमरान ख़ान ने कहा कि मुसलमानों के पिछड़ेपन की वजह से रुढ़िवाद जन्म लेता है और यह घृणित चीज़ हर तरफ़ चरमपंथियों को अवसर प्रदान कर देती है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम शासकों के लिए यह समय है कि वे एकजुट हो जाएं और घृणा व चरमपंथ की इस ज़ंजीर को तोड़ दें जो तनाव यहां तक कि लोगों की जान तक चले जाने का कारण बनती है।

 

इस बीच फ़्रान्स के राष्ट्रपति द्वारा पैग़म्बरे इस्लाम के अनादर और उनके ख़िलाफ़ आने वाली प्रतिक्रियाओं के मामले में भारत ने फ़्रान्सीसी राष्ट्रपति का समर्थन किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करके कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय वाद-विवाद के सबसे बुनियादी मानकों के उल्लंघन के मामले में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के ख़िलाफ़ अस्वीकार्य भाषा में व्यक्तिगत हमलों की हम निंदा करते हैं। साथ ही भयानक तरीक़े से क्रूर आतंकवादी हमले में फ़्रांसीसी शिक्षक की जान लिए जाने की भी भारत निंदा करता है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने फ़्रान्सीसी मैग़ज़ीन में 1.9 अरब मुसलमानों की भावनाओं को आहत किए जाने, पैग़म्बर का अपमानजनक कार्टून प्रकाशित किए जाने और फ़्रान्सीसी राष्ट्रपति द्वारा पैग़म्बरे इस्लाम के अनादर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं जताई गई है। (HN)

 

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