Oct ३०, २०२० ०९:२५ Asia/Kolkata
  • महातीर मुहम्मदः बदले के तर्क के आधार पर मुसलमान लाखों फ़्रांसीसियों के क़त्ल का अधिकार रखते हैं

मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री महातीर मुहम्मद का कहना है कि मुसलमानों के पास इस बात का हक़ है कि वह अतीत में हुए ज़ुल्म पर आक्रोश में आएं और फ़्रांस के लाखों लोगों को क़त्ल कर दें।

 

ट्वीटर की ओर से महातीर मुहम्मद के इस ट्वीट को तत्काल हटा दिया गया जबकि यूज़र्स ने इसकी कड़ी आलोचना की। रोयटर के अनुसार महातीर मुहम्मद की यह टिप्पणी लंबे ब्लाग का हिस्सा थी जो ट्वीटर पर शेयर किया गया था।

महातीर मुहम्मद ने अपनी पोस्ट इस तरह शुरू की कि मुसलमान होने की हैसियत से उन्होंने फ़्रांसीसी टीचर सैमुएल पेटी की हत्या की अनुमति नहीं दी जबकि अभिव्यक्ति की आज़ादी को दूसरों के अपमान के लिए प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसी की हत्या वह कृत्य नहीं है जिसकी मैं मुसलमान होने की हैसियत से अनुमति दूंगा लेकिन चूंकि अभिव्यक्ति की आज़ादी पर विश्वास रखता हूं इसलिए मैं यह नहीं समझता कि इसमें दूसरों का अपमान करना शामिल, आप किसी के पास जाकर उसे केवल इसलिए बुरा भला नहीं कह सकते क्योंकि आप को अभिव्यक्ति की आज़ादी है।

मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि फ़्रांसीसियों ने अपने इतिहास में लाखों लोगों को क़त्ल किया है जिनमें अधिकतर मुसलमान थे। इसलिए मुसलमानों के पास इस बात का अधिकार है कि वह अतीत के ज़ुल्म पर तैश में आएं और फ़्रांस के लाखों लोगों को क़त्ल कर दें लेकिन आम तौर पर मुसलमानों ने आंख के बदले आंख के क़ानून पर अमल नहीं किया है, वह एसा नहीं करते और फ़्रांसीसियों को भी नहीं करना चाहिए।

महातीर मुहम्मद का कहना था कि चूंकि आपने एक आक्रोशित व्यक्ति की हरकत की वजह से सारे मुसलमानों और उनके धर्म को कटघरे में खड़ा किया है तो मुसलमानों के पास भी हक़ है कि वह फ़्रांसीसियों को सज़ा दें।

मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री ने फ़्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रां की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने आनन फ़ानन में इस्लाम और मुसलमानों पर हमला कर दिया।

महातीर मुहम्मद ने कहा कि मुस्लिम बाहुल देश मलेशिया अपने नागरिकों की वजह से एक शांत और मज़बूत देश है, यह नागरिक विभिन्न नस्लों और धर्मों से ताल्लुक़ रखते हैं जिन्हें दूसरों के संवेदनशील विषयों का पूरा आभास है।

महातीर मुहम्मद ने कहा कि हालांकि बाक़ी दुनिया पश्चिम की तौर तरीक़ों की नक़ल करती है लेकिन नस्लों और धर्मों के बीच हमारे अपने और अलग मूल्य हैं जिन्हें हमे मज़बूत बनाने की ज़रूरत है।

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